दो बच्चों के बाद पति पर पॉक्सो एक्ट में केस, दूसरी डिलेवरी के समय खुला राज

Published : Feb 11, 2025, 05:42 PM ISTUpdated : Feb 11, 2025, 05:46 PM IST
women crime

सार

मध्यप्रदेश के खंडवा में बाल विवाह का मामला उजागर हुआ। दूसरी संतान जन्म के दौरान 16 वर्षीय पीड़िता की नाबालिग होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद पति पर दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया।

Khandwa Crime News: मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक 16 वर्षीय लड़की के दूसरी बार मां बनने के बाद उसका बाल विवाह उजागर हुआ। महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित अस्पताल में जन्म प्रमाण पत्र से उम्र का खुलासा होने पर पति के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

बुलढाणा जिला अस्पताल में हुआ खुलासा

जानकारी के मुताबिक, पीड़िता ने 21 जनवरी को महाराष्ट्र के बुलढाणा जिला अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया था। अस्पताल की कागजी प्रक्रिया के दौरान आधार कार्ड में उसकी उम्र केवल 16 वर्ष दर्ज पाई गई। इसकी सूचना अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को दी, जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई।

खंडवा पुलिस जांच में बाल विवाह की पुष्टि

हरसूद थाना प्रभारी राजकुमार राठौर ने बताया कि महाराष्ट्र के नांदुरा पुलिस ने मामले की जांच के बाद केस डायरी खंडवा पुलिस को भेजी है। पीड़िता मूल रूप से मध्यप्रदेश के ग्राम डोटखेड़ा, हरसूद की रहने वाली है। उसकी शादी बुलढाणा के ग्राम कोकलवाड़ी में हुई थी। जांच में यह भी सामने आया कि पीड़िता की पहली डिलीवरी वर्ष 2022 में मध्यप्रदेश के राजपुर में हुई थी। उस समय उसने अपनी उम्र 20 वर्ष बताई थी, लेकिन आधार कार्ड के अनुसार उसकी जन्मतिथि 2008 की निकली, जिससे उसकी उम्र महज 16 साल साबित हुई।

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बोन ऑसिफिकेशन टेस्ट में उम्र निकली ज्यादा(Bone Ossification Test)

नाबालिग होने की पुष्टि के लिए पुलिस ने पीड़िता का बोन ऑसिफिकेशन टेस्ट कराया गया, जिसमें डॉक्टरों ने उसकी अनुमानित उम्र 20 से 21 साल बताई। हालांकि, दस्तावेजों के आधार पर पुलिस ने इसे बाल विवाह का मामला मानते हुए पति पर दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

महिला की पहली और दूसरी डिलीवरी के डाक्यूमेंटों में उम्र का अंतर

जांच में यह भी सामने आया कि पीड़िता कभी स्कूल नहीं गई और उसके पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं है। उम्र का एकमात्र प्रमाण आधार कार्ड था, जिसके आधार पर उसकी उम्र 16 वर्ष पाई गई। संदेह जताया जा रहा है कि पहली डिलीवरी के दौरान परिजनों ने जानबूझकर उसकी उम्र अधिक बताई थी, ताकि मामला सामने न आए।

बाल विवाह का मामला और समाज पर असर

मामले की जांच कर रहे नांदुरा थाना प्रभारी जगदीश बंगार ने कहा कि पीड़िता का विवाह आदिवासी कोरकू समाज में हुआ है, जहां अब भी बाल विवाह जैसी कुप्रथाएं मौजूद हैं। महाराष्ट्र पुलिस ने कहा कि इस समुदाय में बाल विवाह के मामलों की संख्या अधिक है और इसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाने की जरूरत है।

क्या है बोन ऑसिफिकेशन टेस्ट? (Bone Ossification Test)

बोन ऑसिफिकेशन एक मेडिकल प्रक्रिया है, जिसमें हड्डियों के विकास के आधार पर व्यक्ति की उम्र का आकलन किया जाता है। इसमें कंधों, पसलियों और एब्डॉमिन की हड्डियों का एक्स-रे किया जाता है, जिससे हड्डियों की वृद्धि और उम्र की सही जानकारी मिलती है। खंडवा पुलिस अब पीड़िता के बयान दर्ज कर आगे की कार्रवाई करेगी। यदि पीड़िता की उम्र बालिग साबित होती है, तो मामला कमजोर पड़ सकता है, लेकिन यदि आधार कार्ड के अनुसार उसकी उम्र 16 वर्ष ही साबित होती है, तो आरोपी पति पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।

 

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