शिक्षामित्रों के लिए योगी सरकार का बड़ा तोहफा, 5 मई को होगा ऐतिहासिक कार्यक्रम

Published : May 03, 2026, 03:00 PM IST
Yogi Government to Honor 1 43 Lakh Shikshamitras at State Level Event in Gorakhpur

सार

उत्तर प्रदेश में 1.43 लाख शिक्षामित्रों को बड़ा सम्मान देने जा रही योगी सरकार। 5 मई को गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्यस्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। बढ़े हुए ₹18,000 मानदेय के साथ शिक्षामित्रों को नई पहचान और संबल मिलेगा।

उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में वर्षों से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे शिक्षामित्रों के लिए 5 मई का दिन खास होने जा रहा है। लंबे समय से आर्थिक और सामाजिक पहचान की मांग कर रहे शिक्षामित्रों को अब योगी सरकार न सिर्फ बढ़ा हुआ मानदेय दे रही है, बल्कि सार्वजनिक रूप से सम्मानित कर उनके योगदान को भी नई पहचान देने जा रही है।

प्रदेश सरकार की ओर से गोरखपुर में आयोजित होने वाला यह राज्यस्तरीय कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लाखों परिवारों के मनोबल से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इस कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे और शिक्षामित्रों से संवाद भी करेंगे।

बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में होगा भव्य राज्यस्तरीय आयोजन

5 मई को सुबह 11 बजे गोरखपुर के बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में राज्यस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे और प्रदेशभर के शिक्षामित्रों को संबोधित करेंगे। सरकार की योजना है कि इस कार्यक्रम को केवल गोरखपुर तक सीमित न रखा जाए। इसी समय प्रदेश के सभी जनपदों में भी समानांतर आयोजन होंगे, जिनमें स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षक और शिक्षामित्र शामिल होंगे। इससे कार्यक्रम को व्यापक स्वरूप मिलेगा और प्रदेशभर के शिक्षामित्र खुद को इस पहल से जुड़ा महसूस कर सकेंगे।

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1.43 लाख शिक्षामित्रों को मिलेगा सीधा लाभ

प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्र इस निर्णय से लाभान्वित हो रहे हैं। सरकार के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से नई व्यवस्था लागू हो चुकी है। इसके अंतर्गत बेसिक शिक्षा विभाग के 13,597 और समग्र शिक्षा योजना के 1,29,332 शिक्षामित्रों को अब ₹18,000 प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। अप्रैल महीने से ही बढ़े हुए मानदेय का लाभ मिलना शुरू हो चुका है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इससे शिक्षामित्रों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और वे अधिक आत्मविश्वास के साथ विद्यालयों में अपनी जिम्मेदारियां निभा सकेंगे।

शिक्षामित्रों के मनोबल को बढ़ाने की कोशिश

शिक्षामित्र लंबे समय से स्थायित्व, मानदेय वृद्धि और सम्मानजनक पहचान की मांग करते रहे हैं। ऐसे में सरकार की यह पहल केवल आर्थिक राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे मनोबल बढ़ाने वाले कदम के रूप में भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्राथमिक शिक्षा की मजबूत नींव में शिक्षामित्रों की बड़ी भूमिका रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में उन्होंने बच्चों को शिक्षा से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में सार्वजनिक मंच पर सम्मान और संवाद की यह पहल शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक संदेश देने का काम कर सकती है।

शिक्षा सुधार की दिशा में सरकार का बड़ा संदेश

योगी सरकार पिछले कुछ वर्षों से बेसिक शिक्षा व्यवस्था में सुधार, स्कूलों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने और शिक्षकों की कार्यप्रणाली को मजबूत करने पर लगातार जोर दे रही है। शिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि और अब राज्यस्तरीय सम्मान कार्यक्रम को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि जब शिक्षा से जुड़े कर्मियों का मनोबल मजबूत होगा, तभी विद्यालयों में पढ़ाई की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

लाइव प्रसारण के जरिए पूरे प्रदेश तक पहुंचेगा कार्यक्रम

गोरखपुर में होने वाले कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दूरदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किया जाएगा। इससे प्रदेशभर के शिक्षामित्र और आम लोग इस आयोजन को लाइव देख सकेंगे। साथ ही सभी जिलों में आयोजित समानांतर कार्यक्रमों में स्थानीय स्तर पर बड़ी भागीदारी की तैयारी की जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों को आयोजन को सफल बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

शिक्षामित्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

शिक्षामित्रों के लिए यह कार्यक्रम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय बाद सरकार की ओर से उनके योगदान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने का संदेश दिया जा रहा है। बढ़े हुए मानदेय और सम्मान समारोह के जरिए सरकार यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने वालों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। आने वाले समय में यह पहल शिक्षा व्यवस्था और शिक्षामित्रों के बीच विश्वास को और मजबूत कर सकती है।

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