
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के आठ साल पूरे होने पर लाभार्थियों और देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुई इस योजना ने गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान गरीब और जरूरतमंद परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सीएम धामी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि स्वस्थ भारत के संकल्प को पूरा करने की दिशा में आयुष्मान भारत एक महत्वपूर्ण पहल है। उनके मुताबिक, योजना ने इलाज को आर्थिक रूप से ज्यादा सुलभ बनाने के साथ जरूरतमंद परिवारों के लिए सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाओं का रास्ता खोला है।
स्वस्थ भारत के संकल्प को साकार करते हुए आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के नेतृत्व में शुरू हुई ‘आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ ने करोड़ों परिवारों के लिए इलाज को आर्थिक चिंता से मुक्त करने का काम किया है। आज इस ऐतिहासिक योजना के 8 वर्ष पूर्ण होने पर सभी… pic.twitter.com/54P7mzfAXt
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) September 23, 2026
आयुष्मान भारत के तहत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की शुरुआत 23 सितंबर 2018 को हुई थी। उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, PM-JAY के तहत पात्र परिवारों को प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिलता है। यह सुविधा देशभर के सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में सेकेंडरी और टर्शियरी स्तर के अस्पताल में भर्ती उपचार के लिए उपलब्ध है।
योजना की एक अहम खासियत कैशलेस इलाज है। यानी पात्र लाभार्थी को अस्पताल में उपचार के लिए योजना के दायरे में आने वाले खर्च का भुगतान अपनी जेब से नहीं करना पड़ता। योजना में परिवार के आकार, उम्र या लिंग पर भी कोई सीमा नहीं है और पात्र लाभार्थियों के लिए पहले से मौजूद बीमारियां भी कवरेज में शामिल हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संदेश में उत्तराखंड की अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना का भी उल्लेख किया। राज्य सरकार ने इस योजना को आयुष्मान भारत की तर्ज पर लागू किया है, ताकि उत्तराखंड के परिवारों को स्वास्थ्य उपचार के लिए आर्थिक सुरक्षा मिल सके। उत्तराखंड सरकार की जानकारी के अनुसार, अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के तहत परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान है। राज्य की आधिकारिक जानकारी में इसे सामान्य और गंभीर बीमारियों के उपचार से जुड़ी मुफ्त एवं कैशलेस चिकित्सा सुविधा के रूप में बताया गया है।
इस योजना का महत्व उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में और बढ़ जाता है। पहाड़ से मैदानी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच एक बड़ी चुनौती रही है। ऐसे में इलाज के लिए आर्थिक मदद और सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस सुविधा जरूरतमंद परिवारों के लिए राहत का माध्यम बनती है।
आयुष्मान भारत की एक महत्वपूर्ण सुविधा नेशनल पोर्टेबिलिटी है। इसके तहत पात्र लाभार्थी देश के किसी भी सूचीबद्ध सरकारी या निजी अस्पताल में योजना के तहत कैशलेस उपचार ले सकता है। यानी इलाज की सुविधा केवल अपने राज्य या जिले तक सीमित नहीं रहती। उत्तराखंड सरकार की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी में भी अटल आयुष्मान योजना के तहत राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी सुविधा का उल्लेख किया गया है। इसका मतलब है कि जरूरत पड़ने पर राज्य के लाभार्थी देश के दूसरे हिस्सों में भी सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार करा सकते हैं।
सीएम धामी ने कहा कि आयुष्मान भारत को केवल एक स्वास्थ्य योजना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, यह 'अंत्योदय' की भावना का उदाहरण है, जिसमें समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के स्वास्थ्य और सम्मान को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताते हुए कहा कि इस जनकल्याणकारी पहल ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए इलाज को सुलभ, कैशलेस और सम्मानजनक बनाने का काम किया है।
उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए आयुष्मान योजना के साथ दूसरी स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी काम किया जा रहा है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, टेलीमेडिसिन, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के जरिए दूरदराज के क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। इस लिहाज से आयुष्मान योजना की कैशलेस उपचार व्यवस्था और राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी जैसी सुविधाएं उत्तराखंड के दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए खास महत्व रखती हैं।
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