Early Warning System: उत्तराखंड के वसुंधरा ताल में लगा सिस्टम, अब ग्लेशियर टूटने से पहले मिलेगा अलर्ट

Published : Oct 14, 2026, 10:54 AM IST
Scientific and technical team completes the installation of an early warning system at Vasundhara Tal in Uttarakhand’s Chamoli district to monitor potential Glacial Lake Outburst Flood (GLOF) risks. (Photo: Uttarakhand State Disaster Management Authority)

सार

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित वसुंधरा ताल में ग्लेशियर टूटने (GLOF) के खतरे को भांपने के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाया गया है। राज्य में ऐसा पहली बार हुआ है, जिससे आपदा से पहले ही लोगों को अलर्ट मिल सकेगा।

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने मंगलवार को बताया कि चमोली जिले के वसुंधरा ताल में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने का पहला चरण पूरा हो गया है। इसका मकसद ग्लेशियर झीलों के फटने (GLOF) से होने वाले खतरों पर नजर रखना है। इस सिस्टम को लगाने गई वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम अपना मिशन पूरा करके लौट आई है। ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में खराब मौसम और मुश्किल रास्तों के बावजूद टीम ने झील के अंदर और आसपास कई एडवांस सेंसर लगाए हैं।

आपदा प्रबंधन और पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने मंगलवार को उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) में इस टीम का स्वागत किया। राज्य सरकार के मुताबिक, उत्तराखंड में किसी ग्लेशियर झील पर पहली बार ऐसा अर्ली वार्निंग सिस्टम लगा है। इससे खतरों की वैज्ञानिक तरीके से निगरानी हो सकेगी और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को समय रहते अलर्ट किया जा सकेगा। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने 29 सितंबर को इस टीम को रवाना किया था।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य के लिए ग्लेशियर झीलों से होने वाले खतरों की पहले से पहचान करना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार नई तकनीक, साइंटिफिक रिसर्च और आपसी तालमेल से अपने आपदा प्रबंधन सिस्टम को मजबूत कर रही है। वसुंधरा ताल में लगा यह सिस्टम ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में खतरों की निगरानी करने, समय पर चेतावनी देने और संवेदनशील इलाकों में लोगों की सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

सीएम ने आगे कहा कि सरकार वैज्ञानिक संस्थानों के साथ मिलकर आपदा प्रबंधन में नई तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है। यह पूरी पहल मुख्यमंत्री धामी और आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक के निर्देशों पर की गई है।

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