
उत्तराखंड में मानसून के बीच कांवड़ यात्रा शुरू होने जा रही है। हर साल लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होते हैं, लेकिन बारिश का मौसम अपने साथ कई स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी लेकर आता है। इसी को ध्यान में रखते हुए एम्स ऋषिकेश की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. मीनू सिंह ने कांवड़ यात्रियों के लिए जरूरी स्वास्थ्य सलाह जारी की है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि यात्रा के दौरान पर्याप्त पानी पीते रहें, साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और केवल स्वच्छ भोजन का ही सेवन करें। उनका कहना है कि थोड़ी सी सावधानी बरतकर मानसून में होने वाली कई बीमारियों से बचा जा सकता है।
डॉ. मीनू सिंह ने बताया कि बारिश के मौसम में कांवड़ यात्रा के दौरान कई तरह की परेशानियां सामने आती हैं। लगातार बारिश की वजह से सड़कों पर जाम लग जाता है, जिससे यात्रियों को लंबे समय तक रास्ते में रुकना पड़ सकता है। इस दौरान पेट से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ती हैं। अपच, डायरिया, गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि शरीर में पानी की कमी होने पर समय-समय पर ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) का इस्तेमाल करना चाहिए। डॉ. सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि हर मामले में एंटीबायोटिक लेने की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर जांच में टाइफाइड या गंभीर संक्रमण की पुष्टि होती है, तभी डॉक्टर की सलाह पर एंटीबायोटिक दवाएं लेनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि बारिश के बाद जगह-जगह पानी जमा होने लगता है, जिससे मच्छरों का प्रजनन बढ़ता है। ऐसे में डेंगू जैसी मच्छर जनित बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा मानसून के दौरान स्क्रब टाइफस और वायरल हेपेटाइटिस-ए के मामले भी सामने आते हैं। इन बीमारियों में तेज बुखार, लिवर पर असर, पीलिया और कई बार मरीज की हालत गंभीर भी हो सकती है। इसलिए किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए।
एम्स ऋषिकेश की डायरेक्टर ने कहा कि यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान भोजन की स्वच्छता पर देना चाहिए। गंदा या दूषित खाना पेट संबंधी गंभीर परेशानियां पैदा कर सकता है। उन्होंने सलाह दी कि जहां तक संभव हो घर का बना या पूरी तरह साफ भोजन ही खाएं। खाने से पहले साबुन से हाथ धोने की आदत जरूर रखें। इससे संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने याद दिलाया कि उत्तराखंड में चारधाम यात्रा पहले से जारी है और अब कांवड़ यात्रा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। ऐसे में स्वास्थ्य संबंधी सावधानी और भी जरूरी हो जाती है।
डॉ. मीनू सिंह ने बाइक और कार से यात्रा करने वाले युवाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मानसून में सड़कें फिसलन भरी हो जाती हैं। भीड़ और तेज रफ्तार की वजह से सड़क हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि हर साल कांवड़ यात्रा के दौरान एम्स ऋषिकेश में कई दुर्घटना पीड़ितों का इलाज किया जाता है। उन्होंने एक ऐसे कांवड़ यात्री का भी जिक्र किया जिसकी सड़क हादसे में मौत हो गई थी, लेकिन उसके परिवार ने अंगदान कर कई लोगों को नया जीवन दिया। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि सबसे जरूरी बात यह है कि श्रद्धालु सुरक्षित यात्रा करें और बिना किसी दुर्घटना के अपने घर लौटें।
संभावित आपात स्थितियों को देखते हुए एम्स ऋषिकेश ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। डॉ. सिंह ने बताया कि संस्थान में ग्रेड-1 ट्रॉमा सेंटर मौजूद है, जहां हर प्रकार की गंभीर चोट और दुर्घटना का इलाज किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर हेली-एम्बुलेंस की मदद से गंभीर मरीजों को सीधे ट्रॉमा सेंटर लाने की व्यवस्था भी उपलब्ध है। अस्पताल में प्राथमिक उपचार से लेकर एडवांस ट्रॉमा केयर तक सभी सुविधाएं मौजूद हैं।
डॉ. मीनू सिंह ने सुझाव दिया कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर अधिक से अधिक फर्स्ट-एड पोस्ट स्थापित किए जाएं, ताकि पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं को मामूली चोट, मांसपेशियों के दर्द या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में तुरंत सहायता मिल सके। उन्होंने बताया कि एम्स ऋषिकेश की ट्रॉमा हेल्पलाइन के जरिए टेलीमेडिसिन सुविधा भी उपलब्ध है। जरूरत पड़ने पर श्रद्धालु फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से डॉक्टरों से सलाह ले सकते हैं और शुरुआती चिकित्सा संबंधी मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।
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