
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की समावेशी शिक्षा और दिव्यांग सशक्तिकरण की नीति को धरातल पर उतारते हुए डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में प्रदेश के पहले राज्य विश्वविद्यालय स्तरीय ब्रेल पुस्तकालय अनुभाग की शुरुआत की गई। मुख्य अतिथि कुलपति आचार्य संजय सिंह ने स्वामी विवेकानंद केंद्रीय पुस्तकालय के प्रथम तल पर स्थापित इस अत्याधुनिक ब्रेल पुस्तकालय का उद्घाटन किया।
कार्यक्रम से पहले कुलपति आचार्य संजय सिंह ने विश्वविद्यालय के ब्रेल प्रेस परिसर में ब्रेल लिपि के जनक लुई ब्रेल की जयंती पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद फीता काटकर ब्रेल पुस्तकालय अनुभाग का विधिवत उद्घाटन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति द्वारा दृष्टि दिव्यांग विद्यार्थियों का हाथ पकड़कर दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया और विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए कि उन्हें आधुनिक कंप्यूटर प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि ब्रेल लिपि दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए शिक्षा का सशक्त माध्यम है, जो उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ती है।
प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने बताया कि ब्रेल पुस्तकालय में विश्वविद्यालय के ब्रेल प्रेस से प्रकाशित यूजी और पीजी स्तर के 54 पाठ्यक्रमों की एनईपी आधारित 4000 से अधिक शैक्षणिक ब्रेल पुस्तकें उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश का पहला राज्य विश्वविद्यालय है, जहां इतनी बड़ी संख्या में ब्रेल पुस्तकों का सुव्यवस्थित पुस्तकालय अनुभाग विकसित किया गया है।
ब्रेल पुस्तकालय में 150 से अधिक विद्यार्थियों के बैठकर अध्ययन करने की सुविधा वाला आधुनिक रीडिंग रूम भी तैयार किया गया है, जिससे दृष्टि दिव्यांग विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन वातावरण मिल सके।
प्रवक्ता एवं पुस्तकालय प्रभारी प्रो. यशवंत वीरोदय ने बताया कि इस वर्ष ब्रेल पुस्तकों की संख्या बढ़ाकर 10 हजार करने का लक्ष्य रखा गया है। यहां शैक्षणिक पुस्तकों के साथ-साथ नोवेल, नाटक, महापुरुषों की जीवनियां और अन्य साहित्यिक कृतियां भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘सबको शिक्षा’ की भावना के अनुरूप यह ब्रेल पुस्तकालय केवल विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं रहेगा। बाहरी दृष्टि दिव्यांग भी सदस्यता लेकर यहां अध्ययन कर सकेंगे। इसके लिए विशेष, आकस्मिक और कॉर्पोरेट सदस्यता की व्यवस्था की गई है।
विशेष सदस्यता विद्वानों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और लखनऊ के अन्य निवासियों के लिए होगी, जिसके लिए सदस्यता फॉर्म के साथ दो आवासीय प्रमाण देने होंगे। पुनर्वास विश्वविद्यालय के अतिथि प्रवक्ता, सेवानिवृत्त अध्यापक और कर्मचारी पुस्तकालय शुल्क जमा कर विशेष सदस्य बन सकेंगे।
आकस्मिक सदस्यता एक बार में छह माह तक दी जाएगी, जिसमें शुल्क जमा कर पुस्तकालय संसाधनों का उपयोग किया जा सकेगा। अनियमित सदस्यों को पुस्तक जारी नहीं की जाएगी। कॉर्पोरेट सदस्यता के तहत वार्षिक शुल्क जमा कर लखनऊ का कोई भी संगठन पुस्तकालय का सदस्य बन सकेगा। इसके अंतर्गत संगठन को छह पुस्तकालय टिकट दिए जाएंगे, जिनका उपयोग उसके कर्मचारी कर सकेंगे।
ब्रेल शोध छात्र अजय कुमार द्विवेदी, रोहित, राम सकल, मनोज और अजय सहित अन्य दृष्टि दिव्यांग विद्यार्थियों ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विश्वविद्यालय प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लुई ब्रेल ने उन्हें पढ़ने की लिपि दी, जबकि विश्वविद्यालय ने सम्मानजनक व्यवस्था और आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया है।
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