Kailash Mansarovar Yatra: 9वां जत्था आज भारत में-10वां तिब्बत में, जानें पूरा अपडेट

Published : Aug 19, 2026, 12:40 PM IST
kailash mansarovar yatra 2026 update

सार

उत्तराखंड सरकार ने बताया है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा का 9वां जत्था आज भारत लौट रहा है. इस ग्रुप में 48 लोग हैं. वहीं, 10वां जत्था भी 23 अगस्त 2026 को भारत में एंट्री करेगा. सरकार ने यात्रा को सुरक्षित और सस्ता बनाने के लिए उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी है.

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने बुधवार को यह पक्की खबर दी है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा का नौवां जत्था आज, यानी 19 अगस्त को, भारत में दाखिल हो जाएगा. इस जत्थे में 48 सदस्य हैं, जिनमें कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) के तीन रसोइए भी शामिल हैं. उत्तराखंड सरकार के मुताबिक, 44 सदस्यों वाला 10वां जत्था अभी तिब्बत में है. इसमें भी KMVN के तीन रसोइए हैं. यह जत्था 23 अगस्त, 2026 को भारत में एंट्री करेगा.

Kailash Mansarovar Yatra 2026: सरकार ने सुरक्षा और सुविधाओं पर क्या कहा?

इससे पहले गुरुवार को विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया था कि सरकार कैलाश मानसरोवर यात्रा को भारतीय नागरिकों के लिए सस्ता, सुलभ और सुरक्षित बनाने के लिए कई कदम उठा रही है. उन्होंने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा, मेडिकल मदद और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में भी बताया. राज्यसभा में BJD सांसद सुलता देव के एक सवाल का जवाब देते हुए सिंह ने कहा कि विदेश मंत्रालय (MEA) इस यात्रा का आयोजन उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और सिक्किम की सरकारों, और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के साथ मिलकर करता है.

Kailash Mansarovar Yatra Route: लिपुलेख और नाथू ला से होती है यात्रा

यह यात्रा दो आधिकारिक रास्तों से होती है - 1981 से उत्तराखंड का लिपुलेख दर्रा और 2015 से सिक्किम का नाथू ला दर्रा. सिंह ने कहा, "MEA इस यात्रा को बिना किसी रुकावट के पूरा कराने के लिए चीन की सरकार और दूसरी भारतीय एजेंसियों के साथ तालमेल करता है."

Kailash Mansarovar Yatra Medical Support: फिटनेस टेस्ट और एयरलिफ्ट की सुविधा

उन्होंने बताया कि यात्रियों की फिटनेस जांचने के लिए मेडिकल टेस्ट होते हैं, ताकि यह पक्का हो सके कि वे "ऊंचाई पर सफर" कर सकते हैं. साथ ही, भारतीय सीमा में मेडिकल इमरजेंसी होने पर हेलिकॉप्टर से एयरलिफ्ट करने का भी इंतजाम है." मंत्री ने कहा, "हाल के सालों में लिपुलेख दर्रे तक सड़क बना दी गई है, ताकि यात्री गाड़ियों से आसानी से पहुंच सकें." उन्होंने यह भी जोड़ा कि पूरे रास्ते पर "ट्रांसपोर्ट, रहने-खाने" जैसी सुविधाएं लगातार बेहतर की जा रही हैं ताकि तीर्थयात्री "सुरक्षित यात्रा" कर सकें.

Nepal Route Kailash Mansarovar Yatra: प्राइवेट ऑपरेटर कराते हैं यात्रा

नेपाल रूट पर, सिंह ने बताया कि प्राइवेट टूर ऑपरेटर कैलाश मानसरोवर यात्रा का आयोजन करते हैं. नेपाल समेत किसी तीसरे देश से यात्रा करने वाले भारतीय नागरिकों को इसके लिए सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं होती. उन्होंने कहा कि काठमांडू में भारतीय दूतावास भारतीय तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए नेपाली अधिकारियों और दूसरे सहयोगियों के साथ असरदार तालमेल बनाए रखता है. सिंह ने आगे कहा कि इसमें जरूरत पड़ने पर भारतीय नागरिकों को "समय पर निकालना, रहने की जगह देना, मेडिकल इलाज और दूसरी मदद" शामिल है.

Kailash Mansarovar Yatra Safety: सरकार से हाई-लेवल कमेटी पर सवाल

मंत्री का यह जवाब उस सवाल पर आया था, जिसमें पूछा गया था कि क्या सरकार यात्रा के सभी पहलुओं, जैसे- लागत, इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा, मेडिकल सपोर्ट, बीमा, और तीर्थयात्रियों के कल्याण की समीक्षा के लिए एक हाई-लेवल कमेटी बनाने पर विचार कर रही है. यह जवाब 6 अगस्त को दिए गए एक और बयान के बाद आया है, जिसमें कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा को बताया था कि काठमांडू में भारतीय दूतावास नेपाली अधिकारियों और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा करने वाले भारतीय तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके, खासकर जब दस्तावेज़, मेडिकल इमरजेंसी या खराब मौसम जैसी दिक्कतें आती हैं.

Kailash Mansarovar Yatra Advisory: जरूरी दस्तावेजों के बिना यात्रा न करने की अपील

एक लिखित जवाब में सिंह ने कहा था कि विदेश मंत्रालय को ऐसे कई भारतीय नागरिकों से मदद के लिए अनुरोध मिले थे, जो प्राइवेट टूर ऑपरेटरों के जरिए जरूरी चीनी वीजा और एंट्री परमिट लिए बिना यात्रा करने के बाद नेपाल में फंस गए थे. उन्होंने बताया कि विदेश मंत्रालय ने 27 जून, 2026 को एक एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें तीर्थयात्रियों से अपील की गई थी कि वे यात्रा के लिए सभी जरूरी कागजात हासिल करने तक भारत से अपनी यात्रा शुरू न करें.

Kailash Mansarovar Yatra Route 2026: जून से अगस्त/सितंबर तक आयोजन

विदेश मंत्रालय हर साल जून से अगस्त/सितंबर तक दो अलग-अलग रास्तों - लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) और नाथू ला दर्रा (सिक्किम) से कैलाश मानसरोवर यात्रा (KMY) का आयोजन करता है. वहीं, नेपाल रूट पर प्राइवेट टूर ऑपरेटर 'यात्रा' कराते हैं और इसके लिए भारतीय नागरिकों को सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं होती.

Kailash Mansarovar Religious Significance: हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म में महत्व

यह 'यात्रा' अपने धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए जानी जाती है. हर साल सैकड़ों लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा करते हैं. हिंदुओं के लिए यह भगवान शिव का निवास स्थान है, साथ ही जैन और बौद्ध धर्म के लोगों के लिए भी इसका धार्मिक महत्व है. KMY उन सभी योग्य भारतीय नागरिकों के लिए खुली है, जिनके पास वैध भारतीय पासपोर्ट है और जो धार्मिक उद्देश्यों के लिए कैलाश-मानसरोवर जाना चाहते हैं.

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