UP News: ग्रामीण महिलाओं की दुग्ध क्रांति, रोज 10 लाख लीटर उत्पादन से 5000 करोड़ का कारोबार

Published : Mar 24, 2026, 09:20 AM IST
UP Gramin Mahila Dairy Kranti

सार

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाएं दुग्ध उत्पादन और संग्रहण के जरिए आत्मनिर्भर बन रही हैं। 31 जिलों में रोजाना 10 लाख लीटर दूध संग्रहण हो रहा है, जिससे 5000 करोड़ का कारोबार खड़ा हुआ है और हजारों गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक कहानी लिखी है। दुग्ध उत्पादन और संग्रहण के क्षेत्र में उन्होंने ऐसा काम किया है, जो पूरे देश के लिए उदाहरण बन रहा है। योगी सरकार की योजनाओं और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन ने इस बदलाव को संभव बनाया है। आज लाखों महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बनकर अपने परिवार और गांव की अर्थव्यवस्था को सशक्त कर रही हैं।

दूध उत्पादन में बड़ा उछाल: रोजाना 10 लाख लीटर संग्रहण

प्रदेश के 31 जिलों में सक्रिय महिला स्वयं सहायता समूहों ने दुग्ध उत्पादन में बड़ा योगदान दिया है। ये महिलाएं प्रतिदिन करीब 10 लाख लीटर दूध का संग्रहण कर रही हैं। इस प्रयास से लगभग 5000 करोड़ रुपये का बड़ा कारोबार खड़ा हुआ है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है। करीब 6 हजार से अधिक गांवों की महिलाएं इस अभियान से जुड़ी हैं और लगातार प्रगति कर रही हैं। संगठित होकर ये महिलाएं दुग्ध संग्रहण, प्रोसेसिंग और विपणन की पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

महिला स्वयं सहायता समूहों से बढ़ी आय और रोजगार

स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। अब वे केवल श्रमिक नहीं बल्कि उद्यमी के रूप में भी उभर रही हैं। उनकी आय में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में भी सुधार आया है। इस मॉडल से गांवों में पलायन कम हुआ है और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार तैयार हो रहा है।

सरकारी योजनाओं और प्रशिक्षण का अहम योगदान

योगी सरकार द्वारा दी जा रही योजनाएं, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता इस सफलता के पीछे की बड़ी वजह हैं। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन महिलाओं को संगठित कर उन्हें तकनीकी और आर्थिक रूप से सक्षम बना रहा है। आने वाले समय में यह नेटवर्क प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है।

विभिन्न जिलों में महिला संचालित मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां (MPCL)

प्रदेश में कई महिला संचालित मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां (एमपीसीएल) इस बदलाव की धुरी बनी हुई हैं-

  • बलिनी एमपीसीएल (Bundelkhand): बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर और महोबा
  • काशी एमपीसीएल (Purvanchal): बलिया, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, संत रविदास नगर, सोनभद्र और वाराणसी
  • सामर्थ्य एमपीसीएल: प्रतापगढ़, रायबरेली, सुल्तानपुर, अयोध्या, फतेहपुर, अमेठी और कानपुर नगर
  • श्री बाबा गोरखनाथ कृपा एमपीसीएल (Gorakhpur मंडल): देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर और महाराजगंज
  • सृजन एमपीसीएल (Tarai क्षेत्र): बरेली, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर, सीतापुर और रामपुर

इन कंपनियों के माध्यम से महिलाएं न सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका भी निभा रही हैं।

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