
भोपाल। मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि करीब 600 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर प्रदेश के पूर्वी, मध्य और पश्चिमी हिस्सों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। सरकार ने मार्च 2028 के अंत तक 10 हजार एकड़ औद्योगिक भूमि विकसित करने, 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश जुटाने और 3 लाख से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करने का रोडमैप तैयार किया है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित संवाद भवन में आयोजित कार्यक्रम में कॉरिडोर की योजना और संभावित लाभों की जानकारी दी। इस अवसर पर जबलपुर के उद्योगपतियों और विभिन्न व्यावसायिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने परियोजना को कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर उनका अभिनंदन किया और आभार जताया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश और मध्य प्रदेश विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं। इसी कड़ी में जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल कॉरिडोर प्रदेश के औद्योगिक इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा। करीब 600 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर प्रदेश के तीन प्रमुख महानगरीय क्षेत्रों को सीधे जोड़ने की योजना का हिस्सा है। जबलपुर को संस्कारधानी, भोपाल को प्रशासनिक राजधानी और इंदौर को औद्योगिक राजधानी के रूप में पहचान मिली है। इस परियोजना के माध्यम से तीनों क्षेत्रों के बीच औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों का नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, कॉरिडोर का लाभ इसके दायरे में आने वाले सात जिलों और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों को भी मिलेगा। उद्योग, कृषि, लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी और सेवा क्षेत्र को एकीकृत करने से आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं बढ़ेंगी।
सरकार का लक्ष्य मध्य प्रदेश में देश के सबसे बड़े एकीकृत औद्योगिक क्षेत्रों में से एक का विकास करना है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों की औद्योगिक क्षमताओं को जोड़कर निवेश और रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि राज्य सरकार ने मार्च 2028 के अंत तक औद्योगिक विकास के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत 10 हजार एकड़ औद्योगिक भूमि विकसित करने और करीब 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना का एक बड़ा उद्देश्य प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 3 लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर तैयार करना है। सरकार औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए जमीन और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान देगी, ताकि निवेशकों को परियोजनाएं शुरू करने में आसानी हो।
कॉरिडोर के विकास के लिए राज्य सरकार अपने पूर्ण स्वामित्व वाली विशेष प्रयोजन साधन यानी एसपीवी कंपनी स्थापित करने जा रही है। इसके लिए शुरुआती तौर पर 100 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। सरकार का मानना है कि औद्योगिक भूमि, बेहतर कनेक्टिविटी और जरूरी बुनियादी सुविधाओं का विकास होने से प्रदेश में निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार होगा।
मुख्यमंत्री ने परियोजना की समयसीमा की जानकारी देते हुए बताया कि अगले 3 से 6 महीने में भूमि चिन्हांकन और मास्टर प्लान तैयार करने का काम पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद 6 से 12 महीने के भीतर औद्योगिक क्षेत्रों और आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास का काम शुरू किया जाएगा। कॉरिडोर के विकास में औद्योगिक भूमि की उपलब्धता, सड़क संपर्क और अन्य जरूरी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार की योजना है कि निवेशकों को बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं पहले से उपलब्ध कराई जाएं, जिससे उद्योगों को स्थापित करने और संचालन शुरू करने में सहूलियत हो। इस परियोजना से औद्योगिक गतिविधियों को गति देने के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में सहायक कारोबार, परिवहन, भंडारण और सेवा क्षेत्र के विकास की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से महाकौशल क्षेत्र, खासकर जबलपुर को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। जबलपुर को भविष्य में इंडस्ट्रियल हब के साथ इंजीनियरिंग, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, एयरोस्पेस से जुड़े सहायक उद्योगों, फूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। जबलपुर में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार होने से स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही, बड़े उद्योगों के साथ उनसे जुड़े छोटे और मध्यम कारोबार के लिए भी अवसर तैयार होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से पूरे महाकौशल क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी। उद्योगों की स्थापना के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।
इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में भोपाल क्षेत्र को टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, नॉलेज सर्विसेज और साझा व्यावसायिक अवसंरचना के केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। भोपाल में इन क्षेत्रों को बढ़ावा देने से तकनीकी सेवाओं और आधुनिक उद्योगों के विस्तार की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं। इसके साथ ही, अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के साथ बेहतर संपर्क से कारोबार और निवेश के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। सरकार का उद्देश्य केवल बड़े उद्योग स्थापित करना नहीं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार औद्योगिक गतिविधियों को विकसित करना है। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को अधिक व्यापक आधार देने में मदद मिल सकती है।
कॉरिडोर के तहत कृषि और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उद्योगों को भी बढ़ावा देने की योजना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नरसिंहपुर और रायसेन जिले को कृषि प्रसंस्करण और फूड पार्क क्षेत्र में विकास का लाभ मिल सकता है। वहीं, सीहोर और देवास क्षेत्र में फूड प्रोसेसिंग तथा वेयरहाउसिंग को प्रोत्साहित करने पर ध्यान दिया जाएगा। इससे कृषि उत्पादों के भंडारण, प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंच की व्यवस्थाओं को मजबूत करने की संभावनाएं हैं। कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार से किसानों के उत्पादों का मूल्य संवर्धन हो सकता है। साथ ही, भंडारण, परिवहन, पैकेजिंग और प्रसंस्करण से जुड़ी गतिविधियों में भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर क्षेत्र में आईटी, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स सहित विभिन्न निवेश क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जाएगा। इंदौर पहले से ही प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्र है। प्रस्तावित कॉरिडोर के माध्यम से इसे भोपाल और जबलपुर से जोड़ने पर अलग-अलग क्षेत्रों के बीच औद्योगिक सहयोग और कारोबार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। कॉरिडोर की योजना में उद्योगों के लिए जरूरी सुविधाओं को पहले से विकसित करने पर जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, बिजली, पानी, सड़क और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होने से निवेशकों को परियोजनाएं शुरू करने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार सभी क्षेत्रों में छोटे और बड़े कारोबारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए सुविधाएं विकसित कर रही है। औद्योगिक कॉरिडोर से उद्योगों के लिए अवसरों तक पहुंच आसान बनाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उद्योगपति अपनी क्षमता और योग्यता का उपयोग करके युवाओं को रोजगार से जोड़ सकते हैं। इससे परिवारों की आजीविका मजबूत होगी और आर्थिक गतिविधियों का लाभ समाज के अधिक लोगों तक पहुंचेगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कॉरिडोर केवल औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास से जुड़ी योजना है। इसके लिए सरकार जल्द से जल्द जरूरी व्यवस्थाएं विकसित करने की दिशा में काम करेगी।
जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर महाकौशल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज सहित जबलपुर के उद्योगपतियों और विभिन्न व्यावसायिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का अभिनंदन किया।
इस अवसर पर लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह और महाकौशल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष रवि गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में महाकौशल क्षेत्र के 11 जिलों से आए उद्योगपतियों, व्यवसायियों और व्यापारियों ने परियोजना के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने मुख्यमंत्री को जबलपुर आने का आमंत्रण भी दिया। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि राज्य सरकार महाकौशल और जबलपुर क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में लोक निर्माण से जुड़े विकास कार्यों को तेजी से पूरा किए जाने की बात कही। राकेश सिंह ने जबलपुर को तकनीकी विश्वविद्यालय की सौगात दिए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के पास प्रदेश के विकास को लेकर स्पष्ट दृष्टिकोण है।
जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को लेकर राज्य सरकार की योजना निवेश, रोजगार और औद्योगिक अधोसंरचना को एक साथ आगे बढ़ाने की है। सात जिलों और आसपास के क्षेत्रों में उद्योगों, कृषि प्रसंस्करण, टेक्नोलॉजी तथा लॉजिस्टिक्स से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावनाएं हैं। सरकार ने मार्च 2028 तक 10 हजार एकड़ औद्योगिक भूमि विकसित करने, 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश जुटाने और 3 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, इन लक्ष्यों की वास्तविक उपलब्धि भूमि चिन्हांकन, मास्टर प्लान, बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश परियोजनाओं के समय पर क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। फिलहाल, प्रस्तावित कॉरिडोर मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास की एक बड़ी योजना के रूप में सामने आया है। आने वाले महीनों में भूमि चिन्हांकन और मास्टर प्लान तैयार होने के बाद इसकी प्रगति की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
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