Maharashtra: संजय निरुपम ने बताया अशोक चव्हाण ने क्यों छोड़ा कांग्रेस, शीर्ष नेतृत्व पर उठाए सवाल

Published : Feb 13, 2024, 08:26 AM ISTUpdated : Feb 13, 2024, 08:27 AM IST
Sanjay Nirupam

सार

कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने बताया है कि अशोक चव्हाण महाराष्ट्र कांग्रेस के एक नेता की कार्यशैली से नाराज थे। उन्होंने कई बार पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से शिकायत की थी। 

मुंबई। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कद्दावर नेता अशोक चव्हाण ने सोमवार को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस से पूर्व राज्यसभा सांसद संजय निरुपम ने बताया है कि अशोक चव्हाण के पार्टी छोड़ने की मुख्य वजह क्या थी।

संजय निरुपम ने बताया कि अशोक चव्हान महाराष्ट्र कांग्रेस के एक नेता के काम करने के तरीके से अपसेट थे। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, "अशोक चव्हाण यकीनन पार्टी के लिए असेट थे। कोई उन्हें लायब्लिटी कह रहा है, कोई ED को जिम्मेदार ठहरा रहा है। यह सब जल्दबाजी में दिया हुआ रिएक्शन है। वे बुनियादी तौर पर महाराष्ट्र के एक नेता की कार्यशैली से बहुत परेशान थे। इसकी जानकारी उन्होंने समय-समय पर शीर्ष नेतृत्व को दिया था।"

 

 

शीर्ष नेतृत्व शिकायतों को गंभीरता से लेती तो ये नौबत नहीं आती

संजय निरुपम ने अपने पोस्ट में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने बताया है कि अशोक चव्हान की शिकायत को नेतृत्व ने गंभीरता से नहीं लिया, जिससे उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

निरुपम ने पोस्ट किया, "अगर उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता तो,यह नौबत नहीं आती। अशोक चव्हाण साधन-संपन्न है, कुशल संगठक है, जमीनी पकड़ रखते हैं और सीरीयस नेता हैं। भारत जोड़ो यात्रा जब पिछले साल नांदेड़ में पांच दिनों के लिए थी, तब समस्त नेतृत्व ने उनकी क्षमता का साक्षात दर्शन किया था। उनका कांग्रेस छोड़ना हमारे लिए बड़ा नुकसान है। इसकी भरपाई कोई नहीं कर पाएगा। उन्हें संभालने की जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ हमारी थी।"

यह भी पढ़ें- लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका, अशोक चव्हाण ने छोड़ दी पार्टी

कांग्रेस में ऐसा रहा है अशोक चव्हाण का राजनीतिक करियर

कांग्रेस में अशोक चव्हाण का राजनीतिक करियर बेहद शानदार रहा है। 1986 में वह महाराष्ट्र प्रदेश युवा कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष बने थे। उन्होंने 1987 से 1989 तक लोकसभा सांसद के रूप में काम किया। इसके बाद 1995 तक महाराष्ट्र प्रदेश युवा कांग्रेस कमेटी के महासचिव रहे। 1999 से मई 2014 तक वह तीन बार विधायक चुने गए। मई 2014 में वह फिर से सांसद चुने गए थे। उन्होंने 8 दिसंबर 2008 से 9 नवंबर 2010 तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। 9 नवंबर 2010 को कांग्रेस पार्टी ने उन्हें आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाले से संबंधित भ्रष्टाचार के आरोपों पर पद से इस्तीफा देने के लिए कहा था।

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