
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में गो-रक्षा और गो-आश्रय स्थलों को मजबूत व आत्मनिर्भर बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। उन्होंने कहा कि गोसेवा भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है और इस क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया जाना चाहिए।
शनिवार को गोसेवा आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने हर गोशाला में ‘भूसा बैंक’ स्थापित करने पर विशेष जोर दिया। इसके साथ ही किसानों के साथ समन्वय कर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने और प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों को गोशालाओं से जोड़ने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने सभी गो-आश्रय स्थलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा। इसके लिए CSR फंड के उपयोग पर भी जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित निगरानी से व्यवस्थाएं पारदर्शी और मजबूत होंगी।
गोसेवा आयोग और पशुधन विभाग के अधिकारियों को नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही विभागीय मंत्री के नेतृत्व में राज्यव्यापी निरीक्षण और मासिक औचक निरीक्षण भी सुनिश्चित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गो-संरक्षण केवल आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक खेती और सतत विकास का मजबूत आधार है। उन्होंने डीबीटी के माध्यम से समय पर भुगतान और हर गोशाला में गोवंश की दैनिक संख्या का रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए।
बैठक में जानकारी दी गई कि:
मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत 1.83 लाख गोवंश को 1.14 लाख लाभार्थियों को सौंपा गया है।
प्रदेश के 74 जिलों में 5,446 गो-आश्रय स्थलों पर 7,592 सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं।
राज्य में 61,118 हेक्टेयर से अधिक गोचर भूमि उपलब्ध है।
प्रदेश में 97 गोबर गैस संयंत्र संचालित हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा और आय का स्रोत बन रहे हैं। इसके अलावा स्वयं सहायता समूह और एनजीओ गो-पेंट, वर्मी कम्पोस्ट, गो-दीप जैसे उत्पाद बनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में काम कर रहे हैं। मुजफ्फरनगर का गो-अभयारण्य इस दिशा में एक सफल मॉडल के रूप में सामने आया है।
राज्य में खुरपका-मुंहपका, गलाघोटू और लंपी स्किन डिजीज के खिलाफ व्यापक टीकाकरण अभियान चलाए जा रहे हैं। पशुपालकों को लगातार प्रशिक्षण देकर पशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा रहा है।
योगी सरकार गो-आश्रय स्थलों को केवल संरक्षण केंद्र नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता और ग्रामीण विकास के केंद्र के रूप में विकसित कर रही है। तकनीक, पारदर्शिता और जनभागीदारी के जरिए इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है।
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