
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आयुर्वेद दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास में भगवान धन्वन्तरि की पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने प्रदेशवासियों के आरोग्य, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुर्वेद केवल उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भारतीय परंपरा में भगवान धन्वन्तरि को आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। आयुर्वेद दिवस का उद्देश्य लोगों को स्वस्थ जीवनशैली, प्राकृतिक उपचार और रोगों से बचाव के प्रति जागरूक करना भी है। उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली के बीच स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता पहले से ज्यादा जरूरी हो गई है। ऐसे में आयुर्वेद की जीवनशैली आधारित सोच लोगों को स्वस्थ रहने के लिए महत्वपूर्ण दिशा दे सकती है।
सीएम धामी ने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग है। इसमें बीमारी के उपचार के साथ-साथ रोगों से बचाव और शरीर को स्वस्थ रखने पर भी जोर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, खान-पान को संतुलित रखने और प्राकृतिक तरीकों से स्वास्थ्य की देखभाल करने में आयुर्वेद की महत्वपूर्ण भूमिका है। यही वजह है कि आज पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को लेकर देश और दुनिया में रुचि बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुर्वेद और भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल रही है। योग और आयुर्वेद को लेकर दुनिया में बढ़ती स्वीकार्यता को उन्होंने भारत की प्राचीन स्वास्थ्य परंपराओं के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की उपयोगिता को आधुनिक दौर की जरूरतों के साथ जोड़ते हुए इसके ज्ञान और उपचार पद्धतियों को आगे बढ़ाने की जरूरत है। उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य में प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान के कारण आयुर्वेद के विकास की विशेष संभावनाएं हैं।
उत्तराखंड की पहचान हिमालयी जैव विविधता और औषधीय वनस्पतियों के लिए भी रही है। ऐसे में आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े प्रयास राज्य में स्वास्थ्य और वेलनेस के क्षेत्र को नई दिशा दे सकते हैं। आयुर्वेद दिवस पर मुख्यमंत्री का संदेश भी इसी परंपरा को आधुनिक स्वास्थ्य जरूरतों से जोड़ने पर केंद्रित रहा।
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