
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देश के विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लाखों लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि भारत विभाजन का दर्द ऐसा घाव है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। यह केवल राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाली मानवीय त्रासदी भी थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन की विभीषिका इतिहास का एक बेहद दर्दनाक और काला अध्याय है। दुनिया के सबसे बड़े जन-विस्थापनों में शामिल इस घटना ने लाखों परिवारों को बिखेर दिया और अनगिनत लोगों को अपने घर, रिश्ते और जीवन तक खोने पड़े।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को जब पूरा देश स्वतंत्रता का उत्सव मना रहा था, उसी समय देश के विभाजन की पीड़ा भी लोगों को झेलनी पड़ी। एक ओर आजादी की खुशियां थीं तो दूसरी ओर लाखों परिवारों के विस्थापन, हिंसा और बिछड़ने की कहानियां भी थीं। उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में यह ऐसी घटना थी जिसने समाज और मानवता दोनों को गहराई से प्रभावित किया। विभाजन का दर्द आज भी उन परिवारों की स्मृतियों में जीवित है जिन्होंने उस दौर को करीब से देखा और सहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन की इस पीड़ा और उससे जुड़े बलिदानों को याद रखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2021 में 14 अगस्त को "विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस" के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। तब से हर वर्ष यह दिवस मनाया जा रहा है ताकि देश उन लाखों लोगों के संघर्ष, बलिदान और पीड़ा को याद रख सके, जिन्होंने विभाजन की भयावह परिस्थितियों का सामना किया था।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह दिवस केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को इतिहास की उन घटनाओं से परिचित कराने का भी माध्यम है, जिन्होंने देश की दिशा और दशा को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को यह जानना चाहिए कि आजादी की कीमत कितने संघर्षों और बलिदानों के बाद मिली थी। विभाजन की त्रासदी से मिली सीख देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सौहार्द को मजबूत बनाने में मदद करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के विभाजन ने सामाजिक एकता, भाईचारे और मानवीय संवेदनाओं को गहरी चोट पहुंचाई थी। लाखों लोग अपने घरों से बेघर हुए और अनिश्चित भविष्य के बीच नई जिंदगी शुरू करने के लिए मजबूर हुए। उन्होंने कहा कि विभाजन केवल सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि यह अनगिनत भावनाओं, रिश्तों और पीढ़ियों के दर्द से जुड़ा हुआ अध्याय है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह हम सभी का दायित्व है कि देश को स्वतंत्र कराने वाले वीर सेनानियों और विभाजन की यातनाएं झेलने वाले प्रत्येक व्यक्ति के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करें। उन्होंने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस हमें उन बलिदानों को याद रखने की प्रेरणा देता है, जिनकी बदौलत आज हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं। यह दिवस आने वाली पीढ़ियों को भी इतिहास के उस दर्दनाक दौर की याद दिलाता रहेगा।
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