
भोपाल। अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन कर उसका अवलोकन भी किया। कार्यक्रम में वन्यजीव संरक्षण के लिए प्राप्त नए वाहनों का लोकार्पण किया गया। वहीं स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों ने बाघ संरक्षण पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत कर वन्यजीवों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विभाग द्वारा प्रकाशित कई महत्वपूर्ण पुस्तकों और दस्तावेजों का विमोचन किया। इनमें सतपुड़ा की तितलियों पर आधारित "फ्लटरिंग ज्वेल्स ऑफ सतपुड़ा", कान्हा क्षेत्र की घास प्रजातियों पर केंद्रित "पिक्टोरियल हरबेरियम ऑफ कान्हा ग्रासेस", वन्यजीवन रेस्क्यू संकलन, बेस्ट प्रैक्टिसेस ऑफ वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन इन मध्यप्रदेश और बायोडायवर्सिटी ऑफ वाइल्ड मशरूम्स इन पेंच टाइगर रिजर्व जैसी पुस्तकें शामिल रहीं। इसके अलावा रातापानी टाइगर रिजर्व और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के नए लोगो का भी अनावरण किया गया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बारहसिंघा पुनर्वास और कान्हा टाइगर रिजर्व में टाइगर रीवाइल्डिंग पर आधारित वृत्तचित्रों के टीजर भी जारी किए। उन्होंने राज्य वन्य प्राणी बोर्ड के पद्मश्री सम्मानित सदस्यों डॉ. नारायण व्यास और मोहन नागर का सम्मान किया। साथ ही वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली वन सुरक्षा समितियों, ईको विकास समितियों, ग्राम वन समितियों और वनकर्मियों को पुरस्कार प्रदान किए।
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व द्वारा शुरू किए गए जनभागीदारी अभियान "एक जन-एक पत्ती : जनभागीदारी, संरक्षण की शक्ति" में मुख्यमंत्री ने भी भाग लिया। इस दौरान उन्होंने पत्ती के आकार की एक सिरेमिक टाइल पर बाघ का चित्र उकेरा। इन टाइलों को तैयार कर हिनोती पर्यटन द्वार को सजाया जाएगा। यह पहल लोगों को वन और वन्यजीव संरक्षण से जोड़ने का प्रतीकात्मक प्रयास मानी जा रही है। कार्यक्रम में पेंच टाइगर रिजर्व के कलाकारों ने मुख्यमंत्री को पारंपरिक शॉल भेंट कर सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति सम्मान और सह-अस्तित्व की भावना सदियों से मौजूद रही है। हमारे देवी-देवताओं के वाहन भी विभिन्न जीव-जंतुओं से जुड़े हैं। बाघ शक्ति की प्रतीक मां दुर्गा का वाहन माना जाता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में बाघ, चीता, हाथी, घड़ियाल और जंगली भैंसों सहित कई वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में लगातार काम हुआ है। इसी का परिणाम है कि आज प्रदेश देश का टाइगर स्टेट कहलाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 53 वर्ष पहले प्रदेश में बाघों की संख्या दहाई के आंकड़े तक सीमित रह गई थी। वर्ष 2016 में यह संख्या करीब 250 तक पहुंची और वर्ष 2022 की गणना में मध्यप्रदेश में 750 बाघ दर्ज किए गए। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी गणना में प्रदेश में बाघों की संख्या एक हजार का आंकड़ा पार कर सकती है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और वन विभाग के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।
मुख्यमंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस और गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में देशभर में एक अलग पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि चंबल नदी एशिया की सबसे स्वच्छ जल वाली नदियों में गिनी जाती है। घड़ियाल संरक्षण के लिए यहां लगातार प्रयास किए गए हैं। कूनो क्षेत्र की नदियों में भी घड़ियाल छोड़े गए हैं। साथ ही लगभग एक सदी पहले प्रदेश से विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों के पुनर्वास में भी सफलता मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक हाथियों की गतिविधियों को लेकर लगातार चिंता की स्थिति रहती थी, लेकिन वन विभाग ने आधुनिक तकनीक और नवाचारों की मदद से इस चुनौती को काफी हद तक नियंत्रित किया है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में जल्द ही गैंडों को लाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। मध्यप्रदेश को मिली समृद्ध जैव विविधता को सुरक्षित रखने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) शमिता राजौरा ने बताया कि वर्ष 2011 से हर साल 29 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बाघ संरक्षण में मध्यप्रदेश की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में हर वर्ष लगभग 28 लाख पर्यटक वन्यजीव क्षेत्रों का भ्रमण करने आते हैं, जिनमें करीब एक लाख विदेशी पर्यटक शामिल होते हैं। राज्य के सभी नौ टाइगर रिजर्व में संरक्षण से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन गुप्ता ने कहा कि मध्यप्रदेश का वन्यजीव संरक्षण का इतिहास बेहद समृद्ध रहा है। प्रदेश आज टाइगर स्टेट के साथ-साथ चीता स्टेट और लेपर्ड स्टेट के रूप में भी अपनी पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में नए टाइगर रिजर्व स्थापित किए गए हैं और प्रदेश के इकलौते कंजर्वेशन रिजर्व के गठन जैसे कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जिनसे वन्यजीव संरक्षण को नई मजबूती मिली है।
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