कैदियों के हाथों चलेगा पेट्रोल पंप, जानें क्या है सरकार की अनोखी पहल?

Published : Aug 27, 2024, 02:31 PM ISTUpdated : Aug 27, 2024, 05:15 PM IST
petrol diesel

सार

मध्यप्रदेश सरकार ने कैदियों के जीवन में बदलाव लाने के लिए अनोखी पहल की है। इसके तहत भोपाल सेंट्रल जेल के बाहर एक पेट्रोल पंप खोला गया है, जिसे कैदी ही चलाएंगे। इस पहल का उद्देश्य कैदियों को आत्मनिर्भर बनाना है।

भोपाल. मध्यप्रदेश के कैदियों का भविष्य संवारने के लिए सरकार द्वारा अनूठा प्लान बनाया है। जिसके तहत भोपाल में सेंट्रल जेल के बाहर सीएम मोहन यादव ने एक पेट्रोल पंप की शुरुआत की है। यहां पेट्रोल भरने से लेकर अन्य सभी काम कैदी ही करेंगे। ये प्लान सक्सेस होने के बाद पूरे प्रदेश में इसी प्रकार से पेट्रोल पंप डाले जाएंगे। ताकि कैदियों के जीवन को संवारा जा सके।

सेंट्रल जेल के बाहर खुला पेट्रोल पंप

भोपाल में सेंट्रल जेल के बाहर पेट्रोल पंप की शुरुआत की है। इस पेट्रोल पंप पर ओपन जेल के 9 कैदी पेट्रोल भरने से लेकर वहां के अन्य काम देखेंगे। इसी के साथ मैनेजमेंट का काम दो प्रहरियों द्वारा किया जाएगा। आपको बता दें कि सेंट्रल जेल के बाहर खुला ये प्रदेश का तीसरा पेट्रोल पंप है।

लोन पर मिलेगा पेट्रोल और डीजल

सरकार ने कैदियों के लिए पेट्रोल और डीजल पंप डालने की शुरुआत इसलिए की है, क्योंकि ये पूरी तरह कैश का धंधा है। ये काम 24 घंटे चलने वाला है। इसमें तीन शिफ्ट में कैदियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। अच्छी बात यह है कि इसके लिए पैसा भी एडवांस नहीं लगेगा। क्योंकि इन पंपों के लिए पेट्रोल और डीजल एचपी कंपनी से लोन पर लिया जाएगा। पेट्रोल डीजल बिकने के बाद कंपनी को पैसा दिया जाएगा।

इलाज और पढ़ाई में खर्च होगी राशि

इस पेट्रोल पंप को जेल कल्याण समिति चलाएगी। जहां प्रत्येक कैदी को सैलरी के रूप में प्रतिदिन 500 रुपए सैलरी दी जाएगी। पेट्रोल पंप से होने वाले मुनाफे की राशि को वेलफेयर में खर्च किया जाएगा। यानी कोई कर्मचारी गंभीर रूप से बीमार होता है, तो उसके इलाज, उसके बच्चे की पढ़ाई आदि में ये राशि खर्च की जाएगी।

इन कैदियों को मिलेगी नौकरी

पेट्रोल पंप के संचालन के लिए जेल कल्याण समिति उन कैदियों को नौकरी पर रखेगी, जिनका आचरण अच्छा है। ​जिनसे गलती से जुर्म हो गया है। वे अपने जीवन को सुधारना चाहते हैं। इसमें उन कैदियों को भी काम मिलेगा जो सजा काटने के बाद अपना जीवन ईमानदारी से जी रहे हैं।

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