
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 3 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मध्य प्रदेश की कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मादक पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराध, अवैध हथियार, संगठित अपराध और अंतरराज्यीय अपराध नेटवर्क समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ‘नशामुक्त भारत’ के संकल्प के अनुरूप मध्य प्रदेश में ड्रग्स के खिलाफ निर्णायक अभियान चलाया जा रहा है। सरकार और पुलिस अब सिर्फ छोटे स्तर के अपराधियों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे नेटवर्क और सिंडिकेट को निशाना बनाया जा रहा है।
डॉ. यादव ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आह्वान पर मध्य प्रदेश को वर्ष 2029 तक पूरी तरह नशामुक्त बनाने के लिए हर स्तर पर सघन प्रयास किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस से कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारियों के साथ सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने को भी प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने कहा कि समाज को भी लगातार इसके लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में मध्य प्रदेश अग्रणी भूमिका निभाएगा।
डॉ. यादव ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम के राज्यों में आकर व्यवस्थाओं का बारीकी से अध्ययन करने, मार्गदर्शन देने और भविष्य की चुनौतियों के लिए प्रशासन को तैयार करने की पहल को सकारात्मक बताया। उनके मुताबिक इससे दूरगामी और सही फैसले लेने में मदद मिलती है। साथ ही प्रशासन और पुलिस की तेजी से काम करने की क्षमता भी बढ़ती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में देश का आदर्श राज्य बनने की पूरी क्षमता है। राज्य सरकार केंद्रीय गृह मंत्रालय के लगातार मार्गदर्शन और समन्वय से प्रदेश को हर क्षेत्र में ‘मॉडल राज्य’ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार आधुनिक तकनीक और नए प्रयोगों का परीक्षण कर उन्हें राज्यों में लागू करने का अवसर दे रही है और इसकी लगातार मॉनिटरिंग भी की जा रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिस नक्सल समस्या को कभी खत्म करना लगभग असंभव माना जाता था, उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से तय समय-सीमा में खत्म करने में मदद मिली है। मध्य प्रदेश में नक्सलवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है। अब सरकार नक्सल मुक्त हुए क्षेत्रों के विकास पर फोकस कर रही है। इसके लिए 400 करोड़ रुपये की विकास योजना तैयार की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं में विश्वास और नई ऊर्जा पैदा करने के लिए वर्ष 2027 को ‘युवा वर्ष’ के तौर पर मनाया जाएगा। सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से बेहतर शिक्षा देने का काम किया जा रहा है। भवन विहीन स्कूलों के लिए भवन स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा। जनजातीय समुदाय में भरोसा मजबूत करने के लिए ‘धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान’ चलाया जा रहा है। वनाधिकार पत्र जारी करने में मध्य प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है।
इसके अलावा नागरिकों को बेहतर और आसान आवागमन उपलब्ध कराने के लिए ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ शुरू की गई है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियां भी व्यापक स्तर पर की जा रही हैं। कर्मचारियों में भरोसा बढ़ाने के लिए 68 हजार कर्मियों को पदोन्नति दी गई है। वहीं अग्निवीरों के लिए यूनिफॉर्म सर्विसेज में आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य में सरकारी भर्तियों को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में 16,895 पदों पर भर्ती की गई है। अब किसी पद के रिक्त होने पर तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की व्यवस्था की जा रही है। वर्ष 2026 में 9,662 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है।
पुलिस बैंड में कई वर्षों से लंबित भर्ती प्रक्रिया को भी दोबारा शुरू किया गया है। इसके तहत 648 कर्मियों की भर्ती हुई है। अब प्रदेश के प्रत्येक जिले में राष्ट्रीय पर्वों के दौरान पुलिस बैंड की प्रस्तुतियां देखने को मिल रही हैं। सरकार ने करीब 10 वर्षों से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाया है। विभिन्न संवर्गों में 27 हजार से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई है। वहीं ई-एचआरएमएस में एक लाख से अधिक पुलिसकर्मियों को जोड़ा गया है।
केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने बैठक में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के विजन से अधिकारियों को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की सीमाएं उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ से लगती हैं। ऐसे में अपराधियों की अंतरराज्यीय आवाजाही, हथियारों की तस्करी और ड्रग्स कॉरिडोर से निपटने के लिए पड़ोसी राज्यों के साथ संयुक्त खुफिया कार्रवाई और बेहतर समन्वय जरूरी है।
उन्होंने नेटग्रिड के अधिक प्रभावी इस्तेमाल पर जोर दिया। साथ ही सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘ड्रग-मुक्त कैंपस’ फ्रेमवर्क लागू करने की बात कही। केंद्रीय गृह सचिव ने एनडीपीएस मामलों के लिए विशेष न्यायालयों की जल्द स्थापना और राज्य में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स गठित करने पर भी जोर दिया।
मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने केंद्रीय टीम को राज्य में कानून-व्यवस्था सुधारने और सभी वर्गों में सरकार के प्रति विश्वास बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए हर स्तर पर लगातार काम किया जा रहा है। सरकार ‘जन विश्वास अभियान’ भी चला रही है।
पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस विभाग लगातार नए प्रयोग कर रहा है। पुलिसकर्मियों के हित में भी कई फैसले लिए गए हैं। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है। किसानों को एक लाख करोड़ रुपये की योजनाओं का सीधा लाभ दिया गया है।
महिलाओं के लिए भी कई योजनाओं का जिक्र बैठक में हुआ। लाडली बहना योजना के तहत 1 करोड़ 25 लाख महिलाओं को राशि ट्रांसफर की गई है। वहीं 18 लाख से ज्यादा बहनों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ देकर ‘लखपति दीदी’ बनाया जा चुका है। वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से एक लाख महिलाओं से संपर्क किया गया है।
कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर पुलिस ने ड्रग्स बनाने वाली 17 गुप्त प्रयोगशालाओं का पता लगाकर उनका भंडाफोड़ किया है। आदतन ड्रग अपराधियों के खिलाफ पीआईटीएनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई भी तेज की गई है। राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र यानी एस4सी को अधिसूचित किया गया है। ई-साक्ष्य का कवरेज पिछले साल के 17 प्रतिशत से बढ़कर 33 प्रतिशत हो गया है। सभी जिलों में 57 मोबाइल फॉरेंसिक वैन भी उपलब्ध कराई गई हैं।
बैठक में ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान की प्रगति भी बताई गई। इस साल इस अभियान को सोशल मीडिया पर 58 करोड़ व्यूज मिले, जबकि 2 करोड़ 47 लाख नागरिकों ने प्रत्यक्ष रूप से इसमें भागीदारी की। ‘सेफ क्लिक 2’ अभियान के जरिए डिजिटल अरेस्ट के मामलों को रोकने में सफलता मिलने की जानकारी भी बैठक में दी गई। पुलिसकर्मियों के तनाव को कम करने के लिए हार्टफुलनेस के साथ एमओयू किया गया है। इसके तहत एक हजार से ज्यादा प्रशिक्षक तैयार किए गए हैं और 50 हजार पुलिसकर्मी हार्टफुलनेस कार्यक्रम में हिस्सा ले चुके हैं।
बैठक में तीन नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश की प्रगति को भी रेखांकित किया गया। बताया गया कि प्रदेश में 90 दिनों के भीतर आरोप-पत्र दाखिल करने की दर 69 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय औसत 59 प्रतिशत है। वहीं ई-समन की सीधी डिलीवरी के मामले में मध्य प्रदेश देश में सबसे आगे बताया गया।
समीक्षा बैठक में कानून-व्यवस्था के अलावा तीन नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन, मादक पदार्थ नियंत्रण, साइबर अपराध, आतंकवाद से मुकाबला, विदेशियों से जुड़े मामले, भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई, पुलिस आधुनिकीकरण, पड़ोसी राज्यों के साथ सुरक्षा समन्वय, आपदा प्रबंधन और शत्रु संपत्ति के प्रबंधन जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
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