उत्तराखंड की GI विरासत अब एक छत के नीचे, हल्द्वानी में नई पहल, देखिए क्या है खास

Published : Jul 14, 2026, 08:49 PM IST
uttarakhand gi gallery haldwani

सार

हल्द्वानी में उत्तराखंड की पहली GI प्रोडक्ट्स गैलरी शुरू हुई है। यहां राज्य के 30 से अधिक GI टैग वाले कृषि उत्पाद, हस्तशिल्प और पारंपरिक विरासत को प्रदर्शित किया गया है।

उत्तराखंड को अपनी पहली ज्योग्राफिकल इंडिकेटर्स (GI) प्रोडक्ट्स गैलरी मिल गई है। इसे हल्द्वानी में उत्तराखंड फॉरेस्ट ट्रेनिंग एकेडमी (FTA) में बनाया गया है। इस गैलरी को बनाने का मकसद है कि लोग उत्तराखंड की खेती-किसानी की विविधता, पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत को देख और समझ सकें। एकेडमी में आने वाले ट्रेनी, अधिकारी और आम लोग भी इसके बारे में जान पाएंगे।

इस पूरी तैयारी में करीब तीन महीने का वक्त लगा। इस दौरान राज्य के दूर-दराज के इलाकों से इन सभी चीजों को इकट्ठा किया गया। कुछ चीजें जैसे बेडू, रामनगर की लीची और रामगढ़ का आड़ू जल्दी खराब हो जाती हैं, इसलिए उन्हें खास तरीके से सहेजकर रखा गया है।

उत्तराखंड के पास 30 से ज्यादा GI-टैग वाले प्रोडक्ट्स हैं। इनमें खेती, हैंडीक्राफ्ट, खाने-पीने की चीजें और दूसरे बने-बनाए सामान शामिल हैं। एक दिलचस्प बात ये है कि दिसंबर 2023 में राज्य को एक ही दिन में रिकॉर्ड 18 GI टैग मिले थे।

उत्तराखंड के GI-टैग वाले प्रोडक्ट्स की एक झलक

खेती से जुड़े प्रोडक्ट्स: इसमें तेजपत्ता, मुनस्यारी की सफेद राजमा, कुमाऊं काच्यूरा तेल, अल्मोड़ा की लखोरी मिर्च, बेरीनाग की चाय और उत्तराखंड का काला भट (काला सोयाबीन) शामिल हैं।

हैंडीक्राफ्ट्स (हस्तशिल्प): इसमें उत्तराखंड की ऐपण आर्ट (यह कुमाऊं की पारंपरिक कला है जिसमें लाल बैकग्राउंड पर सफेद चावल के पेस्ट से डिजाइन बनाए जाते हैं), चमोली का लकड़ी का रम्माण मास्क (यह यूनेस्को की लिस्ट में शामिल रम्माण लोक-नाट्य के लिए हाथ से बनाया जाता है), उत्तराखंड के तामता प्रोडक्ट (तांबे के बर्तन) और उत्तराखंड की रिंगाल क्राफ्ट (पहाड़ी बांस से बनी चीजें) शामिल हैं।

इनके अलावा, इस लिस्ट में नैनीताल की मोमबत्ती और बुरांश का शरबत भी है। बुरांश का शरबत रोडोडेंड्रोन के फूलों से बनता है, जो एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है और इसके कई औषधीय फायदे भी हैं।

विरासत को बचाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा देने की पहल

ये सभी प्रोडक्ट्स उत्तराखंड के अनोखे हिमालयी भूगोल और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़े हैं। GI टैग इन प्रोडक्ट्स की असलियत को बचाता है, स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा देता है और सस्टेनेबल तरीकों को बढ़ावा देता है।

(हेडलाइन को छोड़कर, इस खबर को एशियानेट न्यूज एडिटोरियल स्टाफ ने एडिट नहीं किया है और यह एक सिंडिकेटेड फीड से प्रकाशित हुई है।)

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