
हल्द्वानी की उत्तराखंड फॉरेस्ट ट्रेनिंग एकेडमी (UFTA) ने छात्रों को पर्यावरण और प्रकृति से जोड़ने के लिए एक नई पहल शुरू की है। एकेडमी ने अपने हॉस्टल में छात्रों के लिए 15 दिनों तक मुफ्त ठहरने की सुविधा देने का फैसला किया है। फिलहाल इसे प्रयोग के तौर पर शुरू किया गया है।
इस पहल का खास फोकस युवाओं, खासकर Gen Z, को पर्यावरण और पारिस्थितिकी से जोड़ना है। इसके जरिए छात्रों को किताबों और कक्षाओं से आगे निकलकर प्रकृति, जैव विविधता और पर्यावरण को करीब से समझने का अवसर देने की कोशिश की जा रही है।
शुरुआती चरण में यह सुविधा राज्य के सरकारी शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों को दी जाएगी। ऐसे छात्र अधिकतम 15 दिनों तक एकेडमी के हॉस्टल में मुफ्त रह सकेंगे। UFTA के डायरेक्टर संजीव चतुर्वेदी ने बताया कि यह निर्णय छात्रों की भलाई और राज्य में पर्यावरण से जुड़ी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है। इसके साथ ही युवाओं में प्रकृति के प्रति समझ और जागरूकता विकसित करना भी पहल का एक अहम हिस्सा है। फिलहाल इसे पायलट प्रोजेक्ट की तरह लागू किया गया है। आगे छात्रों से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर इसकी अवधि और दायरा बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।
इस योजना की शुरुआत के पीछे छात्रों की जरूरत भी एक महत्वपूर्ण वजह बनी। इसी महीने वीर सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के अंडरग्रेजुएट छात्रों ने UFTA में ठहरने की अनुमति मांगी थी। उस समय छात्रों के लिए हॉस्टल में रहने की फीस निर्धारित थी। यानी उन्हें भी हॉस्टल में ठहरने के लिए भुगतान करना पड़ता था। इसी अनुरोध के बाद एकेडमी में इस व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हुई। चर्चा के दौरान यह मुद्दा सामने आया कि छात्रों से हॉस्टल के लिए लगभग वही शुल्क लिया जा रहा था, जो राज्य सरकार के अधिकारियों के लिए निर्धारित था। यहीं से व्यवस्था में बदलाव की जरूरत महसूस हुई।
UFTA के डायरेक्टर संजीव चतुर्वेदी ने 9 सितंबर को इस संबंध में प्रस्ताव रखा। उनका तर्क था कि छात्रों और सरकारी अधिकारियों को एक ही आधार पर हॉस्टल शुल्क देना उचित नहीं है, क्योंकि छात्रों की अपनी कोई आय नहीं होती। प्रस्ताव में छात्रों को राहत देने और पर्यावरण अध्ययन के लिए एकेडमी के संसाधनों का इस्तेमाल आसान बनाने की बात कही गई। इसके बाद विभागीय स्तर पर प्रस्ताव पर विचार हुआ और 16 सितंबर को इसे मंजूरी दे दी गई। मंजूरी मिलने के बाद सरकारी शिक्षण संस्थानों के छात्रों के लिए 15 दिनों तक मुफ्त हॉस्टल सुविधा शुरू करने का रास्ता साफ हुआ।
छात्रों को यह सुविधा UFTA के नए 'मयूरी हॉस्टल' (Mayuri Hostel) में मिलेगी। एकेडमी के मुताबिक इस हॉस्टल में छात्रों के ठहरने के लिए आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। इससे छात्रों को केवल रहने की जगह ही नहीं मिलेगी, बल्कि हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्र में पर्यावरण तथा प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े अध्ययन के लिए आधार भी मिल सकेगा। खास बात यह है कि यह पहल केवल हॉस्टल की फीस माफ करने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे उद्देश्य छात्रों को इकोलॉजिकल स्टडी, पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता जैसे विषयों के प्रति ज्यादा करीब लाना है।
आज की युवा पीढ़ी के लिए पर्यावरण का मुद्दा लगातार महत्वपूर्ण हो रहा है। ऐसे में UFTA की यह पहल छात्रों को प्रकृति के साथ प्रत्यक्ष अनुभव हासिल करने का अवसर दे सकती है। एकेडमी का फोकस इस बात पर है कि छात्र पर्यावरण को केवल पाठ्यक्रम का हिस्सा न मानें, बल्कि उसे अपने आसपास मौजूद वास्तविक दुनिया से जोड़कर समझें।
15 दिनों का ठहराव छात्रों को स्थानीय पर्यावरण, वन क्षेत्र, जैव विविधता और संरक्षण से जुड़े विषयों पर अध्ययन के लिए समय दे सकता है। हालांकि, योजना के विस्तार और इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन आगे मिलने वाले फीडबैक से होगा।
यह पहली बार नहीं है जब संजीव चतुर्वेदी के नेतृत्व में छात्रों को पर्यावरण अध्ययन से जोड़ने की पहल की गई हो। सितंबर 2022 में, जब संजीव चतुर्वेदी रिसर्च विंग में चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट के पद पर थे, राज्य के सभी 26 बायोडायवर्सिटी सेंटर्स को छात्रों के भ्रमण और पर्यावरण अध्ययन के लिए पूरी तरह मुफ्त कर दिया गया था।
उस पहल का उद्देश्य छात्रों को राज्य की जैव विविधता को करीब से समझने और फील्ड विजिट के जरिए पर्यावरण के बारे में व्यावहारिक जानकारी हासिल करने का अवसर देना था। अब UFTA की नई हॉस्टल पहल को भी उसी दिशा में एक और कदम के तौर पर देखा जा सकता है। अंतर बस इतना है कि इस बार छात्रों के पास पर्यावरण अध्ययन के दौरान एकेडमी में ठहरने की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
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