
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को लेकर बड़ा अपडेट शेयर किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश की डबल इंजन सरकार उत्तराखंड को आधुनिक, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब यह अपने महत्वपूर्ण अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस रेल परियोजना के पूरा होने के बाद उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलेगी। इसका असर केवल आवाजाही तक सीमित नहीं रहेगा। पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार, कारोबार और आर्थिक गतिविधियों के नए रास्ते खुलेंगे।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना करीब 125 किलोमीटर लंबी नई ब्रॉडगेज रेल लाइन है। यह परियोजना उत्तराखंड के देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों से होकर गुजरेगी। इसका उद्देश्य ऋषिकेश को देवप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसे धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों से रेल नेटवर्क के जरिए जोड़ना है।
यह परियोजना हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सामान्य रेल परियोजनाओं से काफी अलग है। इसका बड़ा हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरता है। परियोजना में 16 मुख्य सुरंगों की कुल लंबाई करीब 104 किलोमीटर और 12 एस्केप टनल की लंबाई लगभग 98 किलोमीटर है। जुलाई 2026 तक 101 किलोमीटर मुख्य सुरंग और 95 किलोमीटर से अधिक एस्केप टनल का काम पूरा हो चुका था।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के मार्गदर्शन में हमारी डबल इंजन सरकार देवभूमि उत्तराखंड को आधुनिक, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब अपने अंतिम चरण की ओर अग्रसर है।… pic.twitter.com/jEebAzdepJ
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) August 27, 2026
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन को पहाड़ी इलाकों में इंजीनियरिंग की बड़ी चुनौती माना जाता है। परियोजना में 19 महत्वपूर्ण और बड़े पुल भी बनाए जा रहे हैं। जुलाई 2026 तक इनमें से 11 पुलों का निर्माण पूरा हो चुका था, जबकि बाकी पुलों पर काम जारी था। परियोजना की गति बढ़ाने के लिए विभिन्न सुरंगों में आठ एडिट यानी अतिरिक्त निर्माण मार्ग भी बनाए गए। इनका उद्देश्य लंबी सुरंगों में एक साथ कई जगहों से निर्माण कार्य आगे बढ़ाना था। इन सभी आठ एडिट का करीब 5 किलोमीटर का काम भी पूरा हो चुका है।
यानी अब तस्वीर काफी साफ है। सुरंगों का बड़ा हिस्सा तैयार है, पुलों का काम भी लगातार आगे बढ़ रहा है और परियोजना धीरे-धीरे उस चरण में पहुंच रही है जहां ट्रैक, स्टेशन और दूसरे जरूरी रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के काम को तेजी दी जा सकेगी।
मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि इस रेल परियोजना का सबसे बड़ा असर पर्वतीय क्षेत्रों की कनेक्टिविटी पर पड़ेगा। पहाड़ों में बेहतर रेल संपर्क का मतलब है कि स्थानीय लोगों के लिए आवाजाही आसान होगी और पर्यटकों के लिए भी नए गंतव्यों तक पहुंचना अधिक सुविधाजनक हो सकेगा। उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में पर्यटन और तीर्थाटन की बड़ी भूमिका है। ऐसे में ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेल नेटवर्क बनने से देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसे क्षेत्रों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
बेहतर कनेक्टिविटी का फायदा होटल, होमस्टे, स्थानीय परिवहन, रेस्तरां, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद और दूसरे छोटे कारोबारों तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि इस परियोजना को केवल रेलवे लाइन के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे पर्वतीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाले बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के तौर पर भी देखा जा रहा है।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को उत्तराखंड में चारधाम और पर्वतीय क्षेत्रों की बेहतर कनेक्टिविटी से भी जोड़कर देखा जाता है। रेलवे मंत्रालय के अनुसार, यह रेल लाइन देवप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसे धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को ऋषिकेश और आगे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। हिमालयी क्षेत्र में सड़क मार्ग पर मौसम, भूस्खलन और ट्रैफिक जैसी चुनौतियां बनी रहती हैं। ऐसे में वैकल्पिक और मजबूत रेल कनेक्टिविटी लंबे समय में स्थानीय लोगों और यात्रियों दोनों के लिए अहम साबित हो सकती है।
परियोजना की प्रगति को लेकर 2026 में सामने आए आधिकारिक और परियोजना-संबंधी आंकड़े बताते हैं कि काम काफी आगे बढ़ चुका है। रेलवे मंत्रालय ने जुलाई 2026 में बताया था कि मुख्य और एस्केप सुरंगों का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है तथा प्रमुख पुलों का निर्माण भी तेजी से चल रहा है।
वहीं, मई 2026 में RVNL की ओर से साझा किए गए प्रोजेक्ट अपडेट के अनुसार परियोजना की कुल भौतिक प्रगति करीब 74 प्रतिशत और टनल एक्सकेवेशन लगभग 96 प्रतिशत तक पहुंच चुका था। उस समय परियोजना को दिसंबर 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया था। हालांकि, अप्रैल 2026 में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एवं CEO सतीश कुमार ने कहा था कि RVNL 125 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन को 2028 तक पूरा करेगा।
इसलिए मुख्यमंत्री धामी का 'अंतिम चरण' वाला बयान मुख्य रूप से निर्माण के उस हिस्से की ओर इशारा करता है जहां सुरंग और बड़े सिविल कार्य तेजी से पूरे किए जा रहे हैं। पूरी परियोजना के चालू होने की अंतिम तारीख को लेकर अलग-अलग आधिकारिक अपडेट सामने आए हैं, इसलिए इसे फिलहाल निर्माण के अंतिम महत्वपूर्ण चरण की ओर बढ़ती परियोजना के रूप में देखना ज्यादा उचित होगा।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का बड़ा हिस्सा कठिन हिमालयी भूगोल से होकर गुजरता है। इसी वजह से इसमें अत्याधुनिक टनलिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। परियोजना में करीब 14.8 किलोमीटर लंबी टनल-8 के लिए टनल बोरिंग मशीन का भी इस्तेमाल किया गया है और इसका ब्रेकथ्रू एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि माना गया। यह परियोजना इसलिए भी खास है क्योंकि यहां रेलवे को सिर्फ ट्रैक बिछाने का काम नहीं करना है, बल्कि पहाड़ की जटिल चट्टानी संरचना, गहरी घाटियों, सुरंगों, पुलों और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच सुरक्षित रेल नेटवर्क तैयार करना है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संदेश में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का खास तौर पर जिक्र किया। असल में किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का असर निर्माण पूरा होने के बाद उससे कहीं आगे तक जाता है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के शुरू होने के बाद पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की संभावना है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए पर्यटन, परिवहन और सेवा क्षेत्र में नए अवसर बन सकते हैं। साथ ही स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में भी बेहतर परिवहन नेटवर्क मददगार हो सकता है।
उत्तराखंड के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहाड़ों से पलायन रोकने के लिए रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना लगातार बड़ी चुनौती रही है। बेहतर कनेक्टिविटी इस चुनौती का अकेला समाधान नहीं है, लेकिन यह निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण आधार तैयार कर सकती है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार उत्तराखंड को आधुनिक, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना इसी बड़े विकास मॉडल का हिस्सा है।
फिलहाल सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि परियोजना के बाकी काम भी तय गति से आगे बढ़ें और पहाड़ों को रेल नेटवर्क से जोड़ने का यह सपना जल्द जमीन पर दिखाई दे। अगर परियोजना समयबद्ध तरीके से पूरी होती है तो इसका असर यात्रा सुविधा से लेकर पर्यटन, रोजगार और स्थानीय कारोबार तक कई स्तरों पर देखने को मिल सकता है।
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