
देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर देहरादून स्थित हयात सेंट्रिक होटल में आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम में शामिल हुए। यह वर्कशॉप सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने और उससे जुड़े जागरूकता अभियान को मजबूत बनाने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण, जंगलों की सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रकृति और विकास के बीच संतुलन बनाए रखना आज की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि बाघों का संरक्षण केवल एक प्रजाति को बचाने का विषय नहीं है, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। उनके मुताबिक यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे तो पूरा इकोसिस्टम विकसित होगा और उसका सीधा लाभ वन्यजीवों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस हमारे लिए विशेष महत्व रखता है। जंगलों की समृद्धि और बाघों की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। जब जंगल स्वस्थ रहेंगे तो बाघों का प्राकृतिक आवास भी सुरक्षित रहेगा और इससे प्रकृति का संतुलन बना रहेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि उत्तराखंड सरकार हमेशा इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच संतुलन की बात करती रही है। उनका कहना था कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व देना जरूरी है।
विश्व बाघ दिवस के अवसर पर देहरादून में आयोजित "एकल उपयोग प्लास्टिक प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन एवं प्रवर्तन" विषयक राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला में सहभागिता कर बाघ संरक्षण पर आधारित चित्र एवं पोस्टकार्ड का विमोचन किया।
साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष में साहसिक कार्य करने तथा… pic.twitter.com/Ifvo8rJVWn— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) July 29, 2026
कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने सिंगल-यूज प्लास्टिक के खिलाफ चल रहे अभियान में जनभागीदारी बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी प्रयासों से यह अभियान सफल नहीं होगा, बल्कि आम लोगों की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा आयोजित यह सेमिनार लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे कार्यक्रम लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति अधिक संवेदनशील बनाते हैं और उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराते हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने राज्य में आने वाले पर्यटकों से भी विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग यहां आते हैं, लेकिन सभी को यह ध्यान रखना चाहिए कि वे अपने पीछे गंदगी न छोड़ें। उन्होंने कहा कि लोग घूमने-फिरने का पूरा आनंद लें, लेकिन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से बचें। साफ-सफाई बनाए रखना और कचरा निर्धारित स्थानों पर ही डालना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार युवा पीढ़ी को भी प्लास्टिक मुक्त अभियान से जोड़ने के लिए विभिन्न स्तरों पर पहल कर रही है। उनका मानना है कि यदि युवाओं में पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ेगी तो भविष्य में इस तरह के अभियानों को और अधिक मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण छोड़ना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
हर साल 29 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य दुनिया भर में बाघों के संरक्षण के महत्व को रेखांकित करना और लोगों को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक बनाना है। भारत के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है क्योंकि देश ने पिछले वर्षों में बाघ संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। वैज्ञानिक संरक्षण उपायों और सतत विकास की नीतियों के चलते भारत आज दुनिया में जंगली बाघों की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है।
वर्तमान समय में दुनिया के कुल जंगली बाघों का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा भारत में पाया जाता है। यह उपलब्धि भारत के संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाती है। यही वजह है कि अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर भी है।
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