Project Cheetah के चार साल पूरे होने पर चीता 'मुखी' की विशाल रंगोली देख CM मोहन यादव हुए प्रभावित, जानें खासियत

Published : Oct 16, 2026, 10:19 PM IST
mp Project Cheetah 4 years

सार

श्योपुर में 1000 से अधिक महिलाओं और छात्राओं ने चीता मुखी की विशाल मानव रंगोली बनाई। CM मोहन यादव ने इसे वन्यजीव संरक्षण की प्रेरणादायी पहल बताया।

भोपाल। प्रोजेक्ट चीता के चार साल पूरे होने के मौके पर मध्य प्रदेश के श्योपुर में महिलाओं और छात्राओं ने अनूठे अंदाज में वन्यजीव संरक्षण का संदेश दिया। ढेगदा स्थित क्रीड़ा परिसर में 1,000 से अधिक महिलाओं और छात्राओं ने मिलकर भारतीय मादा चीता ‘मुखी’ की विशाल प्रतिकृति मानव रंगोली के जरिए तैयार की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायी बताया है। शारदीय नवरात्र के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में महिला शक्ति, सामूहिक भागीदारी और प्रकृति संरक्षण का संदेश एक साथ देखने को मिला। यह आयोजन प्रदेश में चल रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत किया गया।

Cheetah Project: चीता मुखी की मानव रंगोली ने खींचा ध्यान

श्योपुर जिले के ढेगदा स्थित क्रीड़ा परिसर में शुक्रवार को ‘क्रिएटिव श्योपुर’ के तहत यह विशेष आयोजन हुआ। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़ी एक हजार से अधिक महिलाओं के साथ कन्या आदिवासी परिसर की छात्राओं ने हिस्सा लिया।

प्रतिभागियों ने चीते के चेहरे के रंगों से मेल खाते परिधान पहनकर मानव रंगोली के माध्यम से मादा चीता मुखी की विशाल आकृति बनाई। बड़ी संख्या में महिलाओं और छात्राओं की एकजुट भागीदारी ने इस आयोजन को खास बना दिया। शारदीय नवरात्र के दौरान आयोजित इस कार्यक्रम ने नारी शक्ति की सामूहिक क्षमता को सामने रखा। साथ ही, इसके जरिए लोगों को वन्यजीवों के संरक्षण और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संदेश भी दिया गया।

CM Mohan Yadav ने बताया प्रेरणादायी प्रयास

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि प्रोजेक्ट चीता के चार वर्ष पूरे होने पर श्योपुर में एक हजार से अधिक महिलाओं और छात्राओं द्वारा मानव रंगोली के माध्यम से भारतीय मादा चीता मुखी की विशाल प्रतिकृति बनाना अद्भुत और प्रेरणादायी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा कि सेवा संकल्प अभियान के तहत नारी शक्ति की यह अनूठी पहल वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता और जनभागीदारी का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने लोगों से प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण का संकल्प लेने की अपील भी की। इस आयोजन को जनभागीदारी के जरिए पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।

Project Cheetah: 17 सितंबर 2022 को कूनो से हुई थी शुरुआत

भारत में चीतों को फिर से बसाने की महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क में की थी। इसी दिन नामीबिया से लाए गए चीतों को कूनो में छोड़ा गया था। इस परियोजना का उद्देश्य भारत में चीतों की आबादी को फिर से स्थापित करना और उनके लिए उपयुक्त प्राकृतिक आवास विकसित करना है। पिछले चार वर्षों में कूनो में चीतों के प्रजनन और नए शावकों के जन्म के साथ परियोजना ने महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किए हैं। चीता पुनर्स्थापन परियोजना के कारण मध्य प्रदेश की पहचान देश में चीता संरक्षण के प्रमुख केंद्र के रूप में मजबूत हुई है। राज्य को अब ‘चीता स्टेट’ के नाम से भी जाना जाता है।

Cheetah Mukhi: भारत में जन्मी चीता पीढ़ी की खास पहचान

कूनो नेशनल पार्क में 29 मार्च 2023 को जन्मी मादा चीता मुखी, नामीबिया से लाई गई मादा चीता ज्वाला की संतान है। भारत में चीतों के दोबारा बसाए जाने के बाद यहां जन्म लेने वाली शुरुआती चीता पीढ़ी में मुखी का विशेष स्थान है। मुखी का जन्म भारत में चीता पुनर्स्थापन परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि था। लंबे अंतराल के बाद भारतीय धरती पर चीता शावक का जन्म इस बात का संकेत था कि नए वातावरण में चीतों का प्रजनन संभव हो रहा है। नवंबर 2025 में मुखी ने पांच शावकों को जन्म दिया। यह परियोजना के लिए एक और अहम उपलब्धि रही, क्योंकि इससे भारत में जन्मे चीतों की अगली पीढ़ी के विकास की संभावनाएं मजबूत हुईं।

Seva Sankalp Abhiyan: वन्यजीव संरक्षण से जुड़ रही जनभागीदारी

मध्य प्रदेश में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जा रहा है। अभियान के तहत जनभागीदारी, सामाजिक सरोकार और सेवा से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। श्योपुर में मानव रंगोली का आयोजन इसी अभियान का हिस्सा रहा। इसमें महिलाओं और छात्राओं की भागीदारी ने वन्यजीव संरक्षण के संदेश को स्थानीय समुदाय तक पहुंचाने का प्रयास किया। नवरात्र के दौरान आयोजित इस कार्यक्रम ने महिला सशक्तीकरण और प्रकृति संरक्षण को एक साथ जोड़ने का काम किया। आयोजन का संदेश साफ है कि वन्यजीवों की सुरक्षा केवल सरकार या वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि इसमें आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।

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