
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर देहरादून का सिटी फॉरेस्ट पार्क स्वास्थ्य, प्रकृति और जनभागीदारी का अनूठा संगम बनकर उभरा। हरियाली, ताजी हवा और शांत वातावरण के बीच आयोजित योग कार्यक्रम में एक हजार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया और योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।
मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी, सचिव मोहन सिंह बर्निया, विभिन्न विभागों के अधिकारी, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
सुबह के शांत वातावरण में योग प्रशिक्षकों के निर्देशन में प्रतिभागियों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया। कार्यक्रम में बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। इस दौरान लोगों को योग के शारीरिक और मानसिक लाभों के बारे में भी जानकारी दी गई।
मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने कहा कि योग भारत की प्राचीन परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जिसने आज पूरी दुनिया को स्वस्थ जीवन का मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि बढ़ते तनाव और व्यस्त जीवनशैली के दौर में योग मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि उत्तराखंड सदियों से योग, तप और आध्यात्मिक साधना की भूमि रहा है। राज्य सरकार उत्तराखंड को योग, आयुर्वेद, वेलनेस और प्राकृतिक चिकित्सा के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि सिटी फॉरेस्ट पार्क जैसे सार्वजनिक स्थलों को स्वास्थ्य और जनकल्याण से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि लोग प्रकृति के बीच स्वस्थ जीवनशैली को अपना सकें।
योग दिवस कार्यक्रम के बाद मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने सिटी फॉरेस्ट पार्क का निरीक्षण भी किया। उन्होंने पार्क में उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं का जायजा लेते हुए अधिकारियों को क्यूआर कोड आधारित ऑनलाइन फीडबैक सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए, ताकि नागरिक सीधे अपनी राय और सुझाव दर्ज कर सकें।
मुख्य सचिव ने पार्क की स्वच्छता, हरित क्षेत्र और आधुनिक सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि यह स्थान शहरी जीवन के बीच प्रकृति से जुड़ने का बेहतरीन माध्यम बनकर उभरा है।
योग दिवस का यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि स्वस्थ उत्तराखंड और स्वस्थ भारत के निर्माण की दिशा में जनजागरूकता और सामूहिक सहभागिता का प्रभावी संदेश भी बनकर सामने आया।
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