UP Mission Shakti: मिशन शक्ति अभियान से महिलाओं को सुरक्षा का भरोसा, POSH Act 2013 पर जागरूकता तेज

Published : Apr 27, 2026, 05:18 PM IST
UP mission shakti posh act 2013

सार

उत्तर प्रदेश में मिशन शक्ति अभियान के तहत महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण पर जोर दिया जा रहा है। POSH Act 2013 के प्रावधानों की जानकारी दी जा रही है, साथ ही वित्तीय और कानूनी अधिकारों पर जागरूकता बढ़ाई जा रही है।

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में चल रहा मिशन शक्ति अभियान अब एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले चुका है। इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को बढ़ावा देने के लिए लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। खास तौर पर कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘पॉश’ (POSH) अधिनियम, 2013 के प्रावधानों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाई जा रही है।

POSH Act 2013 जागरूकता अभियान: सभी वर्गों की भागीदारी

इस जागरूकता अभियान में सरकारी और निजी संस्थानों के अधिकारी-कर्मचारी, महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य, कॉलेज की छात्राएं, वकील, श्रमिक संगठन और स्थानीय समुदाय के प्रतिनिधि सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महिला सशक्तीकरण नीति का अहम हिस्सा है, जिसमें कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम, सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।

कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न कानून: POSH Act के मुख्य प्रावधान

अभियान के दौरान ‘पॉश’ अधिनियम, 2013 के नियमों को विस्तार से समझाया जा रहा है। इस कानून के अनुसार, कार्यस्थल पर किसी भी तरह का शारीरिक, मौखिक या गैर-मौखिक व्यवहार, जो महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाए, यौन उत्पीड़न माना जाता है।

10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में आंतरिक शिकायत समिति बनाना अनिवार्य है, जबकि जिला स्तर पर स्थानीय समिति शिकायतों की सुनवाई करती है। शिकायत दर्ज करने की समय सीमा 3 महीने होती है, जिसे जरूरत पड़ने पर बढ़ाया जा सकता है। 90 दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट देना जरूरी है। यह कानून महिलाओं की गोपनीयता की रक्षा करता है और दोषी पाए जाने पर नियोक्ता को सख्त कार्रवाई करने का अधिकार देता है।

महिला सुरक्षा और आत्मनिर्भरता: अभियान का मुख्य उद्देश्य

मिशन शक्ति अभियान का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना है। इसके तहत न सिर्फ कानूनी जानकारी दी जा रही है, बल्कि कार्यस्थल को सुरक्षित बनाने, जागरूकता बढ़ाने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

महिलाओं के वित्तीय और कानूनी अधिकारों पर विशेष फोकस

इस अभियान में महिलाओं के वित्तीय और कानूनी अधिकारों को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। इसमें मातृत्व अवकाश, समान काम के लिए समान वेतन, कार्यस्थल पर स्वास्थ्य और सुरक्षा, श्रमिक कानूनों के तहत विशेष प्रावधान, वित्तीय साक्षरता, बैंकिंग और बीमा योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं का आर्थिक रूप से मजबूत होना ही उनकी वास्तविक सुरक्षा की नींव है।

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