PM Modi in Varanasi: पीएम मोदी ने काशी विश्वनाथ में समझी वैदिक घड़ी की अनोखी प्रणाली, जानिए इसकी खासियत

Published : Apr 29, 2026, 01:38 PM ISTUpdated : Apr 29, 2026, 01:41 PM IST
PM Modi in Varanasi kashi vishwanath mandir Vikramaditya Vedic Clock

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का अवलोकन किया। उज्जैन की वैदिक कालगणना पर आधारित यह घड़ी समय के साथ पंचांग, मुहूर्त और ग्रहों की जानकारी भी देती है।

भोपाल/काशी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट बन चुकी विक्रमादित्य वैदिक घड़ी अब पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर आम लोगों तक, हर कोई इस अनोखी वैदिक घड़ी को लेकर उत्सुक नजर आ रहा है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल को अपने उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का अवलोकन किया।

उज्जैन की पवित्र धरती से शुरू हुआ इस वैदिक घड़ी का सफर अब देश के दूसरे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच रहा है। यह घड़ी केवल समय बताने तक सीमित नहीं है, बल्कि सूर्योदय, शुभ मुहूर्त, ग्रहों की स्थिति और पंचांग जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां भी उपलब्ध कराती है।

PM Narendra Modi ने काशी विश्वनाथ मंदिर में देखी वैदिक घड़ी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित इस वैदिक घड़ी को काफी करीब से देखा और इसकी पूरी कार्यप्रणाली को समझा। उन्होंने घड़ी की विशेषताओं और इसके पीछे की वैदिक गणना प्रणाली की जानकारी भी ली। यह वैदिक घड़ी कुछ महीने पहले ही काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित की गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसी महीने 3 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को यह घड़ी भेंट की थी। इसके अगले ही दिन इसे मंदिर परिसर में स्थापित कर दिया गया।

 

 

Vikramaditya Vedic Clock की खासियत, सूर्योदय आधारित समय गणना

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की सबसे बड़ी विशेषता इसकी समय गणना प्रणाली है। यह सामान्य घड़ियों की तरह घंटे और मिनट के आधार पर काम नहीं करती। इसकी गणना सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के समय चक्र पर आधारित होती है। यह घड़ी समय बताने के साथ-साथ पंचांग, ग्रहों की स्थिति, शुभ मुहूर्त और वैदिक कालगणना से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्रदर्शित करती है। इसी कारण यह लोगों के आकर्षण का केंद्र बन चुकी है।

उज्जैन के विद्वानों ने तैयार की वैदिक कालगणना आधारित घड़ी

भारत की प्राचीन वैदिक कालगणना प्रणाली को आधार बनाकर इस घड़ी को तैयार किया गया है। उज्जैन स्थित महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के विद्वानों ने इसका निर्माण किया है। इससे पहले यह वैदिक घड़ी उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भी स्थापित की जा चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2024 में उज्जैन में इसका लोकार्पण किया था।

CM Mohan Yadav का फोकस, उज्जैन को बनाना चाहते हैं Prime Meridian

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार उज्जैन को दुनिया के प्राइम मेरिडियन के रूप में स्थापित करने पर जोर दे रहे हैं। उनका मानना है कि वर्तमान में इस्तेमाल होने वाला ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) पश्चिमी संस्कृति की देन है, जिसमें दिन की शुरुआत आधी रात से मानी जाती है। सीएम डॉ. यादव के अनुसार भारतीय परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टि से सूर्योदय आधारित गणना अधिक सटीक मानी जाती है। उज्जैन कर्क रेखा पर स्थित है, इसलिए इसे खगोलीय और वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

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