Hindi Diwas 2026: CM धामी ने साहित्यकारों को किया सम्मानित, हिंदी को लेकर कही बड़ी बात

Published : Sep 14, 2026, 05:54 PM IST
Pushkar Singh Dhami Hindi Diwas 2026 dehradun

सार

हिंदी दिवस पर देहरादून में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने साहित्यकारों को सम्मानित किया और हिंदी, क्षेत्रीय बोलियों व मातृभाषा के संरक्षण पर जोर दिया।

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को देहरादून में आयोजित हिंदी दिवस समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने हिंदी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई तकनीक और भाषाओं को सीखना जरूरी है, लेकिन अपनी मातृभाषा के प्रति गर्व और जुड़ाव कभी कम नहीं होना चाहिए। समारोह में हिंदी के साथ-साथ क्षेत्रीय बोलियों और साहित्य के संरक्षण को लेकर राज्य सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने साहित्य को समाज और आने वाली पीढ़ियों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

हिंदी दिवस समारोह में साहित्यकारों का सम्मान

देहरादून में आयोजित हिंदी दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिंदी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली हस्तियों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की धरती ने ऐसे कई साहित्यकारों को जन्म दिया है, जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से साहित्य को आगे बढ़ाने का काम किया है। मुख्यमंत्री ने साहित्य के महत्व पर जोर देते हुए कहा,

हमें अपनी मातृभाषा पर गर्व करना चाहिए। भाषा यदि शरीर है तो साहित्य उसकी आत्मा है। साहित्य किसी भी भाषा को कालजयी बनाता है और भावी पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य करता है।

हिंदी के साथ क्षेत्रीय बोलियों के संरक्षण पर जोर

सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार हिंदी के साथ-साथ क्षेत्रीय बोलियों और साहित्यकारों के संरक्षण के लिए लगातार काम कर रही है। इसके लिए अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से साहित्यकारों को सम्मानित किया जा रहा है। उन्होंने कहा,

हमारी सरकार हिंदी के साथ ही क्षेत्रीय बोलियों और साहित्यकारों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसके लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से साहित्यकारों को सम्मानित किया जा रहा है।

राज्य सरकार स्थानीय बोलियों और भाषाई विरासत को बचाने के साथ उनके प्रचार-प्रसार पर भी विशेष ध्यान दे रही है। इसका उद्देश्य उत्तराखंड की समृद्ध भाषाई और साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाना है।

उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान योजना से लेखकों को प्रोत्साहन

साहित्यकारों और लेखकों को प्रोत्साहित करने के लिए उत्तराखंड सरकार ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान योजना’ संचालित कर रही है। इस योजना के माध्यम से साहित्य के क्षेत्र में योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाता है। इसके अलावा, राज्य में साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए दो ‘साहित्य ग्राम’ विकसित किए जा रहे हैं। इन साहित्य ग्रामों का उद्देश्य साहित्यकारों, लेखकों और साहित्य प्रेमियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना और साहित्यिक गतिविधियों को गति देना है। स्थानीय लेखकों को अपनी पुस्तकों के प्रकाशन के लिए आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे नए लेखकों को आगे आने का अवसर मिलेगा और क्षेत्रीय साहित्य को व्यापक मंच मिल सकेगा।

हिंदी को विज्ञान और टेक्नोलॉजी की भाषा बनाने की अपील

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हिंदी को केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसे विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा,

हमें हिंदी को केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं रखना है, बल्कि इसे विज्ञान और टेक्नोलॉजी की भी भाषा बनाना है। हमें टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर हिंदी को हर मंच पर पहुंचाने के लिए कार्य करना है।

सीएम ने युवाओं से नई तकनीक अपनाने और नई भाषाएं सीखने की अपील की। साथ ही उन्होंने मातृभाषा के प्रति सम्मान बनाए रखने की बात कही। उन्होंने कहा,

मैं युवा साथियों से कहना चाहूंगा कि नई टेक्नोलॉजी को अपनाएं, नई भाषाएँ सीखें लेकिन अपनी मातृभाषा पर गर्व करना कभी न भूलें।

‘हिंदी भारत की आत्मा है’: CM धामी

हिंदी के महत्व को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना की अभिव्यक्ति भी है। उन्होंने कहा,

हिंदी भारत की आत्मा है। हिंदी हमारे संवाद का माध्यम होने के साथ ही राष्ट्र चेतना की अभिव्यक्ति है।

मुख्यमंत्री के संदेश में हिंदी के विकास के साथ स्थानीय बोलियों, साहित्यकारों और साहित्यिक परंपराओं को मजबूत करने पर भी जोर रहा। उन्होंने कहा कि भाषा और साहित्य का संरक्षण केवल वर्तमान के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जरूरी है।

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