
हरिद्वार। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सेना के कल्याण को लेकर केंद्र सरकार के काम की जमकर तारीफ की है। उन्होंने 'वन रैंक वन पेंशन' (OROP) लागू करने से लेकर सीमा पार आतंकवाद पर की गई सख्त कार्रवाई जैसे बड़े फैसलों का जिक्र किया। मीडिया से बात करते हुए सीएम धामी ने कहा कि 2014 से पहले की सरकारें सेना की पुरानी मांगों को पूरा करने में पूरी तरह फेल रहीं। सीमा पार से होने वाले खतरों पर भी उन्होंने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पुष्कर सिंह धामी ने कहा,
प्रधानमंत्री ने हमेशा सेना के जवानों की जरूरतों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए काम किया है। इसी का नतीजा है कि 'वन रैंक वन पेंशन' योजना लागू हो पाई, जिसका देश के सैनिक और आम लोग करीब 40 साल से इंतजार कर रहे थे।
एक प्रेस रिलीज के मुताबिक, पेंशन में लंबे समय से चले आ रहे भेदभाव को खत्म करने के लिए भारत ने वन रैंक वन पेंशन (OROP) योजना शुरू की। यह एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला था जिसने पूर्व सैनिकों की जिंदगी बदल दी। सालों तक हमारे रिटायर्ड सैनिकों ने सिर्फ युद्ध के मैदान में ही नहीं, बल्कि रिटायरमेंट के बाद पेंशन में बराबरी के हक के लिए भी लड़ाई लड़ी। OROP लाकर सरकार ने यह पक्का किया कि देश की सेवा करने वाले जवानों के साथ पूरा न्याय हो।
राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने आज की मजबूत सुरक्षा नीति की तुलना पुरानी नीतियों से की। उन्होंने एयरस्ट्राइक, सर्जिकल स्ट्राइक और 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे सैन्य अभियानों का उदाहरण देते हुए इसे भारत की मजबूत रणनीति का सबूत बताया। उन्होंने आगे कहा,
2014 से पहले की सरकारें लगातार होने वाले आतंकी हमलों की सिर्फ निंदा करके रह जाती थीं, कोई एक्शन नहीं लेती थीं। लेकिन प्रधानमंत्री के कार्यकाल में चीजें बदली हैं। एयरस्ट्राइक, सर्जिकल स्ट्राइक और 'ऑपरेशन सिंदूर' के जरिए देश के दुश्मनों, आतंकियों और अलगाववादियों को कड़ा संदेश दिया गया है। इसके साथ ही दुनिया ने भारत की सैन्य ताकत और रक्षा क्षमता का लोहा भी माना है।
CM धामी ने इस बात पर भी जोर दिया कि कैसे भारत अब हथियार आयात करने वाले देश से एक बड़ा निर्यातक बन गया है। घरेलू रक्षा निर्माण क्षेत्र में काफी तेजी आई है। सीएम धामी ने कहा,
भारत जो कभी छोटे-मोटे हथियारों के लिए भी दूसरे देशों पर निर्भर था, आज कई देशों को रक्षा उपकरण सप्लाई कर रहा है। हमारा रक्षा निर्यात अब हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
उत्तराखंड के तीर्थ-पर्यटन केंद्रों, पहाड़ी इलाकों, मौसम, सरकारी योजनाओं और स्थानीय प्रशासन से जुड़ी ताज़ा खबरें पढ़ें। देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार और पहाड़ी ज़िलों की रिपोर्ट्स के लिए Uttarakhand News in Hindi सेक्शन फॉलो करें — विश्वसनीय और विस्तृत राज्य कवरेज यहीं।