
भोपाल। मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में स्थित जानापाव को धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को जानापाव में महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित किए जाने वाले ‘श्रीपरशुराम लोक’ और ‘श्रीकृष्ण लोक’ के निर्माण का भूमि-पूजन किया।
जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने जानापाव की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वही गौरवशाली धरती है, जहां भगवान श्रीकृष्ण ने महर्षि परशुराम से सुदर्शन चक्र प्राप्त किया था। उन्होंने कहा कि महर्षि परशुराम की जन्मस्थली और साढ़े सात नदियों के उद्गम वाले इस पवित्र स्थान पर जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करना सौभाग्य की बात है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहा है। उज्जैन में महाकाल लोक के विकास के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार, कारोबार और दूसरी आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है।
इसी मॉडल को आगे बढ़ाते हुए जानापाव को देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र और आध्यात्मिक चेतना पीठ के रूप में विकसित किया जा रहा है। करीब 17 करोड़ रुपये की लागत से यहां श्रीपरशुराम लोक और श्रीकृष्ण लोक का निर्माण किया जाएगा। परियोजना के तहत धार्मिक स्थलों के विकास के साथ पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं भी जुटाई जाएंगी। इसमें यज्ञ कुंड का पुनर्विकास, भव्य ऑडिटोरियम, ध्यान कुटीर, हर्बल गार्डन, लैंडस्केपिंग और बहुउद्देशीय भवन जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा जनसुविधाओं का विस्तार भी किया जाएगा। पहाड़ी क्षेत्र तक पहुंच को आसान बनाने के लिए रोपवे निर्माण को भी कार्ययोजना में शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जानापाव का भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा प्रसंग इस स्थान को विशेष महत्व देता है। मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने यहां महर्षि परशुराम से सुदर्शन चक्र प्राप्त किया था। डॉ. यादव ने कहा कि सुदर्शन चक्र आगे चलकर भगवान श्रीकृष्ण के लिए धर्म और सत्य की रक्षा का महत्वपूर्ण अस्त्र बना। उनके जीवन में सत्य, धर्म, पराक्रम और पुरुषार्थ के कई उदाहरण मिलते हैं। उन्होंने शिशुपाल प्रसंग का जिक्र करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बुआ को दिए वचन के कारण शिशुपाल की सौ गलतियों तक उसे क्षमा किया। लेकिन सीमा पार होने के बाद धर्म की रक्षा के लिए उसका अंत किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश का संबंध भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम, दोनों से रहा है। सरकार राज्य से जुड़े करीब 5000 वर्ष पुराने गौरवशाली इतिहास को सामने लाने के लिए अलग-अलग स्तर पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने मध्य प्रदेश में जिन-जिन स्थानों पर अपने चरण रखे, उन्हें धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा। इसी तरह भगवान श्रीराम के चरण जहां पड़े, उन स्थानों को भी विकसित करने की योजना है।
इस योजना में चित्रकूट धाम, जानापाव, श्रीराम के वनगमन से जुड़े आश्रम और अन्य पौराणिक स्थल शामिल हैं। भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े स्थानों को भी इसी तरह विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि रुक्मिणी हरण से जुड़े क्षेत्रों और धार जिले में हुए युद्ध से संबंधित स्थलों को भी विकसित किया जाएगा। उद्देश्य सिर्फ नए निर्माण करना नहीं, बल्कि इन स्थानों से जुड़े ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भों को लोगों के सामने लाना है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को धर्म, सत्य और पराक्रम का संदेश देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन केवल महाभारत के विराट प्रसंगों तक सीमित नहीं था। गोपाल के रूप में उन्होंने गायों के साथ वन-वन विचरण किया और सामान्य जीवन से लेकर महाभारत तक लोगों को जीवन के अलग-अलग पहलुओं का संदेश दिया। श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से उन्होंने दुनिया को कर्म, धर्म और कर्तव्य का मार्ग दिखाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन यह सिखाता है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति को सत्य और धर्म के पक्ष में खड़ा रहना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक स्थलों के विकास का फायदा सिर्फ श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं रहता। जब किसी स्थान पर बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं, तो स्थानीय स्तर पर होटल, परिवहन, खान-पान, हस्तशिल्प और दूसरे कारोबारों को भी बढ़ावा मिलता है। महाकाल लोक का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और व्यवसाय के नए रास्ते खुले हैं। जानापाव के विकास से भी इसी तरह की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। रोपवे, जनसुविधाओं और अन्य पर्यटन सुविधाओं के विकास से यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को भी अधिक सुविधाजनक बनाया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जानापाव जैसे पवित्र स्थलों का विकास केवल पर्यटन बढ़ाने के लिए नहीं किया जा रहा है। इसका एक बड़ा उद्देश्य नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति, भारतीय परंपरा और देश के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराना भी है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों का संरक्षण और विकास आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण है। इन स्थानों के जरिए लोग भारत की प्राचीन परंपराओं और उनसे जुड़े ऐतिहासिक-पौराणिक प्रसंगों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।
जन्माष्टमी के मौके पर जानापाव में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। कलाकारों ने कृष्ण की लीलाओं से जुड़े विभिन्न प्रसंगों की प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में दही हांडी का आयोजन भी हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जानापाव स्थित मंदिर पहुंचकर भगवान के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की।
श्रीपरशुराम लोक और श्रीकृष्ण लोक का विकास पूरा होने के बाद जानापाव की पहचान धार्मिक पर्यटन के एक बड़े केंद्र के तौर पर और मजबूत होने की उम्मीद है। सरकार इसे मध्य प्रदेश की धार्मिक विरासत, पर्यटन और स्थानीय विकास को एक साथ जोड़ने वाली परियोजना के रूप में आगे बढ़ा रही है।
मध्य प्रदेश में सरकारी नीतियों, योजनाओं, शिक्षा-रोजगार, मौसम और क्षेत्रीय घटनाओं की अपडेट्स जानें। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर सहित पूरे राज्य की रिपोर्टिंग के लिए MP News in Hindi सेक्शन पढ़ें — सबसे भरोसेमंद राज्य समाचार सिर्फ Asianet News Hindi पर।