
जयपुर। राजस्थान में अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति समय पर न मिलने की समस्या लंबे समय से बनी हुई थी। इस मुद्दे को हाल ही में विधानसभा में उठाया गया, जिसके बाद सरकार ने जल्द से जल्द भुगतान सुनिश्चित करने की बात कही है।
वर्ष 2017 से 2021 के बीच बजट की कमी के कारण अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के छात्रों की छात्रवृत्ति समय पर वितरित नहीं हो सकी। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने बताया कि छात्रवृत्ति का 75% हिस्सा केंद्र सरकार और 25% राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है। कई वर्षों तक बजट की अपर्याप्तता के कारण छात्रों को वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
वर्तमान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर राजस्थान के अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की बकाया राशि जारी करने की मांग की थी। सरकार के प्रयासों के बाद केंद्र से 250 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि से वर्ष 2017 से 2021 तक की बकाया छात्रवृत्ति का भुगतान मार्च 2025 के पहले सप्ताह तक पूरा कर लिया जाएगा।
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मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार के निर्देशानुसार, पहले लंबित छात्रवृत्ति का भुगतान 31 मार्च 2025 तक पूरा किया जाएगा। इसके बाद वर्ष 2021 से 2024 तक की छात्रवृत्ति भी समय पर वितरित की जाएगी। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि भविष्य में ऐसी समस्याएँ न आएं, इसलिए नए योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है।
राज्य सरकार ने आदिवासी क्षेत्रों में पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए विशेष योजनाएँ बनाने की योजना बनाई है, जिससे उन्हें शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता समय पर मिल सके। सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम उठाने का आश्वासन दिया है ताकि आने वाले वर्षों में छात्रवृत्ति में किसी प्रकार की देरी न हो और छात्रों की पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रह सके।
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