मध्यप्रदेश बनेगा फिश एक्सपोर्ट हब, CM मोहन यादव की मौजूदगी में कुवैत की कंपनी का बड़ा निवेश

Published : Jul 07, 2026, 09:24 AM IST
mp fisheries investment

सार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में मध्यप्रदेश में 7,430 करोड़ रुपये के मत्स्य निवेश समझौते पर हस्ताक्षर हुए। इससे 35 हजार रोजगार, 4 लाख टन अतिरिक्त मछली उत्पादन और 6 हजार करोड़ के निर्यात का लक्ष्य तय किया गया है।

भोपाल। मध्यप्रदेश में मत्स्य पालन और उससे जुड़े उद्योगों को नई दिशा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में 6 जुलाई को कुवैत की प्रमुख मत्स्य कंपनी ज़बेदी अल कुवैत फिशरीज कंपनी और इंदौर की कामदार्स केयर के बीच 7,430 करोड़ रुपये के निवेश और बाय-बैक एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 के तहत किया गया है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों और मछुआरों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। किसान कल्याण वर्ष के तहत खेती के साथ पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी आय बढ़ाने वाली गतिविधियों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के तालाबों और जलाशयों के बेहतर उपयोग और प्रबंधन पर सरकार का विशेष ध्यान है।

मत्स्य पालन में मध्यप्रदेश को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन भी किसानों और मछुआरा समुदाय की आय बढ़ाने का मजबूत माध्यम बन सकता है। प्रदेश के हजारों परिवार मत्स्य पालन पर निर्भर हैं और उनके हितों को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 के जरिए इस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की रणनीति बनाई गई है। उन्होंने कहा कि कुवैत की अग्रणी कंपनी और कामदार्स केयर के बीच हुआ यह निवेश समझौता प्रदेश में मत्स्य पालन, निर्यात और मछुआरों के कल्याण के क्षेत्र में नए अवसर तैयार करेगा।

MP के जलाशय बनेंगे मत्स्य उत्पादन का बड़ा केंद्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में मत्स्य पालन के लिए पर्याप्त जल संसाधन उपलब्ध हैं। राज्य के तालाब और बड़े जलाशय मत्स्य उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे न केवल देश की खाद्य जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि मछली निर्यात को भी नई गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि कुवैत भारत का मित्र देश है और विदेशी निवेश को धरातल पर उतारने के लिए मध्यप्रदेश सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। इसी वजह से अब निवेश के सकारात्मक परिणाम भी दिखाई देने लगे हैं। आने वाले समय में मध्यप्रदेश मत्स्य उद्योग के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।

केज कल्चर से 4 लाख टन अतिरिक्त मछली उत्पादन का लक्ष्य

समझौते के दौरान जानकारी दी गई कि मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति-2026 के तहत आधुनिक, निर्यातोन्मुखी और मूल्य संवर्धित मत्स्य उद्योग विकसित करने के लिए निजी और विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस निवेश के तहत इंदिरा सागर, बरगी, बाणसागर और बारना जलाशयों में केज कल्चर के साथ बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज आधारित आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। इससे प्रदेश में करीब 4 लाख टन अतिरिक्त मत्स्य उत्पादन होने की संभावना है।

एक्वापोनिक्स और हाइड्रोपोनिक्स से होगा 1.23 लाख टन सब्जियों का उत्पादन

इस परियोजना के तहत मत्स्य पालन के साथ एक्वापोनिक्स, हाइड्रोपोनिक्स और ग्रीन हाउस तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। इन आधुनिक तकनीकों की मदद से प्रदेश में लगभग 1 लाख 23 हजार टन सब्जियों का उत्पादन होने का अनुमान है। यह परियोजना कृषि और मत्स्य पालन को एकीकृत कर किसानों और उद्यमियों के लिए आय के नए अवसर तैयार करेगी।

35 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार, 6 हजार करोड़ के निर्यात का लक्ष्य

सरकार के अनुसार इस महत्वाकांक्षी परियोजना से प्रदेश में 15 हजार प्रत्यक्ष और 20 हजार अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा मध्यप्रदेश से लगभग 6 हजार करोड़ रुपये के मत्स्य निर्यात का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरकार का मानना है कि इस निवेश से प्रदेश के मछुआरा समुदाय को सीधा लाभ मिलेगा और मत्स्य उद्योग में बड़े स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।

मध्यप्रदेश को मत्स्य निवेश और निर्यात का राष्ट्रीय हब बनाने की पहल

यह समझौता मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी मत्स्य निवेश और निर्यात केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ज़बेदी अल-कुवैत फिशरीज कंपनी का 10 से अधिक देशों में प्रीमियम क्वालिटी फूड, डिब्बाबंद खाद्य उत्पाद और मसालों का मजबूत व्यापारिक नेटवर्क है। वहीं, कामदार्स केयर एक क्लस्टर आधारित व्यावसायिक संगठन है, जो किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के गठन और उनके व्यवसाय को बढ़ाने का कार्य करता है। इस संस्था को स्टार्टअप इंडिया के तहत भी मान्यता प्राप्त है।

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