
मध्यप्रदेश अब अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के नक्शे पर अपनी अलग पहचान मजबूत करने की तैयारी में है। राज्य सरकार पर्यटकों को केवल ऐतिहासिक स्मारकों और मशहूर पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें गांवों की जिंदगी, जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक खान-पान, जंगलों और स्थानीय कला से भी जोड़ना चाहती है। इसी दिशा में मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड ने वैश्विक ट्रैवल इंडस्ट्री के सामने प्रदेश की खूबियों को रखा है।
मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग के सचिव और मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी ने सिंगापुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल ट्रेड शो 'आईटीबी एशिया' में प्रदेश के पर्यटन सामर्थ्य को पेश किया। उन्होंने दुनिया भर के टूर ऑपरेटरों और पर्यटकों से मध्यप्रदेश आने की अपील करते हुए कहा कि यहां उन्हें वास्तविक, प्राकृतिक और ग्रामीण जीवन से जुड़े ऐसे अनुभव मिलेंगे, जो सामान्य पर्यटन से अलग हैं।
सिंगापुर के सैंड्स एक्सपो एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित आईटीबी एशिया के नेशनल टूरिज्म ऑर्गेनाइजेशन (एनटीओ) टॉक सेशन को संबोधित करते हुए डॉ. इलैयाराजा टी ने कहा कि मध्यप्रदेश अपनी भौगोलिक स्थिति के साथ-साथ सांस्कृतिक विविधता और लोगों के आत्मीय व्यवहार के कारण भी खास है। उन्होंने प्रदेश को सही मायनों में 'अतुल्य भारत का दिल' बताया।
उन्होंने पर्यटकों को मध्यप्रदेश में 'ऑथेंटिक, रस्टिक और रॉ एक्सपीरियंस' यानी वास्तविक, विशुद्ध और ग्रामीण परिवेश से जुड़े अनुभव लेने के लिए आमंत्रित किया। उनका कहना था कि पर्यटन का मतलब केवल प्रसिद्ध जगहों पर घूमना नहीं है। स्थानीय लोगों के बीच समय बिताना, उनकी परंपराओं को समझना और उनके जीवन को करीब से देखना भी यात्रा को खास बनाता है।
डॉ. इलैयाराजा ने पर्यटन में नए विचारों और खोज की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि अगर आवश्यकता आविष्कार की जननी है, तो जिज्ञासा खोज का पिता है। उनके मुताबिक, पर्यटकों की बदलती पसंद को समझना और नए गंतव्यों को सामने लाना पर्यटन क्षेत्र के लिए बेहद जरूरी है।
डॉ. इलैयाराजा टी ने बताया कि कोविड महामारी के बाद दुनिया भर में पर्यटन का स्वरूप तेजी से बदला है। अब पर्यटक पहले से मशहूर स्थलों पर जाने के साथ-साथ ऐसी जगहों की तलाश भी कर रहे हैं, जहां उन्हें कुछ नया देखने और अनुभव करने का मौका मिले। उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थलों पर भीड़ बढ़ने की एक बड़ी वजह यह है कि ज्यादातर पर्यटक कुछ चुनिंदा जगहों पर और साल के सीमित समय में पहुंचते हैं। इससे प्रसिद्ध गंतव्यों पर दबाव बढ़ता है, जबकि कई दूसरी जगहें पर्यटकों की नजरों से दूर रह जाती हैं।
इस चुनौती से निपटने के लिए उन्होंने पर्यटन की मांग को अलग-अलग गंतव्यों तक पहुंचाने और अनछुए स्थलों की लगातार खोज करने पर जोर दिया। आईटीबी एशिया में 'रीडिस्ट्रिब्यूटिंग डिमांड थ्रू डिस्कवरी' विषय पर दिए गए प्रेजेंटेशन में उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में ऐसे कई पर्यटन विकल्प हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान दिलाई जा सकती है।
डॉ. इलैयाराजा टी ने अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल समुदाय के सामने मध्यप्रदेश की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विविधता को विस्तार से रखा। उन्होंने बताया कि प्रदेश का 25 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र वनाच्छादित है। यहां सात प्रमुख जनजातियां और 45 उप-जनजातियां रहती हैं, जिनकी अपनी अलग परंपराएं, जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत है। मध्यप्रदेश के पांच प्रमुख सांस्कृतिक अंचल भी इसकी पहचान को खास बनाते हैं। चंदेरी और महेश्वरी के पारंपरिक वस्त्र, विश्वप्रसिद्ध गोंड चित्रकला और भोपाल की जरी-जरदोजी कला प्रदेश के समृद्ध हस्तशिल्प की मिसाल हैं। इन कलाओं और परंपराओं को पर्यटन से जोड़कर पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति समझने का अवसर दिया जा सकता है। साथ ही, इससे स्थानीय कारीगरों और समुदायों को भी अपनी कला के जरिए आजीविका के नए अवसर मिल सकते हैं।
मध्यप्रदेश को डॉ. इलैयाराजा टी ने एक जीवंत 'वाइल्ड किंगडम' के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश देश के प्रमुख टाइगर राज्यों में शामिल है और यहां नौ से अधिक टाइगर रिजर्व हैं। बाघों के अलावा मध्यप्रदेश चीता, लेपर्ड, वल्चर और घड़ियाल के लिए भी जाना जाता है। वन्यजीवों में दिलचस्पी रखने वाले पर्यटकों के लिए प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान और प्राकृतिक क्षेत्र खास आकर्षण हैं। पेंच नेशनल पार्क का संबंध विश्वप्रसिद्ध 'मोगली' और 'द जंगल बुक' की कहानियों से भी है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के बीच अलग पहचान दिलाता है। यहां पर्यटक जंगलों और वन्यजीवों को देखने के साथ नेचर वॉक जैसे अनुभव भी ले सकते हैं। इसके अलावा, ऐतिहासिक नगरी ओरछा में बेतवा नदी पर रिवर राफ्टिंग जैसी गतिविधियां पर्यटन को रोमांचक बनाती हैं। इस तरह मध्यप्रदेश में वन्यजीव पर्यटन, प्रकृति के करीब समय बिताने और एडवेंचर एक्टिविटीज का एक साथ आनंद लेने के विकल्प मौजूद हैं।
मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत भी अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने की बड़ी क्षमता रखती है। डॉ. इलैयाराजा ने बताया कि प्रदेश में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची से जुड़े कुल 22 स्थल हैं, जिनमें तीन स्थायी विश्व धरोहर स्थल और 19 संभावित स्थल शामिल हैं।
सांची स्तूप, खजुराहो के मंदिर और भीमबेटका के प्राचीन शैलचित्र प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत के प्रमुख उदाहरण हैं। ये स्थल भारत के प्राचीन इतिहास, धार्मिक परंपराओं, स्थापत्य कला और मानव सभ्यता के विकास की कहानी बताते हैं।
ऐसे स्थलों को पर्यटन के नए अनुभवों के साथ जोड़ने से यात्रियों को केवल स्मारक देखने के बजाय उनके पीछे छिपे इतिहास और संस्कृति को समझने का अवसर मिल सकता है।
मध्यप्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कनेक्टिविटी और नए अनुभवों पर भी काम किया जा रहा है। डॉ. इलैयाराजा टी ने बताया कि प्रदेश में हेलीकॉप्टर पर्यटन सेवा का विस्तार किया जा रहा है, ताकि दूर-दराज के और कम चर्चित पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो सके। इस पहल का उद्देश्य पर्यटकों को पारंपरिक पर्यटन मार्गों से आगे ले जाना और प्रदेश के नए गंतव्यों को पर्यटन के दायरे में शामिल करना है।
मध्यप्रदेश को फिल्म शूटिंग के लिहाज से भी अनुकूल राज्य के रूप में पेश किया गया। डॉ. इलैयाराजा ने बताया कि स्पेनिश फिल्म कमीशन के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने की संभावनाएं मजबूत होंगी। फिल्मों और अन्य दृश्य माध्यमों में प्रदेश के प्राकृतिक नजारों, ऐतिहासिक इमारतों और सांस्कृतिक स्थलों को दिखाने से इन्हें वैश्विक पहचान मिल सकती है। इससे पर्यटन के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
पर्यटन के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी मध्यप्रदेश का जोर है। डॉ. इलैयाराजा टी ने बताया कि प्रदेश में महिला सफारी चालकों और सर्व-महिला संचालित होटलों के माध्यम से सुरक्षित और जिम्मेदार पर्यटन को मजबूत किया जा रहा है। इस तरह की पहल महिलाओं को रोजगार और नेतृत्व के अवसर देने के साथ पर्यटन क्षेत्र में उनकी भूमिका को भी विस्तार देती है। साथ ही, स्थानीय समुदायों की भागीदारी से पर्यटन को अधिक समावेशी बनाने में मदद मिल सकती है।
डॉ. इलैयाराजा टी ने अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल कंपनियों, टूर ऑपरेटरों और पर्यटकों को मध्यप्रदेश के ग्रामीण पर्यटन का अनुभव लेने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि यहां ग्रामीण पर्यटन स्थानीय समुदायों और नागरिकों के साथ मिलकर संचालित किया जा रहा है। इस व्यवस्था में पर्यटकों को गांवों के जीवन, स्थानीय कला, परंपराओं और रहन-सहन को करीब से जानने का अवसर मिलता है। यह अनुभव सामान्य पर्यटन से अलग होता है, क्योंकि इसमें स्थानीय लोगों के साथ सीधा जुड़ाव रहता है।
उन्होंने कहा कि किसी पर्यटन स्थल की असली खूबसूरती केवल उसके प्राकृतिक नजारों या ऐतिहासिक इमारतों में नहीं होती। वहां के लोगों का व्यवहार, उनका अपनापन और मेहमानों के स्वागत का तरीका भी यात्रा को यादगार बनाता है। मध्यप्रदेश का ग्रामीण पर्यटन इसी सोच पर आधारित है, जहां पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति का हिस्सा बनने और क्षेत्र की असल पहचान को समझने का मौका मिलता है।
मध्यप्रदेश घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए यहां का पारंपरिक खान-पान भी एक बड़ा आकर्षण है। डॉ. इलैयाराजा टी ने विदेशी पर्यटकों और ट्रैवल समुदाय से प्रदेश के स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लेने का आग्रह किया। उन्होंने मालवा के मशहूर पोहा-जलेबी, रतलामी सेव और पारंपरिक दाल-बाफला का जिक्र किया। इसके अलावा मुरैना और ग्वालियर की प्रसिद्ध गजक भी प्रदेश के खान-पान की खास पहचान है।
मध्यप्रदेश की खाद्य संस्कृति में क्षेत्रीय विविधता भी देखने को मिलती है। यहां नवाबी और बुंदेली स्वाद वाली मटन करी जैसे व्यंजन भी स्थानीय खान-पान को अलग पहचान देते हैं। पर्यटन के साथ स्थानीय भोजन को बढ़ावा देने से पर्यटकों को किसी क्षेत्र की संस्कृति को बेहतर ढंग से समझने का मौका मिलता है। साथ ही, स्थानीय खाद्य कारोबार और पारंपरिक व्यंजनों से जुड़े लोगों के लिए भी अवसर बढ़ते हैं।
डॉ. इलैयाराजा टी ने विश्वास जताया कि मध्यप्रदेश की प्राकृतिक संपदा, सांस्कृतिक विविधता, सालभर आयोजित होने वाले उत्सव, बेहतर होती कनेक्टिविटी और सुरक्षित वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों का आत्मीय व्यवहार और पारंपरिक आतिथ्य यहां आने वाले सैलानियों की यात्रा को यादगार बना सकता है। हेलीकॉप्टर पर्यटन सेवा से लेकर ग्रामीण अनुभवों और वन्यजीव पर्यटन तक, मध्यप्रदेश पर्यटकों को कई तरह के विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आईटीबी एशिया जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदेश की खूबियों को सामने रखने का उद्देश्य मध्यप्रदेश को वैश्विक पर्यटन बाजार में अधिक पहचान दिलाना और पर्यटकों को मशहूर स्थलों से आगे नए गंतव्यों तक पहुंचाना है।
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