यमुना एक्सप्रेस-वे हादसा: मुझे बचा लो..बस में फंसे पिता का मौत से पहले बेटी को आखिरी कॉल

Published : Dec 16, 2025, 11:40 PM IST
Yamuna Expressway accident

सार

मथुरा के पास यमुना एक्सप्रेसवे पर घने कोहरे से 8 बसों व 3 गाड़ियों की भीषण टक्कर में 13 लोगों की मौत हुई। आग लगने से कई जिंदा जले। एक बुजुर्ग ने जहां मौत से पहले बेटी को आखिरी कॉल किया, वहीं एक मां बच्चों को बचाकर खुद नहीं बच सकी।

नई दिल्ली। मंगलवार 16 दिसंबर की तड़के यमुना एक्सप्रेसवे पर मथुरा के पास घने कोहरे की वजह से एक भयानक एक्सीडेंट हुआ, जिसमें 13 लोगों की जान चली गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुर्घटना की सबसे बड़ी वजह विजिबिलिटी का कम होना है। हादसे के वक्त यमुना एक्सप्रेसवे पर आगरा से नोएडा जाने वाले रास्ते पर 127वें माइलस्टोन पर घने कोहरे के चलते विजिबिलिटी एक मीटर भी नहीं थी। बता दें कि इस हादसे में 8 बसें और तीन छोटी गाड़ियां आपस में टकरा गईं।

आग लगने से पहले बेटी को किया आखिरी कॉल

रिपोर्ट के मुताबिक, मरने वालों में कानपुर के रावतपुर के रहने वाले 75 साल के जय प्रकाश वर्मा भी शामिल थे, जिन्होंने दुर्घटना के कुछ ही देर बाद अपनी बेटी मनीषा को आखिरी बार फोन किया था। पेशे से पेंटर वर्मा जब सोमवार रात को शताब्दी एसी स्लीपर बस से दिल्ली जा रहे थे, तभी मंगलवार सुबह करीब 4.25 बजे उन्होंने अपनी बेटी मनीषा को फोन करके बताया कि बस का एक्सीडेंट हो गया है। वर्मा अंदर बुरी तरह फंस गए थे। उन्होंने बेटी से बचाने की गुहार लगाई, लेकिन तभी कॉल अचानक कट गया, जिससे परिवार घबरा गया।

जिंदा जले कई यात्रियों के सिर्फ अवशेष मिले

सोशल मीडिया से एक्सप्रेसवे पर एक बड़े एक्सीडेंट के बारे में पता चलने के बाद जयप्रकाश वर्मा की बेटी मनीषा मथुरा पहुंची। उन्होंने जिला अस्पताल में घायलों की लिस्ट देखी और जिला मजिस्ट्रेट से भी संपर्क किया, लेकिन उनके पिता का नाम कहीं नहीं मिला। बाद में पुलिस ने परिवार को बताया कि टक्कर के बाद आग लगने से कई यात्री जिंदा जल गए, जिनके अवशेष मिले हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन अवशेषों को DNA के लिए मुर्दाघर में रखा गया है।

मां ने बच्चों को बचाया, पर खुद नहीं बची

इसी हादसे से एक और दुखद कहानी सामने आई। स्लीपर कोच में यात्रा कर रही एक महिला ने अपने दो बच्चों को खिड़की से बाहर धकेल दिया, लेकिन खुद नहीं बच पाई। महिला के एक रिश्तेदार ने पूरा दिन मथुरा और उसके आस-पास के कई अस्पतालों में अपनी भाभी पार्वती को ढूंढते हुए बिताया। मथुरा के एक अस्पताल के बाहर, जहां पोस्टमॉर्टम हो रहा था उसने रिपोर्टर्स को बताया कि हादसे के बाद उसने पार्वती से फोन पर बात की थी। कॉल के दौरान उसने बताया कि वह बस की टूटी हुई खिड़की से अपने बच्चों को बाहर निकालने में कामयाब हो गई थी।

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