UP Industrial Policy Update: योगी कैबिनेट का फैसला, बिजनेस-लॉजिस्टिक्स पार्क और औद्योगिक शेड्स योजना को मंजूरी

Published : Mar 23, 2026, 11:12 PM IST
UP Industrial Policy Update

सार

उत्तर प्रदेश सरकार ने बिजनेस पार्क, लॉजिस्टिक्स पार्क और प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक शेड्स योजनाओं को मंजूरी दी है। इससे निवेश बढ़ेगा, रोजगार सृजित होंगे और उद्योगों को तेजी से स्थापित करने में मदद मिलेगी।

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में “उत्तर प्रदेश निजी बिजनेस पार्क विकास योजना-2025” को मंजूरी दे दी गई है। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश में विश्वस्तरीय प्लग-एंड-प्ले बिजनेस पार्क विकसित करना है, जिससे वैश्विक निवेश आकर्षित होगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।

इस योजना के तहत ऐसे बिजनेस पार्क बनाए जाएंगे जहां बड़ी कंपनियां अपने ऑफिस, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) सेंटर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) और ऑपरेशन सेंटर स्थापित कर सकें। इन पार्कों में रेडी-टू-ऑपरेट सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे सेवा और तकनीकी क्षेत्रों में तेजी से विस्तार संभव होगा।

रेडी-टू-यूज इंफ्रास्ट्रक्चर से कम होगी लागत और समय

अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार के अनुसार, वर्तमान में तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण परियोजनाओं में देरी और लागत बढ़ जाती है। यह योजना इस समस्या को दूर करेगी।

इस योजना के तहत आधुनिक और पहले से तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे:

  • निवेश तेजी से बढ़ेगा
  • रोजगार के अवसर पैदा होंगे
  • राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी
  • MSME और स्टार्टअप को बढ़ावा मिलेगा
  • औद्योगिक क्लस्टरिंग को मजबूती मिलेगी

DBFOT मॉडल से होगा विकास

यह योजना डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट और ट्रांसफर (DBFOT) मॉडल पर लागू की जाएगी। इससे निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी और परियोजनाओं का समय पर और बेहतर तरीके से क्रियान्वयन होगा। हर बिजनेस पार्क को 45 वर्षों के लिए विकसित किया जाएगा, जिसे आगे 45 वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है। इसके बाद संपत्ति सरकार को सौंप दी जाएगी।

प्रमुख बिंदु:

  • न्यूनतम 10 एकड़ भूमि का प्रावधान
  • स्थान के अनुसार लचीलापन
  • अपफ्रंट लैंड प्रीमियम और राजस्व साझेदारी

निजी डेवलपर की होगी पूरी जिम्मेदारी

चयनित डेवलपर को योजना के सभी पहलुओं की जिम्मेदारी दी जाएगी। आवेदन और निविदा प्रक्रिया संबंधित औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा संचालित की जाएगी।

प्रक्रिया में शामिल होंगे:

  • प्रस्ताव आमंत्रण
  • तकनीकी मूल्यांकन
  • स्क्रीनिंग समिति द्वारा चयन
  • अंतिम भूमि आवंटन

प्रगति रिपोर्ट देना होगा अनिवार्य

डेवलपर को हर छह महीने में प्रगति और वित्तीय रिपोर्ट जमा करनी होगी। इसमें कार्य की स्थिति, खर्च और समयसीमा की जानकारी शामिल होगी। सभी निविदाएं PPP दिशा-निर्देशों के अनुसार जारी की जाएंगी और संबंधित विभाग से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।

सम्भल में मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर को मंजूरी

कैबिनेट ने गंगा एक्सप्रेसवे के पास सम्भल जिले में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (IMLC) को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना में सड़क, ड्रेनेज, फायर स्टेशन, जल आपूर्ति, बिजली जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

  • कुल लागत: 293.59 करोड़ रुपये
  • स्वीकृत राशि: 245.42 करोड़ रुपये
  • निर्माण मॉडल: EPC

यह परियोजना क्षेत्र में निवेश बढ़ाएगी और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी।

ग्रेटर नोएडा में मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्क को हरी झंडी

‘उत्तर प्रदेश मल्टी मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क नीति-2024’ के तहत ग्रेटर नोएडा में 174.12 एकड़ भूमि पर मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLP) बनाया जाएगा।

मुख्य विशेषताएं:

  • न्यूनतम 1000 करोड़ रुपये निवेश
  • 30% फ्रंट-एंड लैंड सब्सिडी
  • ई-नीलामी के माध्यम से भूमि आवंटन

रिजर्व प्राइस और समयसीमा तय

  • भूमि का रिजर्व प्राइस: 11,000 रुपये प्रति वर्गमीटर
  • परियोजना पूरी करने की अवधि: 7 वर्ष
  • पहले 3 वर्षों में 40% काम अनिवार्य

विशेष परिस्थितियों में 2 साल का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है।

प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक शेड्स योजना-2026 को मंजूरी

कैबिनेट ने “प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक शेड्स योजना-2026” को भी मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य उद्योगों को तुरंत शुरू करने योग्य इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत पहले से तैयार शेड्स उपलब्ध होंगे, जिससे:

  • लागत कम होगी
  • उत्पादन जल्दी शुरू होगा
  • रोजगार बढ़ेगा

किन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ

इस योजना में प्राथमिकता वाले क्षेत्र:

  • इलेक्ट्रॉनिक्स और EV कंपोनेंट्स
  • ऑटो सेक्टर
  • टेक्सटाइल और गारमेंट
  • फूड प्रोसेसिंग
  • डिफेंस और एयरोस्पेस

PPP मॉडल और जमीन की शर्तें

  • भूमि का स्वामित्व प्राधिकरण के पास रहेगा
  • डेवलपर 45 वर्षों तक संचालन करेगा
  • अधिकतम 15 वर्षों का विस्तार संभव
  • न्यूनतम 10 एकड़ भूमि

परियोजना अवधि पूरी होने के बाद सभी संपत्तियां सरकार को वापस सौंप दी जाएंगी।

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