
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 20 जुलाई को आगामी गुरु पूर्णिमा महोत्सव की तैयारियों को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। गुरु ही मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान और विज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान, सेवा और आशीर्वाद प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप प्रदेशभर में भारतीय ज्ञान परंपरा और गुरु-शिष्य परंपरा का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। इसी उद्देश्य से इस वर्ष गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पूरे प्रदेश में 'महर्षि सांदीपनि श्रद्धा पर्व' आयोजित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस आयोजन में स्कूल शिक्षा, जनजातीय कार्य, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और चिकित्सा शिक्षा विभाग के साथ-साथ निजी शिक्षण संस्थानों की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा खेल, संगीत, नाटक, चित्रकला तथा अन्य कला संस्थानों को भी इस अभियान से जोड़ा जाए, ताकि समाज के अधिक से अधिक लोग इसमें शामिल हो सकें।
बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा मनाया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण अभी शेष है, उन्हें गुरु पूर्णिमा से पहले पूरा कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि महर्षि सांदीपनि भगवान श्रीकृष्ण के गुरु थे। उन्होंने अमीर और गरीब सभी विद्यार्थियों को समान रूप से शिक्षा देकर राष्ट्र निर्माण और समरसता का संदेश दिया। साथ ही गुरुकुल शिक्षा पद्धति को व्यवस्थित स्वरूप देने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि महर्षि सांदीपनि के जीवन, उनके विचारों और गुरुकुल शिक्षा प्रणाली में उनके योगदान पर आधारित 10 से 20 पृष्ठों की एक लघु पुस्तिका तैयार कर प्रकाशित की जाए। यह पुस्तिका प्रदेश के सभी विद्यालयों में वितरित की जाएगी, ताकि विद्यार्थी भारतीय शिक्षा परंपरा और उसके मूल्यों से परिचित हो सकें।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी शासकीय और अशासकीय विद्यालयों के साथ-साथ औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में गुरु पूजन कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इन आयोजनों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि विद्यालयों में प्रतिवर्ष मनाए जाने वाले मित्रता दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों को भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की प्रेरणादायक कहानी से भी परिचित कराया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु पूर्णिमा को 'महर्षि सांदीपनि श्रद्धा पर्व' के रूप में व्यापक स्तर पर मनाया जाए, ताकि नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और गुरु-शिष्य संबंधों के महत्व को समझ सके।
उन्होंने कहा कि इस आयोजन को जनभागीदारी का उत्सव बनाया जाए, जिससे विद्यार्थियों और युवाओं में अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति आस्था और मजबूत हो। साथ ही सरकारी और निजी विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों को भी इस अभियान का हिस्सा बनाया जाए। बैठक में आयोजन की रूपरेखा, विभिन्न कार्यक्रमों और संबंधित विभागों की जिम्मेदारियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन, संस्कृति एवं पर्यटन विभाग शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रदेशभर के विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र पर माल्यार्पण और सरस्वती वंदना से होगी। इसके बाद गुरुजनों का सम्मान, व्याख्यान, छात्र-शिक्षक संवाद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां तथा विभिन्न साहित्यिक और अन्य प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि सभी शासकीय एवं अशासकीय शिक्षण संस्थानों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। विशेष रूप से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संचालन विद्यार्थियों द्वारा ही किया जाए। साथ ही समाज की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि गुरु पूर्णिमा और महर्षि सांदीपनि श्रद्धा पर्व एक व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक अभियान का स्वरूप ले सके।
मध्य प्रदेश में सरकारी नीतियों, योजनाओं, शिक्षा-रोजगार, मौसम और क्षेत्रीय घटनाओं की अपडेट्स जानें। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर सहित पूरे राज्य की रिपोर्टिंग के लिए MP News in Hindi सेक्शन पढ़ें — सबसे भरोसेमंद राज्य समाचार सिर्फ Asianet News Hindi पर।