60% तैयार, इंदौर में बन रहा है नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर की तर्ज़ पर शिवधाम

Published : May 23, 2025, 02:45 PM IST
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सार

Tillor Khurd Shiva Dham: इंदौर के पास तिल्लौर खुर्द में नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर की तर्ज पर भव्य शिव मंदिर बन रहा है। सामाजिक और सांस्कृतिक उत्थान के केंद्र के रूप में, यह शिवधाम 12 फीट ऊंची लकड़ी की मूर्तियों।

Shiva temple construction in Indore: इंदौर से महज 20 किलोमीटर दूर, तिल्लौर खुर्द की शांत भूमि पर आध्यात्मिकता की नई इबारत लिखी जा रही है। यहां नेपाल के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर की वास्तुशैली में एक भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है, जहां सर्वेश्वर महादेव विराजेंगे। शिव ओम साईं ट्रस्ट द्वारा बनवाया जा रहा यह मंदिर केवल श्रद्धा का केंद्र नहीं होगा, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक उत्थान का भी आधार बनेगा।

नेपाल से ली प्रेरणा, इंदौर में साकार हो रहा शिवधाम

शिव ओम साईं ट्रस्ट के सदस्यों ने मंदिर निर्माण से पहले खुद नेपाल जाकर पशुपतिनाथ मंदिर का निरीक्षण किया। पत्थर की बारीकी और लकड़ी की नक्काशी को समझा, महसूस किया और वही शिल्प अब इंदौर में जीवित हो रहा है। मुख्य मंदिर पांच हजार वर्गफीट में बन रहा है, जबकि पूरा परिसर 25 हजार वर्गफीट में फैला है। 

लकड़ी की 12 फीट ऊंची मूर्तियां, बंगाल से आए कलाकार

इस मंदिर की विशेषता इसकी मूर्तियां हैं। बंगाल के कुशल शिल्पकारों ने एक ही लकड़ी के तने से 48 विशाल मूर्तियां बनाई हैं, जिनकी ऊंचाई 12 फीट तक है। पहली मंजिल पर शिव, राम, कृष्ण और पांडव परिवार की मूर्तियां होंगी, जबकि दूसरी मंजिल पर शक्तिशाली योगिनियां विराजमान होंगी। केवल मंदिर नहीं, एक सामाजिक परिसर भी होगा

यह शिवधाम केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि जनसेवा का केंद्र भी होगा। परिसर में हेल्थ केयर सेंटर, स्कूल, गौशाला, अन्नक्षेत्र और भजन-आध्यात्मिक केंद्र भी बनेंगे। आठ हजार वर्गफीट में आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए विशेष केंद्र स्थापित किया जाएगा।

11 अन्य मंदिरों का भी हो रहा निर्माण

मुख्य मंदिर के अलावा, परिसर में 11 अन्य मंदिरों का निर्माण भी तेजी से जारी है। इनमें लाल गणेश, उन्मत्त भैरव, अन्नपूर्णा माता, दत्तात्रेय और अन्य देवी-देवताओं के मंदिर शामिल हैं। इन सभी मंदिरों में भी वास्तुशैली का विशेष ध्यान रखा गया है। 

11 रुपये के चंदे से हुई थी शुरुआत, अब बन रहा भव्य तीर्थ 

इस प्रोजेक्ट की शुरुआत बेहद साधारण ढंग से हुई थी, केवल 11 रुपये के चंदे के साथ। ट्रस्ट के प्रमुख मनोज ठक्कर ने अपनी लिखी हुई चार पुस्तकों की आय से इस निर्माण को गति दी। अब यह परियोजना एक बड़े श्रद्धा केंद्र का रूप ले रही है। निर्माण कार्य 60 प्रतिशत पूरा हो चुका है और यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में यह मंदिर इंदौर ही नहीं, मध्यप्रदेश और भारतभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था और दर्शन का नया केंद्र बनेगा।

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