Uttarakhand Assembly Session: 27 अक्टूबर से शुरू होगा विधानसभा का तीसरा सत्र, कुंभ 2027 की तैयारी तेज

Published : Oct 14, 2026, 11:22 AM IST
Haridwar Kumbh 2027

सार

उत्तराखंड के राज्यपाल ढाल सिंह बिसेन ने 27 अक्टूबर 2026 से विधानसभा का तीसरा सत्र बुलाने का आदेश जारी कर दिया है। यह सत्र चमोली के गैरसैंण में होगा। वहीं, सीएम धामी ने 2027 में होने वाले हरिद्वार कुंभ मेले का लोगो और थीम सॉन्ग भी लॉन्च कर दिया है।

देहरादून। उत्तराखंड के राज्यपाल ढाल सिंह बिसेन ने पांचवीं विधानसभा का तीसरा सत्र बुलाने की मंजूरी दे दी है। साल 2026 का यह सत्र 27 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से शुरू होगा। इसकी बैठकें चमोली जिले के गैरसैंण (भराड़ीसैंण) स्थित विधानसभा भवन में होंगी। विधानसभा सचिवालय की तरफ से जारी प्रेस नोट में बताया गया है कि मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे से सदन की कार्यवाही शुरू हो जाएगी।

इन सबके बीच, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को हरिद्वार कुंभ मेला-2027 की तैयारियां भी तेज कर दी हैं। उन्होंने कुंभ का ऑफिशियल लोगो, वेबसाइट और थीम सॉन्ग लॉन्च कर दिया है। इसका मकसद इस महाआयोजन की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को दुनिया भर में पहुंचाना है। सरकार की कोशिश है कि देश-विदेश में बैठे लोगों को कुंभ की खासियत पता चले। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को मेले से जुड़ी हर जानकारी आसानी से मिल सके और इस बड़े धार्मिक आयोजन का संदेश जन-जन तक पहुंचे।

हरिद्वार के मेला नियंत्रण भवन (CCR) के ऑडिटोरियम में हुए इस कार्यक्रम में सीएम धामी ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कुंभ भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं, सनातन संस्कृति और हमारी सामूहिक आस्था का एक बहुत बड़ा उत्सव है। करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए हरिद्वार कुंभ का धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा है।

मुख्यमंत्री ने साफ किया कि राज्य सरकार 2027 में एक भव्य और दिव्य कुंभ मेला आयोजित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए हर जरूरी इंतजाम किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि नया लोगो, वेबसाइट और थीम सॉन्ग कुंभ की पहचान को निखारने और आम लोगों को इस आयोजन से जोड़ने में बड़ा रोल निभाएंगे।

अगर हरिद्वार कुंभ-2027 के ऑफिशियल लोगो की बात करें, तो इसमें हरिद्वार की धार्मिक पहचान, मां गंगा के प्रति आस्था और सनातन परंपराओं की झलक साफ दिखती है। इस लोगो में मां गंगा, हर की पैड़ी, धनुष पुल और उगते सूरज की दिव्य चमक को उकेरा गया है। इसके साथ ही भगवान शिव की मूर्ति, साधु-संतों, सनातन धर्म के प्रतीक त्रिशूल और डमरू के अलावा मां मनसा देवी और मां चंडी देवी की पहाड़ियों को भी इस लोगो में जगह दी गई है।

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