अब राशन नहीं होगा गायब! जीपीएस सिस्टम से यूपी में टूटी कालाबाजारी की कमर

Published : Jan 02, 2026, 06:13 PM IST
up gps tracking ration system transparency

सार

यूपी में जीपीएस युक्त वाहनों से खाद्यान्न वितरण प्रणाली में पारदर्शिता आई है। 5 हजार से अधिक वाहनों की रियल टाइम निगरानी से गोदाम से दुकान तक अनाज की चोरी और कालाबाजारी पर रोक लगी है। सिंगल स्टेज डोर स्टेप डिलीवरी से जन वितरण प्रणाली मजबूत हुई है।

जहां कभी सरकारी राशन व्यवस्था पर सवाल उठते थे, वहीं अब तकनीक के सहारे उत्तर प्रदेश ने जन वितरण प्रणाली की तस्वीर ही बदल दी है। गोदाम से लेकर उचित दर की दुकान तक खाद्यान्न की हर बोरी पर अब डिजिटल नजर है। जीपीएस युक्त वाहनों के प्रयोग से खाद्यान्न उठान में न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि चोरी और कालाबाजारी पर भी निर्णायक प्रहार हुआ है।

5 हजार से अधिक वाहन, एक मजबूत निगरानी चेन

प्रदेश में खाद्यान्न परिवहन से जुड़े 5 हजार से अधिक वाहनों में जीपीएस डिवाइस लगाए जा चुके हैं। इन वाहनों के जरिए भारतीय खाद्य निगम के डिपो से सीधे उचित दर दुकानों तक अनाज पहुंचाया जा रहा है। वाहन कब चला, कहां रुका और तय समय में दुकान तक पहुंचा या नहीं, हर गतिविधि रियल टाइम सिस्टम में दर्ज हो रही है। इससे रास्ते में खाद्यान्न की हेराफेरी और डायवर्जन की गुंजाइश लगभग खत्म हो गई है।

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डिजिटल ट्रैकिंग से कालाबाजारी पर लगाम

जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम ने जन वितरण प्रणाली में वर्षों से चली आ रही गड़बड़ियों पर रोक लगाई है। अब न तो अनाज बीच रास्ते गायब हो सकता है और न ही उसे किसी अन्य स्थान पर उतारा जा सकता है। कंट्रोल सिस्टम के जरिए हर वाहन की गतिविधि पर नजर रखी जा रही है, जिससे जवाबदेही तय हो रही है और कालाबाजारी पर प्रभावी अंकुश लगा है।

धान और मोटे अनाज की खरीद में भी सख्ती

खरीफ विपणन सत्र 2025-26 में धान खरीद के दौरान भी जीपीएस ट्रैकिंग को अनिवार्य किया गया है। प्रदेश के सभी जनपदों में क्रय केंद्रों से राइस मिलों तक धान परिवहन में लगे 3773 वाहनों में जीपीएस डिवाइस इंस्टाल की गई है। इसके साथ ही मक्का, ज्वार और बाजरा जैसे मोटे अनाजों के परिवहन के लिए 1428 वाहनों को भी जीपीएस से जोड़ा गया है। इससे सरकारी खरीद से लेकर भंडारण तक पूरी सप्लाई चेन पारदर्शी बन गई है।

सिंगल स्टेज डोर स्टेप डिलीवरी से सिस्टम मजबूत

उत्तर प्रदेश में ब्लॉक गोदामों की व्यवस्था समाप्त कर सिंगल स्टेज डोर स्टेप डिलीवरी मॉडल लागू किया गया है। अब भारतीय खाद्य निगम के डिपो से सीधे उचित दर दुकानों तक खाद्यान्न पहुंचाया जा रहा है। यह व्यवस्था ई-टेंडर के माध्यम से चयनित ठेकेदारों के जरिए संचालित हो रही है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप कम हुआ है और जिम्मेदारी तय हुई है। जीपीएस ट्रैकिंग के साथ यह मॉडल जन वितरण प्रणाली की रीढ़ बन चुका है।

लाभार्थियों तक सुरक्षित और समयबद्ध आपूर्ति

वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश के चयनित लाभार्थियों के लिए अब तक 8.03 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न और मोटे अनाजों का आवंटन किया जा चुका है। इसके अलावा अंत्योदय लाभार्थियों के लिए 36,850.35 मीट्रिक टन चीनी भी आवंटित की गई है। जीपीएस ट्रैकिंग व्यवस्था यह सुनिश्चित कर रही है कि यह खाद्यान्न बिना कटौती, बिना चोरी और सही समय पर लाभार्थियों तक पहुंचे।

तकनीक, निगरानी और इच्छाशक्ति के इस संयोजन ने यह साबित कर दिया है कि सरकारी राशन व्यवस्था को भी पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया जा सकता है। योगी सरकार का स्पष्ट संदेश है—अब सरकारी खाद्यान्न रास्ते में नहीं, सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचेगा।

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