
सागर के बंडा इलाके में 4 और 5 सितंबर की दरम्यानी रात जो हुआ, उसने कई गांवों में चिंता बढ़ा दी। उल्टी, बेहोशी और शरीर में झटके जैसे लक्षणों के बाद कई ग्रामीण अस्पताल पहुंचे। इलाज के दौरान कुछ मरीजों की मौत भी हुई। शुरुआती जानकारी में शराब के सेवन की बात सामने आई, लेकिन अब प्रशासन इस सवाल का पक्का जवाब तलाशेगा कि मौतों की असली वजह संदिग्ध अमानक या अवैध शराब थी, या इसके पीछे कोई दूसरा कारण था। इसी को लेकर सागर कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी प्रतिभा पाल ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं।
घटना सागर जिले की शाहगढ़ तहसील के ग्राम नौराज और गूगरा खुर्द के साथ बंडा तहसील के ग्राम बमूरा से जुड़ी बताई गई है। प्रभावित लोगों ने तबीयत बिगड़ने के बाद बंडा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराया।
कुछ मरीजों की हालत इतनी बिगड़ी कि इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हुआ और गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रशासन ने शराब सेवन और मौत के बीच संबंध को जांच के दायरे में रखा है। यानी अंतिम कारण जांच और मेडिकल तथ्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगा।
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मजिस्ट्रियल जांच के लिए अनुविभागीय दंडाधिकारी, जैसीनगर को जांच अधिकारी बनाया गया है। जांच भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 196 के तहत होगी। जांच सिर्फ मौत की वजह तक सीमित नहीं रहेगी। यह भी देखा जाएगा कि संदिग्ध शराब कहां बनी, उसका भंडारण और वितरण कैसे हुआ और इस पूरे मामले में कौन-कौन लोग शामिल थे। इसके अलावा प्रशासन यह भी जांचेगा कि शराब की बिक्री और निगरानी से जुड़े विभागों ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभाई थी या नहीं। अगर कहीं लापरवाही सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
यानी अब जांच का फोकस सिर्फ “शराब पीने से मौत हुई या नहीं?” पर नहीं, बल्कि “शराब लोगों तक पहुंची कैसे और इसके पीछे कौन था?”पर भी रहेगा।
घटना के बाद पुलिस ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक बंडा थाने में भारतीय न्याय संहिता और मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 के विभिन्न प्रावधानों के तहत 30 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
इनमें से 13 आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई है। हालांकि, इन आरोपियों की भूमिका और उनके खिलाफ आरोपों की अंतिम स्थिति जांच और कानूनी प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी। प्रशासन अब शराब की दुकानों के स्टॉक की निगरानी और जांच के साथ अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री से जुड़े नेटवर्क की भी पड़ताल करेगा।
मामले के बीच उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर पहुंचकर प्रभावित मरीजों और उनके परिजनों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।
अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों के इलाज में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए। जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम 24 घंटे उपलब्ध रहे और दवाओं, उपकरणों तथा दूसरे जरूरी संसाधनों की कमी न हो। एक गंभीर मरीज को भोपाल एम्स भेजे जाने की जानकारी भी दी गई है, जबकि अधिकांश उपचाररत मरीजों की स्थिति स्थिर बताई गई है।
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