Published : Feb 03, 2023, 01:45 PM ISTUpdated : Feb 03, 2023, 01:52 PM IST
जयपुर. जब भी किसी जुबान पर राजस्थान का नाम आता है तो लोग मन में इमेजिन करते रहते हैं कि एक बड़ा सा मैदान जिसमें केवल रेतीली मिट्टी पड़ी हो और उस पर केमल चलते हुए दिखाई दे रहे हो। लेकिन अब राज्य की यही उक्ति प्रदेश के लोगों की किस्मत बदलने वाले हैं।
पहले कभी जिन ऊंटों का उपयोग केवल सामान ढोने के लिए किया जाता था वह अब कमर्शियल सेक्टर में भी काफी फायदेमंद हो रहे हैं।
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दरअसल बीकानेर की कृषि अनुसंधान केंद्र में ऊंटों के बाल से ऊन उससे स्वेटर तैयार किए गए हैं। फिलहाल कृषि विज्ञानिक अभी इस पर रिसर्च कर रहे हैं। यदि यह व्यापक स्तर पर कारगर साबित होता है तो ऊंट के बालों को अब राजस्थान में कमर्शियल सेक्टर में भी यूज लिया जा सकेगा।
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कृषि जानकारों की माने तो दो ऊंटों के बालों से 1 किलो उन बनता है। हालांकि साल में एक समय ही ऐसा आता है। हालांकि पूरे साल में एक समय ही ऐसा आता है जब ऊंटों के बालों की कटाई सबसे ठीक होती है।
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मार्च का महीना ऊंटों की बाल की कटाई के लिए सबसे बेस्ट होता है। इसके बाद गर्मी के मौसम में ऊंटों के बाल अपने आप ही खराब होकर गिरने लगते हैं।
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गौरतलब है कि इससे पहले राजस्थान में ऊंटनी के दूध से चॉकलेट समेत कई डेयरी प्रोडक्ट्स बनाए जा रहे हैं। आपको बता दें कि राजस्थान में करीब 17% आबादी का मुख्य आजीविका साधन ऊंट पालन ही है।
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राजस्थान में बाड़मेर जैसलमेर और बीकानेर जिले ऐसे हैं जिनमें सबसे ज्यादा ऊंट है। राजस्थान में एक आंकड़े के मुताबिक करीब 7 से आठ लाख ऊंट है। हाल ही में लंबी महामारी की चपेट में आने से राजस्थान में करीब 30 हजार ऊंटों की मौत हुई थी।
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जानकारी हो कि राजस्थान का राज्य पशु भी ऊंट ही है। प्रदेश के बीकानेर शहर में तो अलग से ऊंट महोत्सव का भी आयोजन होता है।
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