
लखनऊ, 13 अप्रैल। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को आदर्श माध्यमिक विद्यालय, जनभवन के 5.17 करोड़ रुपये से निर्मित नवीन भवन का उद्घाटन किया। सीएम योगी ने इस अभिनव प्रयास के लिए राज्यपाल का आभार प्रकट किया। उन्होंने बच्चों को सीख दी कि परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है। प्रयास करने से सभी कार्य होते हैं। परिश्रमी व्यक्ति ही अपना लक्ष्य प्राप्त करने में सफल होता है। इस अवसर पर अतिथियों ने 'हमारा जनभवन' पुस्तक का विमोचन भी किया और विद्यालय की प्रधानाचार्या व चालक को स्कूल बस की चाबी प्रदान की।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा, अमन्त्रमक्षरं नास्ति, नास्ति मूलमनौषधम्। अयोग्यः पुरुषः नास्ति, योजकः तत्र दुर्लभः।। अर्थात कोई भी अयोग्य नहीं है। जैसे कोई अक्षर अयोग्य नहीं है, हर अक्षर में मंत्र और हर वनस्पति में औषधि बनने की ताकत है। वैसे ही हर मनुष्य में योग्य बनने का सामर्थ्य है, लेकिन उसके लिए योजक चाहिए। शिक्षा के लिए राज्यपाल ने योजक के रूप में मॉडल प्रस्तुत किया है। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा परिषद इससे प्रेरणा प्राप्त कर सकती हैं। यह उदाहरण हर एक क्षेत्र में प्रस्तुत किया जा सकता है।
सीएम योगी ने बच्चों के समक्ष वैद्य जीवक का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने आयुर्वेद में पहचान बनाई। तक्षशिला में शिक्षा अर्जित करने के बाद गुरु से आज्ञा लेने गए और कहा कि मैं वापस अपने देश-घर जाना चाहता हूं। इस पर गुरु ने कहा कि पहले परीक्षा देनी होगी। वन में जाओ और ऐसी वनस्पति ढूंढकर लाओ, जिसमें औषधीय गुण न हो। जीवक ने तक्षशिला के वन में जाकर कई दिनों तक निवास किया और वापस आकर गुरु से कहा कि ऐसी कोई भी वनस्पति नहीं है, जिसमें औषधीय गुण न हो।
सीएम योगी ने नवनिर्मित विद्यालय भवन की तारीफ करते हुए शिक्षा विभाग के अधिकारियों से कहा कि उन्हें यहां शिक्षण संस्थान का आदर्श मॉडल प्राप्त हो रहा है। इस मॉडल को कहीं भी प्रस्तुत कर सकते हैं। जैसा हम प्रस्तुत करते हैं, लोग उसी रूप में अंगीकार भी करेंगे। वर्तमान व भविष्य की पीढ़ी किस प्रकार के संस्थानों में शिक्षा अर्जित कर रही है, यह भी देखना पड़ेगा। भवन अच्छा है तो उसके अनुरूप वहां शिक्षा का माहौल बनाने में भी मदद मिलेगी। प्राकृतिक वातावरण में अपग्रेडेशन के साथ शिक्षा सर्वसमावेशी विकास का मॉडल बन सके, माननीय राज्यपाल ने आदर्श माध्यमिक विद्यालय, जनभवन में इसी अभिनव प्रयास को आगे बढ़ाया है। माध्यमिक व बेसिक शिक्षा के अधिकारी इसे सीएम कंपोजिट विद्यालय के मॉडल के रूप में अंगीकार कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने अलग-अलग जनपदों से लोगों को बुलाकर इस विद्यालय का अवलोकन कराने को कहा।
सीएम योगी ने बताया कि 5.17 करोड़ रुपये से विद्यालय का यह भव्य भवन बना है। इसमें 4.70 करोड़ राज्य सरकार ने दिए, जबकि शेष राशि माननीय राज्यपाल के प्रयासों व सीएसआर फंड से उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री ने लैब, लाइब्रेरी, क्लासरूम की तारीफ की और कहा कि पहली बार जनभवन की टीम गणतंत्र दिवस की परेड में भागीदार बनी। अब यहां स्पोर्ट्स मीट होती हैं। यहां के बच्चे व विद्यालय विभिन्न गतिविधियों का केंद्र बन रहे हैं।
सीएम ने कहा कि हम अपने स्तर पर थोड़ा सा भी प्रयास करें तो सरकारी स्कूल को भी कॉन्वेंट-पब्लिक स्कूल की तर्ज पर प्रतिस्पर्धा योग्य बना सकते हैं। यह आदर्श माध्यमिक विद्यालय उस प्रतिस्पर्धा के लिए खुद को तैयार कर रहा है। इस आदर्श माध्यमिक विद्यालय का भव्य भवन, अच्छी लैब, लाइब्रेरी, क्लास रूम व प्रांगण स्पष्ट उदाहरण है कि हम सरकारी विद्यालयों को भी इस रूप में आगे बढ़ा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने विद्यालय के बच्चों की खूब तारीफ की और कहा कि यहां के बच्चे आत्मविश्वास से भरे हैं। जब वे अपनी बात कह रहे थे तो लगा उनका लक्ष्य बड़ा है। बच्चे भारत के स्पेस मिशन, इमर्जिंग टेक्नोलॉजी, अक्षर ज्ञान, स्मार्ट क्लास समेत अलग-अलग विषय़ों के बारे में बता रहे थे। सीएम ने शिक्षकों से कहा कि जब हम जानकारी देंगे तो बच्चों के मन में जिज्ञासा होगी। हम उन्हें लक्ष्य देंगे तो वे उसे प्राप्त करने के लिए कार्य करेंगे और यहीं से बच्चों के जीवन को सुधारने का क्रम प्रारंभ होता है। यहीं से वे आर्यभट्ट, वराहमिहिर, सुश्रुत, चरक, जगदीश चंद्र बसु, सीवी रमन बनेंगे। आर्यभट्ट ने शून्य व खगोल विज्ञान की अद्भुत अवधारणाएं दीं। खगोल शास्त्री वराहमिहिर ने आकाश के रहस्यों का पहली बार उद्घाटन किया। केवल आयुर्वेद ही नहीं, बल्कि एलोपैथी भी सुश्रुत को अपना आदर्श मानती है। चरक ने आयुर्वेद को विज्ञान का स्वरूप दिया। जगदीश चंद्र बसु ने विज्ञान में नए आयाम जोड़े। सभी वनस्पतियों में भी जीव का अंश है, यह बताया जेसी बसु ने। सीवी रमन ने प्रकाश का रहस्य बताया।
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