
उत्तराखंड के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मेडिकल सीटों पर फर्जीवाड़े के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। गुरुवार को देहरादून में एएनआई से बात करते हुए चिकित्सा शिक्षा निदेशक आशुतोष सयाना ने बताया कि चार छात्राओं का एमबीबीएस एडमिशन रद्द कर दिया गया है। इन छात्राओं ने स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के तहत फर्जी दस्तावेज लगाकर एडमिशन लिया था।
आशुतोष सयाना ने कहा, "...उत्तराखंड में नीट (NEET) की काउंसलिंग पूरी तरह से ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से होती है। वेबसाइट पर उम्मीदवारों की मेरिट और रिजल्ट डाले जाते हैं। हमें पांच ऐसे उम्मीदवार मिले जिनके सर्टिफिकेट शक के घेरे में थे। मामला तुरंत संबंधित जिला अधिकारियों को भेजा गया और उनके सर्टिफिकेट रद्द कर दिए गए।"
इस फर्जीवाड़े को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने आरोपी छात्राओं और उनके परिवार वालों के खिलाफ देहरादून के क्लेमेंट टाउन और रायपुर थानों में एफआईआर दर्ज की है। सयाना ने बताया, "इस गंभीर मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 338 और 340 के तहत धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का केस दर्ज किया गया है।"
कार्रवाई की टाइमिंग पर बात करते हुए सयाना ने बताया कि अभी काउंसलिंग का दूसरा राउंड चल रहा है। नया सेशन शुरू नहीं हुआ है, इसलिए छात्राओं ने अभी पढ़ाई शुरू नहीं की थी। उन्होंने कहा, "कॉलेज लेवल पर एडमिशन के समय सर्टिफिकेट्स की फिजिकल चेकिंग की जाती है।"
उत्तराखंड के चिकित्सा शिक्षा निदेशक ने साफ किया कि अब से नीट काउंसलिंग का फायदा उठाने वाले उम्मीदवारों के सर्टिफिकेट्स को वेरिफिकेशन के लिए सीधे जारी करने वाले अधिकारियों के पास भेजा जाएगा। आशुतोष सयाना ने कहा, "आगे से चाहे डोमिसाइल हो या कोई और कोटा, सभी सर्टिफिकेट्स की फिजिकल जांच होगी।"
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