Y64- Whispers of the Unseen: MIFF 2026 में गूंजी 64 योगिनी मंदिर की कहानी, दुनिया ने देखा अनूठा सफर

Published : Jun 22, 2026, 04:32 PM IST
64 yogini temple documentary screened at miff 2026 mumbai

सार

MIFF 2026 में मितावली के 64 योगिनी मंदिर पर आधारित डॉक्यूमेंट्री ‘Y64’ का प्रदर्शन हुआ। फिल्म भारतीय विरासत, अध्यात्म और नारी शक्ति को दर्शाती है।

भोपाल। मुंबई में आयोजित 19वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF) 2026 में कलाकार एवं साधक डॉ. बीना उन्नीकृष्णन की बहुचर्चित डॉक्यूमेंट्री ‘Y64 – Whispers of the Unseen’ का प्रदर्शन किया गया। मध्यप्रदेश के मितावली स्थित ऐतिहासिक 64 योगिनी मंदिर पर आधारित इस फिल्म को संस्कृति विभाग और काली ट्रस्ट के सहयोग से तैयार किया गया है। अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने इस डॉक्यूमेंट्री को पहली बार प्रस्तुत किया गया।

मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF) दक्षिण एशिया का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित फिल्म समारोह माना जाता है। यह महोत्सव विशेष रूप से वृत्तचित्र, लघु कथा और एनीमेशन फिल्मों को समर्पित है। इस अवसर पर भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रभात जी ने डॉ. बीना उन्नीकृष्णन और उनकी पूरी टीम को सम्मानित किया।

कार्यक्रम में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार दीपक नारायण, एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर दीप्ति चावला, डॉ. बीना उन्नीकृष्णन, सिनेमैटोग्राफर प्रदीप सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

64 योगिनी मंदिर मध्यप्रदेश की स्थापत्य विरासत के अद्भुत उदाहरण

मध्यप्रदेश के अपर मुख्य सचिव, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव श्री शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि मितावली (ग्वालियर), जबलपुर और खजुराहो स्थित 64 योगिनी मंदिर भारतीय स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत के उत्कृष्ट नमूने हैं। उन्होंने बताया कि मितावली का 64 योगिनी मंदिर विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसकी गोलाकार वास्तुकला ने भारत के पुराने संसद भवन की संरचना को प्रेरित किया था। यह ऐतिहासिक स्थल वर्तमान में यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में भी शामिल है।

श्री शुक्ला ने कहा कि ‘Y64- Whispers of the Unseen’ जैसी पहलें देश की अनमोल विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। यह फिल्म युवाओं को भारत की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए रचनात्मकता, आत्म-अन्वेषण, साहस और नारी शक्ति जैसे मूल्यों से परिचित कराती है।

डॉ. बीना उन्नीकृष्णन की प्रेरणादायक आध्यात्मिक और कलात्मक यात्रा

डॉ. बीना उन्नीकृष्णन ने बताया कि लगभग साढ़े बारह वर्ष पहले उन्होंने 64 योगिनियों के चित्रांकन की प्रक्रिया को एक साधारण दस्तावेज़ के रूप में रिकॉर्ड करना शुरू किया था। समय के साथ यह प्रयास समर्पण, धैर्य और आत्म-परिवर्तन की एक अनूठी सिनेमाई यात्रा में बदल गया।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में उन्होंने 64 मूल चित्रों के साथ भारत के 14 शहरों में करीब 15 हजार किलोमीटर की सड़क यात्रा की। इस यात्रा के दौरान हजारों लोगों को योगिनी परंपरा, भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत से परिचित कराया गया। साथ ही कला, संस्कृति और अध्यात्म से जुड़े विषयों पर व्यापक संवाद भी स्थापित हुआ। डॉ. बीना ने कहा कि जब उन्होंने यह यात्रा शुरू की थी, तब वे केवल उत्तर तलाशने वाली एक कलाकार थीं। उन्हें कभी यह अनुमान नहीं था कि यह प्रयास आगे चलकर एक पुस्तक, कला प्रदर्शनी, लंबी सांस्कृतिक यात्रा और अंततः एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का रूप ले लेगा।

उन्होंने कहा कि योगिनियों ने उन्हें भय से आगे बढ़ना, अपने स्त्रीत्व को स्वीकार करना और अदृश्य मार्ग पर विश्वास करना सिखाया। उनके अनुसार, उन्होंने योगिनियों को नहीं चुना, बल्कि योगिनियों ने उन्हें इस कार्य के लिए चुना। यह उनके लिए सौभाग्य और आध्यात्मिक अनुभव दोनों है।

योगिनी परंपरा, इतिहास और आत्म-परिवर्तन की कहानी

डॉ. बीना उन्नीकृष्णन ने बताया कि यह डॉक्यूमेंट्री केवल योगिनी मंदिरों के इतिहास, रहस्यों और सांस्कृतिक महत्व को ही नहीं दर्शाती, बल्कि यह उस आध्यात्मिक आह्वान और समर्पण की कहानी भी प्रस्तुत करती है, जो किसी बड़े उद्देश्य को पूरा करने के लिए आवश्यक होता है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए मध्यप्रदेश पर्यटन एवं संस्कृति विभाग द्वारा दिए गए सहयोग के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

संस्कृति, अध्यात्म और विरासत का अनूठा संगम बनी ‘Y64’

64 योगिनी मंदिरों से प्रेरित ‘Y64 – Whispers of the Unseen’ संस्कृति, अध्यात्म और भारतीय विरासत का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है। कंकाली ट्रस्ट और मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से निर्मित यह डॉक्यूमेंट्री योगिनी परंपरा से जुड़ी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का उत्सव है।

यह फिल्म दर्शकों को ऐसे अनुभव से जोड़ती है, जहां कला, इतिहास, आस्था और आत्म-खोज एक साथ मिलकर भारतीय संस्कृति की गहराई और विविधता को सामने लाते हैं। यही कारण है कि यह डॉक्यूमेंट्री न केवल एक फिल्म, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना को समझने की एक महत्वपूर्ण यात्रा बन गई है।

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