
Ganga Expressway Industrial Corridor: उत्तर प्रदेश अब सिर्फ सड़कों का जाल बिछाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इन्हीं एक्सप्रेसवे को औद्योगिक विकास की रीढ़ बनाया जा रहा है। 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे को लेकर योगी सरकार की नई रणनीति इसी दिशा में बड़ा संकेत दे रही है।
मेरठ से प्रयागराज तक फैले इस मेगा कॉरिडोर को अब “एक्सप्रेसवे सह इंडस्ट्रियल कॉरिडोर” मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। सरकार इसे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (IMLC) के रूप में तैयार कर रही है, जहां उद्योग, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन का विशाल नेटवर्क खड़ा होगा। प्रधानमंत्री मोदी 29 अप्रैल को हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे को देश को समर्पित करेंगे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) की योजना के तहत पूरे 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे 12 इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (IMLC) नोड्स विकसित किए जा रहे हैं। इन नोड्स के लिए कुल 6,507 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। हर नोड को उसकी भौगोलिक स्थिति, परिवहन सुविधा और औद्योगिक संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि यह एक्सप्रेसवे केवल आवागमन का माध्यम न रहकर एक “इकोनॉमिक ग्रोथ बेल्ट” में बदल जाए।
IMLC योजना को निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। अब तक 987 ‘इंटेंट्स ऑफ इन्वेस्टमेंट’ (EOI) प्राप्त हुए हैं, जिनके जरिए लगभग 46,660 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना जताई गई है। यह निवेश मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग, ई-कॉमर्स सप्लाई चेन और एग्री-प्रोसेसिंग सेक्टर में आने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे के किनारे उद्योग स्थापित होने से माल परिवहन तेज और सस्ता होगा, जिससे उत्पादन लागत घटेगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
यह कॉरिडोर प्रदेश के 12 जिलों को सीधे जोड़ेगा, जिससे क्षेत्रीय असमानता कम करने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ जैसे जिलों में औद्योगिक गतिविधियां तेजी से बढ़ने की संभावना है। इन क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों में बड़ा इजाफा हो सकता है। योगी सरकार का फोकस अब सिर्फ सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क के साथ उद्योग और रोजगार को जोड़कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देना है।
प्रधानमंत्री द्वारा गंगा एक्सप्रेसवे के लोकार्पण के लिए हरदोई को चुना जाना भी इस जिले की रणनीतिक अहमियत को दर्शाता है। हरदोई IMLC मॉडल में प्रमुख नोड्स में शामिल है। यहां 282 किलोमीटर प्वाइंट पर 335 एकड़ क्षेत्र में औद्योगिक विकास की योजना बनाई गई है। सरकार की नजर में यह क्षेत्र आने वाले समय में लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
गंगा एक्सप्रेसवे पर प्रस्तावित नोड्स का विस्तृत विवरण इस प्रकार है-
इन सभी नोड्स की रणनीतिक प्लानिंग एक्सप्रेसवे को सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि उत्तर भारत के सबसे बड़े औद्योगिक कॉरिडोर में बदलने की दिशा में काम कर रही है।
गंगा एक्सप्रेसवे के साथ विकसित हो रहा IMLC मॉडल, उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स हब बनाने की दिशा में मजबूत कदम माना जा रहा है। यदि निवेश प्रस्ताव जमीन पर उतरते हैं, तो यह परियोजना न केवल प्रदेश की जीडीपी को नई ताकत देगी, बल्कि लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी। एक्सप्रेसवे अब सिर्फ सफर को आसान नहीं बनाएंगे, बल्कि विकास, निवेश और रोजगार की नई राह भी खोलेंगे।
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