वाराणसी में ‘सम्राट विक्रमादित्य’ महानाट्य ने रचा रिकॉर्ड, भव्य सेट और शानदार अभिनय ने जीता दिल

Published : Apr 06, 2026, 04:06 PM IST
Samrat Vikramaditya Mahanatya varanasi show

सार

उज्जैन में आयोजित ‘सम्राट विक्रमादित्य’ महानाट्य को 60 हजार से ज्यादा लोगों ने देखा। भव्य सेट, शानदार अभिनय और ऐतिहासिक दृश्यों ने दर्शकों को भावुक और रोमांचित कर दिया।

भोपाल/वाराणसी। देश की धर्म नगरी उज्जैन 3 से 5 अप्रैल तक सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन, वीरता और साहस की गवाह बनी। मध्यप्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ऐतिहासिक महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का मंचन किया गया, जिसे 60 हजार से अधिक दर्शकों ने देखा। यह अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड साबित हुआ।

दर्शकों को रोमांचित कर गया भव्य मंचन

इस महानाट्य की प्रस्तुति देखकर दर्शक भावुक और रोमांचित हो गए। मंच पर कलाकारों ने भारत के गौरवशाली इतिहास को जीवंत कर दिया। यह वही इतिहास है, जिसने सदियों तक मानव समाज को स्वतंत्रता और सुशासन के लिए प्रेरित किया है। इस आयोजन का शुभारंभ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताई ऐतिहासिक महत्व

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह आयोजन लोगों को सम्राट विक्रमादित्य के जीवन और उनके आदर्शों से परिचित कराने का एक विशेष अवसर है। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य सुशासन की उत्कृष्ट परंपरा के प्रतीक हैं और उनका जीवन आज भी प्रेरणादायक है।

भव्य सेट, लाइट और म्यूजिक ने बढ़ाया आकर्षण

महानाट्य के लिए विशाल और आकर्षक सेट तैयार किया गया था। मंच पर ऊंचे-ऊंचे किले और दुर्ग बनाए गए, जिन्हें देखकर दर्शक राजसी वैभव का अनुभव कर रहे थे। लाइटिंग और म्यूजिक इफेक्ट ने हर दृश्य को और अधिक जीवंत बना दिया। दर्शक सम्राट विक्रमादित्य की न्यायप्रियता और उनके शासन की महानता को महसूस कर गौरव से भर उठे।

हाथी-घोड़े और युद्ध दृश्य बने आकर्षण का केंद्र

इस नाटक में हाथियों, घोड़ों और ऊंटों के काफिलों ने दर्शकों को बेहद रोमांचित किया। हाथियों की गर्जना और घोड़ों की टापों ने मंच पर युद्ध का वास्तविक माहौल तैयार कर दिया। ऐसा लगा मानो दर्शक किसी ऐतिहासिक रणभूमि के साक्षी बन गए हों।

200 से ज्यादा कलाकारों का शानदार अभिनय

महानाट्य में 200 से अधिक कलाकारों ने भाग लिया। सभी कलाकारों ने अपने अभिनय से सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने यह भी दिखाया कि कैसे एक साधारण राजा अपने गुणों, न्याय और साहस के दम पर ‘चक्रवर्ती सम्राट’ बनता है।

भावुक कर देने वाले दृश्य, दर्शकों की आंखों में आंसू

नाटक के कई दृश्य इतने भावुक थे कि दर्शकों की आंखों में आंसू आ गए। खासतौर पर वह दृश्य, जिसमें सम्राट विक्रमादित्य भेष बदलकर रात में अपनी प्रजा का हाल जानने निकलते हैं, लोगों के दिल को छू गया। नाटक के अंत में पूरा माहौल “सम्राट विक्रमादित्य की जय” के नारों से गूंज उठा।

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