
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह बनाने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी दिशा में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत तय मानकों का पालन नहीं करने वाले निजी अस्पतालों पर कड़ी कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ निर्देश दिए हैं कि योजना के लाभार्थियों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराने में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेन्सिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों को निःशुल्क और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण योजना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में इस योजना को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए समय-समय पर सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में अस्पतालों की सूचीबद्धता और गुणवत्ता परीक्षण प्रक्रिया को और अधिक सख्त किया गया है। योगी सरकार अस्पताल इम्पैनलमेंट मॉड्यूल (HEM) पोर्टल के माध्यम से सूचीबद्ध अस्पतालों का सत्यापन निर्धारित मानकों के आधार पर कर रही है।
नई व्यवस्था के तहत अस्पतालों को 35 महत्वपूर्ण मानकों को पूरा करना जरूरी किया गया है। इनमें अस्पताल का पंजीकरण प्रमाणपत्र, फायर सेफ्टी एनओसी, आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता, हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्रेशन (HFR) सहित कई जरूरी दस्तावेज और व्यवस्थाएं शामिल हैं।
साचीज की सीईओ ने बताया कि नेशनल हेल्थ अथॉरिटी और स्टेट हेल्थ एजेंसी की ओर से ई-मेल, फोन कॉल, संदेश, पत्राचार और वर्चुअल बैठकों के माध्यम से अस्पतालों को लगातार सहायता दी गई। इसका परिणाम यह रहा कि 95 प्रतिशत से अधिक अस्पताल सफलतापूर्वक HEM 2.0 पोर्टल पर माइग्रेट हो चुके हैं।
इसके बावजूद कुछ निजी अस्पताल निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके। योगी सरकार की ओर से इन अस्पतालों को कई अवसर दिए गए, लेकिन फिर भी करीब 200 निजी चिकित्सालय तय मानकों के अनुसार प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए।
इन अस्पतालों में आगरा, अलीगढ़, प्रयागराज, अमेठी, अमरोहा, आजमगढ़, बागपत, बांदा, बाराबंकी, बरेली, बस्ती, बिजनौर, बुलंदशहर, चंदौली, चित्रकूट, देवरिया, फर्रुखाबाद, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, हाथरस, जौनपुर, झांसी, कन्नौज, कानपुर नगर, कुशीनगर, ललितपुर, लखनऊ, मथुरा, मऊ, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, प्रतापगढ़, संतकबीरनगर, सुल्तानपुर, वाराणसी, शाहजहांपुर, जालौन, मिर्जापुर, अंबेडकरनगर, रामपुर और सोनभद्र सहित कई जिलों के अस्पताल शामिल हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर ऐसे अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए करीब 100 अस्पतालों का भुगतान रोक दिया गया है। वहीं लगभग 100 अन्य अस्पतालों को आयुष्मान योजना से निलंबित कर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना के लाभार्थियों को केवल मानक आधारित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं ही मिलें।
योगी सरकार ने सभी सूचीबद्ध अस्पतालों को एनएबीएच (NABH) गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त करने के निर्देश भी दिए हैं। इसके साथ ही राज्य और जिला स्तर पर अस्पतालों की नियमित ऑडिट और मॉनिटरिंग कराई जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को समय रहते रोका जा सके।
सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक के अधिकतम उपयोग पर भी विशेष जोर दे रही है। अस्पतालों में मरीजों की प्रक्रिया को अधिक आसान और पारदर्शी बनाने के लिए ABDM सक्षम HMIS प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (EHR) प्रणाली को भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। इससे मरीजों का स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा और इलाज की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और तेज हो सकेगी।
राज्य स्तर से अस्पतालों को पोर्टल संचालन और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही ऐसे मामलों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है, जिनमें डॉक्टरों की डिग्री या अन्य विवरणों के गलत इस्तेमाल की शिकायतें मिली हैं। ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
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