
देहरादून: केदारनाथ यात्रा के दौरान मौसम कब बदल जाए, रास्ते पर कहां परेशानी आ जाए या श्रद्धालुओं की भीड़ कब बढ़ने लगे, इन] सब पर नजर रखना बेहद जरूरी है। इसी काम के लिए उत्तराखंड में लाइव मॉनिटरिंग, रियल-टाइम अलर्ट और अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल जैसी व्यवस्थाएं काम करती हैं। अब हिमाचल प्रदेश के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दीपक राठौर ने देहरादून पहुंचकर इन व्यवस्थाओं को समझा। इस दौरान चारधाम यात्रा की निगरानी से लेकर ग्लेशियर झीलों से आने वाली बाढ़ के खतरे और आपदा के समय तुरंत मदद पहुंचाने की तैयारी तक कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
चारधाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहाड़ी रास्तों से गुजरते हैं। ऐसे में मौसम, सड़क की स्थिति और भीड़ पर नजर रखना जरूरी होता है। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) की व्यवस्था में राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) की अहम भूमिका है। हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दीपक राठौर ने देहरादून में इस सिस्टम को समझा। उन्हें बताया गया कि केदारनाथ यात्रा की लाइव मॉनिटरिंग कैसे की जाती है, मौसम और रास्तों से जुड़ी जानकारी पर लगातार नजर कैसे रखी जाती है और जरूरत पड़ने पर अलग-अलग एजेंसियां किस तरह तालमेल बनाकर काम करती हैं। इस व्यवस्था का मकसद यात्रा के दौरान सामने आने वाली परेशानियों की जानकारी समय पर जुटाना और संबंधित टीमों तक पहुंचाना है। इससे प्रशासन को हालात के हिसाब से जरूरी कदम उठाने में मदद मिल सकती है।
पहाड़ों में मौसम तेजी से बदल सकता है। भारी बारिश, भूस्खलन और रास्ते बंद होने जैसी घटनाएं यात्रियों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती हैं। इसलिए समय पर अलर्ट मिलना और उसे सही लोगों तक पहुंचाना आपदा प्रबंधन का अहम हिस्सा है। देहरादून दौरे के दौरान दीपक राठौर ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की कार्यप्रणाली भी देखी। यहां अलग-अलग सोर्सेज और एजेंसियों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर अलर्ट को व्यवस्थित तरीके से आम लोगों तक पहुंचाने की प्रक्रिया समझाई गई। उत्तराखंड में रियल-टाइम अलर्ट सिस्टम, मौसम की निगरानी और अलग-अलग विभागों के बीच तुरंत संपर्क बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश दोनों पहाड़ी राज्य हैं। यहां भारी बारिश, भूस्खलन और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं के साथ ग्लेशियर झीलों से जुड़ा खतरा भी अहम है। ग्लेशियर झील के टूटने या उसका पानी अचानक बाहर निकलने से नीचे के इलाकों में तेज बाढ़ आ सकती है। इसे ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहा जाता है। ऐसी घटना में पानी तेजी से नीचे की ओर बढ़ सकता है और रास्ते में आने वाले इलाकों को नुकसान पहुंचा सकता है। दीपक राठौर ने उत्तराखंड में इस खतरे को कम करने के लिए किए जा रहे कामों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों की भौगोलिक स्थिति और आपदाओं की चुनौतियां काफी हद तक मिलती-जुलती हैं। इसलिए आपदा प्रबंधन में एक-दूसरे के अनुभवों से सीखना और मिलकर तैयारी करना उपयोगी हो सकता है।
आपदा के समय सिर्फ बड़े कंट्रोल रूम में जानकारी होना काफी नहीं है। प्रभावित इलाके में राहत और बचाव की टीम कितनी जल्दी पहुंचती है, यह भी बहुत मायने रखता है। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने तहसील स्तर पर क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) बनाई हैं। दीपक राठौर ने इन टीमों की बनावट और काम करने के तरीके को समझा। उन्होंने इनकी त्वरित प्रतिक्रिया की व्यवस्था की सराहना भी की। अपने दौरे के दौरान आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने प्राधिकरण के कामकाज और नई पहलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तकनीक और विभागों के बीच बेहतर तालमेल के जरिए आपदा के समय राहत और बचाव का काम मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है। तहसील स्तर पर तैयार टीमें स्थानीय हालात के अनुसार जल्दी कार्रवाई करने में मदद कर सकती हैं। इससे आपदा के बाद शुरुआती समय में जरूरी सहायता पहुंचाने की तैयारी को मजबूती मिलती है।
दीपक राठौर ने उत्तराखंड में तैयार मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) और भूदेव ऐप की भी सराहना की। SOP यानी किसी काम को तय तरीके से करने के निर्देश, जिनसे आपदा के समय अलग-अलग टीमें अपनी जिम्मेदारी समझकर काम कर सकें। दौरे के दौरान दोनों राज्यों के बीच आपदा प्रबंधन को लेकर सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। खास तौर पर भूस्खलन, भारी बारिश और पहाड़ी इलाकों में होने वाली दूसरी आपदाओं से निपटने के लिए साझा रणनीति बनाने की जरूरत बताई गई। उत्तराखंड की ओर से चारधाम यात्रा की निगरानी, अलर्ट सिस्टम, आपातकालीन परिचालन केंद्र और स्थानीय स्तर पर तैयार टीमों की जानकारी साझा की गई। इस दौरान अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन प्रकाश चंद्र, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा, ULMMC के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार, यूप्रिपेयर के एपीडी एसके बिरला, और डॉ. पीडी माथुर के साथ ही यूएसडीएमए के विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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