MP UP Sahyog Sammelan: वाराणसी में 3-5 अप्रैल होगा विक्रमोत्सव 2026, सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य और वैदिक घड़ी होगा आकर्षण

Published : Apr 02, 2026, 09:20 AM IST
samrat vikramaditya mahanatya varanasi

सार

वाराणसी में 3 से 5 अप्रैल 2026 तक विक्रमोत्सव के तहत सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का भव्य मंचन होगा। इस आयोजन में वैदिक घड़ी अर्पण, सांस्कृतिक कार्यक्रम और ऐतिहासिक विरासत को जीवंत करने की विशेष प्रस्तुति शामिल है।

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय काल-गणना के प्रवर्तक और न्यायप्रियता के प्रतीक सम्राट विक्रमादित्य की गौरवगाथा अब काशी की पावन धरती पर गूंजेगी। धर्म और संस्कृति की नगरी वाराणसी के बी.एल.डब्ल्यू. मैदान में 3 से 5 अप्रैल 2026 (विक्रम संवत् 2083) तक एक भव्य सांस्कृतिक आयोजन होगा। इस कार्यक्रम का आयोजन मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त प्रयास से किया जा रहा है, जिसमें महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का मंचन मुख्य आकर्षण रहेगा।

प्रधानमंत्री मोदी और योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में होगा शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह आयोजन भारत के स्वर्णिम इतिहास को जीवंत करेगा। कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की उपस्थिति में होगा। इस आयोजन का उद्देश्य आम लोगों को विक्रम संवत् की वैज्ञानिकता और भारतीय इतिहास की महान उपलब्धियों से परिचित कराना है।

बाबा विश्वनाथ को अर्पित होगी ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’

उज्जैन में सफल स्थापना के बाद अब ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ को वाराणसी में बाबा विश्वनाथ को समर्पित किया जाएगा। यह घड़ी भारतीय कालगणना पद्धति पर आधारित है और इसका डिजिटल संस्करण भी तैयार किया गया है। इसके लिए एक विशेष मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया है, जो 180 से अधिक भाषाओं में समय और पंचांग की जानकारी देता है। यह पहल भारतीय वैज्ञानिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

2007 से शुरू हुई महानाट्य की गौरवशाली यात्रा

‘सम्राट विक्रमादित्य’ महानाट्य की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी। तब से यह उज्जैन, भोपाल, आगरा, हैदराबाद और दिल्ली जैसे शहरों में मंचित हो चुका है। अप्रैल 2025 में लाल किले पर हुए मंचन की प्रधानमंत्री ने सराहना भी की थी।

महानाट्य में दिखेगा शौर्य, न्याय और सांस्कृतिक विरासत

यह नाटक सम्राट विक्रमादित्य के जीवन, उनके साहस, न्यायप्रियता और ‘विक्रम संवत्’ की महत्ता को दर्शाता है। इसमें ‘सिंहासन बत्तीसी’ और ‘बेताल पच्चीसी’ जैसी प्रसिद्ध कथाओं को मंच पर जीवंत किया जाएगा। साथ ही भविष्य पुराण के संदर्भों के माध्यम से उस कालखंड की झलक भी मिलेगी। नाटक में विदेशी आक्रमणों से हुई सांस्कृतिक क्षति और उसे पुनर्जीवित करने के प्रयासों को भी दर्शाया गया है। सम्राट के दरबार के नवरत्न—कालिदास और वराहमिहिर—की विद्वता को भी प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा।

175 कलाकारों के साथ भव्य तकनीकी प्रस्तुति

करीब 1 घंटे 45 मिनट के इस नाटक में 175 से अधिक कलाकार भाग लेंगे। मंच पर रथ, घोड़े, ऊंट और पालकी जैसे वास्तविक तत्वों का उपयोग किया जाएगा। तीन अलग-अलग मंचों और आधुनिक ग्राफिक्स व स्पेशल इफेक्ट्स के माध्यम से दर्शकों को अद्भुत अनुभव मिलेगा।

सांस्कृतिक प्रदर्शनी और सामाजिक संदेश

कार्यक्रम स्थल पर कई ज्ञानवर्धक प्रदर्शनियां भी लगेंगी, जिनमें ‘आर्ष भारत’, शिव पुराण, चौरासी महादेव, श्री हनुमान और मध्यप्रदेश के धार्मिक स्थलों की जानकारी दी जाएगी। यह आयोजन ‘स्वच्छ और समृद्ध मध्यप्रदेश’ के संकल्प को भी मजबूत करेगा।

महानाट्य के रचनाकार और कलाकार

इस नाटक की परिकल्पना डॉ. मोहन यादव ने की है। इसका लेखन पद्मश्री डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित ने किया है, निर्देशन संजीव मालवीय ने किया है और प्रस्तुति संयोजक राजेश सिंह कुशवाहा हैं। इसे ‘श्री विशाला सांस्कृतिक एवं लोकहित समिति, उज्जैन’ प्रस्तुत कर रही है। मुख्य भूमिकाओं में विक्रम सिंह चौहान और डॉ. राहत पटेल सम्राट विक्रमादित्य के रूप में नजर आएंगे। अन्य कलाकारों में कृष्णा राठौर, दुर्गेश बाली, चेतन शाह, रेणुका देशपांडे और ऋषि योगी शामिल हैं।

विक्रमोत्सव: सांस्कृतिक पुनर्जागरण का वैश्विक मंच

‘विक्रमोत्सव’ अब एक वैश्विक सांस्कृतिक अभियान बन चुका है। 2026 में इसमें 41 से अधिक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं, जिनमें महाकाल वन मेला, फिल्म फेस्टिवल और वेद अंताक्षरी शामिल हैं। 4 हजार से अधिक कलाकार इसमें भाग ले रहे हैं।

सम्राट विक्रमादित्य सम्मान की घोषणा

मध्यप्रदेश सरकार ने ‘सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान’ की स्थापना की है, जिसकी राशि 1.01 करोड़ रुपये होगी। इसके साथ ही राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय सम्मान भी घोषित किए गए हैं।

सम्राट विक्रमादित्य: शौर्य और न्याय के प्रतीक

सम्राट विक्रमादित्य ने शकों को पराजित कर भारत को सुरक्षित किया और न्याय व संस्कृति का स्वर्णिम युग स्थापित किया। उनके दरबार में कालिदास और वराहमिहिर जैसे महान विद्वान थे, जिन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध किया।

विक्रम संवत्: वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्व

57 ईसा पूर्व शुरू हुआ विक्रम संवत् भारतीय कालगणना का महत्वपूर्ण आधार है। यह ‘चैत्र शुक्ल प्रतिपदा’ से शुरू होता है और भारत में विभिन्न नामों से मनाया जाता है, जैसे गुड़ी पड़वा और उगादी।

विरासत से विश्वगुरु बनने की ओर भारत

सम्राट विक्रमादित्य को अयोध्या में मंदिरों के पुनर्निर्माण का श्रेय भी दिया जाता है। आज भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित कर विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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