
भोपाल। मध्यप्रदेश में ऊर्जा उपकरण विनिर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 15 सितंबर को मंत्रालय में सीमेंस एनर्जी इंडिया लिमिटेड को उज्जैन स्थित विक्रम उद्योगपुरी फेज-2 में 60.49 एकड़ भूमि का आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) सौंपा। कंपनी ने यहां बड़ी क्षमता के पावर ट्रांसफार्मर बनाने वाली इकाई स्थापित करने के लिए करीब 2,053 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है।
प्रस्तावित परियोजना से 1,500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने सीमेंस एनर्जी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी गुइल्हर्मे मेंडोंका, मुख्य वित्तीय अधिकारी हरीश शेखर और हेड-रियल एस्टेट पुनीत बंसल को भूमि का आशय पत्र प्रदान किया। मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध संचालक चंद्रमौली शुक्ला भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियों, बेहतर कनेक्टिविटी, उपलब्ध भूमि बैंक और विश्वस्तरीय औद्योगिक अधोसंरचना के कारण निवेशकों के लिए तेजी से उभरता गंतव्य बन रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार औद्योगिक निवेशों को जल्द धरातल पर उतारने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग दे रही है।
डॉ. यादव के अनुसार, सीमेंस एनर्जी की प्रस्तावित परियोजना मध्यप्रदेश को ऊर्जा उपकरण और विद्युत अवसंरचना विनिर्माण के उभरते केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे राज्य में उन्नत विनिर्माण, औद्योगिक विकास और कुशल रोजगार सृजन को गति मिलने की उम्मीद है।
सीमेंस एनर्जी इंडिया लिमिटेड ऊर्जा उत्पादन, ऊर्जा संचरण, औद्योगिक विद्युतीकरण, ऊर्जा भंडारण और डीकार्बोनाइजेशन समाधानों के क्षेत्र में काम करने वाली प्रमुख कंपनी है। दक्षिण एशिया में कंपनी का व्यापक परिचालन है और यह इंजीनियरिंग तथा अनुसंधान क्षमताओं के लिए जानी जाती है। विक्रम उद्योगपुरी फेज-2 में प्रस्तावित इकाई में बड़ी क्षमता के पावर ट्रांसफार्मरों का निर्माण किया जाएगा। ये ट्रांसफार्मर देश की बढ़ती विद्युत अवसंरचना जरूरतों, ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार और ऊर्जा क्षेत्र के आधुनिकीकरण में उपयोगी होंगे।
परियोजना के आने से उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। इसके साथ सहायक उद्योगों, लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्र में भी नए अवसर बन सकते हैं। इससे क्षेत्रीय औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कंपनी का प्रस्तावित निवेश मध्यप्रदेश में ऊर्जा उपकरण विनिर्माण के विस्तार के साथ-साथ औद्योगिक विकास और विद्युत अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से जुड़े विनिर्माण प्रयासों को भी गति दे सकती है।
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