
देहरादून। उत्तराखंड के पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने गुरुवार को एक बड़ी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की पार्टनरशिप से दूरदराज और सीमावर्ती इलाकों के किसानों को बड़ा फायदा हुआ है। पिछले दो सालों में पशुपालकों, मछली पालकों और मुर्गी पालकों ने ITBP के साथ करीब 17.5 करोड़ रुपये का बिजनेस किया है। पशुपालन विभाग और ITBP के बीच हुए इस समझौते (MoU) पर बात करते हुए बहुगुणा ने कहा कि यह पहल दो साल पहले शुरू हुई थी। इसका मकसद मुख्यमंत्री के उस विजन को पूरा करना था, जिसमें दुर्गम और सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की मदद करने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा,
मुख्यमंत्री की सोच थी कि हमारे दूरदराज और मुश्किल इलाकों में रहने वाले लोगों को कुछ राहत मिलनी चाहिए। चाहे वे पशुपालक हों, मछुआरे हों या मुर्गी पालक, उन्हें सपोर्ट की जरूरत थी। इसीलिए हमने दो साल पहले ITBP के साथ हाथ मिलाया। पूरे देश में उत्तराखंड पहली ऐसी सरकार है जिसने ITBP के साथ मिलकर यह पहल शुरू की और इसका सीधा फायदा हमारे किसानों को मिला है।
बहुगुणा ने बताया कि ITBP के जवान, पशुपालन और मत्स्य विभाग के अधिकारियों के साथ सीधे गांवों में जाते हैं। वे किसानों से सीधे सामान खरीदते हैं, जिससे बिचौलियों और कमीशन एजेंटों का खेल खत्म हो गया है। किसानों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे उनके बैंक खातों में पेमेंट मिल जाता है। उन्होंने कहा,
ITBP की टीम हमारे डॉक्टरों, मत्स्य अधिकारियों और पशुपालन अधिकारियों के साथ गांव-गांव जाती है। वे वहीं पर खरीदारी करते हैं। दो दिन के अंदर किसानों के खाते में DBT के जरिए पैसा आ जाता है। इसमें कोई बिचौलिया या कमीशन एजेंट नहीं होता।
इस पहल से पशुपालकों, मछली पालकों और मुर्गी पालकों को एक तैयार बाजार मिल गया है। इस खरीद में बागवानी के उत्पाद, फल, सब्जियां और आंचल (Aanchal) डेयरी का दूध और पनीर भी शामिल है। बहुगुणा ने कहा,
सबसे पहले तो हमारे पशुपालकों, मछुआरों और मुर्गी पालकों को एक रेडी मार्केट मिल गया। हम बागवानी विभाग से फल, सब्जियां और आंचल से दूध-पनीर ले रहे हैं। इससे हमारे कंज्यूमर्स को भी एक तैयार बाजार मिल गया है।
उन्होंने बताया कि पिछले दो सालों में किसानों ने ITBP के साथ करीब 17.5 करोड़ रुपये का बिजनेस किया है। इससे उनके उत्पादों की क्वालिटी और प्रोडक्शन दोनों में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा,
पिछले दो सालों में किसानों ने ITBP के साथ लगभग 17.5 करोड़ रुपये का व्यापार किया है। हमारी क्वालिटी बेहतर हुई है और प्रोडक्शन भी बढ़ा है। डेयरी और मछली पालकों में भी यह भरोसा जगा है कि अगर वे सरकारी सब्सिडी के साथ कुछ कर रहे हैं, तो उनके लिए बाजार पहले से तैयार है।
बहुगुणा ने बताया कि राज्य सरकार ने अब इस मॉडल को सेना (Army) और एसएसबी (SSB) के साथ भी बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी में ITBP स्टेशनों से अपील की है कि वे अपनी खरीद प्रक्रिया में आस-पास के जिलों को भी शामिल करें। उन्होंने कहा,
हमने अब इस मॉडल को सेना और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के साथ भी लागू कर दिया है। हमने ITBP स्टेशनों वाले तीन मुख्य सीमावर्ती जिलों- पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी से अनुरोध किया है कि वे अपनी खरीद में पड़ोसी जिलों को भी जोड़ें।
उन्होंने कहा कि रुद्रप्रयाग, टिहरी, अल्मोड़ा, चंपावत और बागेश्वर जैसे पड़ोसी जिलों को शामिल करने से ज्यादा से ज्यादा स्थानीय पशुपालकों को इस खरीद प्रक्रिया का फायदा मिलेगा। बहुगुणा ने उत्तरकाशी के किसानों का उदाहरण भी दिया। पहले ये किसान अपने पशु और मछली उत्पाद हिमाचल प्रदेश बेचते थे और अक्सर उन्हें पेमेंट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। उन्होंने कहा,
उत्तरकाशी जिले में एक समय ऐसा था जब हमारे पशुपालक और मछली पालक अपना सामान हिमाचल बेचते थे। उन्हें अपने पेमेंट के लिए छह से आठ महीने तक इंतजार करना पड़ता था, और कई बार तो पैसे मिलते ही नहीं थे। वे बहुत परेशान थे। लेकिन ITBP के साथ जुड़ने के बाद, अब उन्हें अच्छे रेट मिल रहे हैं, एक तैयार बाजार मिल गया है, और दो दिन के अंदर पैसा उनके खातों में आ जाता है।
उन्होंने कहा कि यह पहल किसानों की आजीविका सुधारने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर रही है। साथ ही, यह राज्य से पलायन रोकने के प्रधानमंत्री के विजन को भी सपोर्ट कर रही है। बहुगुणा ने कहा,
यह उनकी आजीविका को बढ़ावा दे रहा है, उन्हें आत्मनिर्भर बना रहा है और पलायन रोकने के माननीय प्रधानमंत्री के विजन को सपोर्ट कर रहा है। प्रधानमंत्री का विजन हमारे पशुपालकों और किसानों की आय दोगुनी करना है, और इस पर लगातार काम चल रहा है।
उत्तराखंड के तीर्थ-पर्यटन केंद्रों, पहाड़ी इलाकों, मौसम, सरकारी योजनाओं और स्थानीय प्रशासन से जुड़ी ताज़ा खबरें पढ़ें। देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार और पहाड़ी ज़िलों की रिपोर्ट्स के लिए Uttarakhand News in Hindi सेक्शन फॉलो करें — विश्वसनीय और विस्तृत राज्य कवरेज यहीं।