Uttarakhand News: धामी सरकार की बड़ी पहल, पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज से बदलेगी सीमांत क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं

Published : Oct 29, 2026, 03:14 PM IST
pithoragarh medical college

सार

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में ₹750 करोड़ से अधिक की लागत से मेडिकल कॉलेज बन रहा है। मुख्यमंत्री धामी के मुताबिक, यहां इसी सत्र से पढ़ाई शुरू हो गई है।

उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और चिकित्सा शिक्षा का विस्तार करने की दिशा में राज्य सरकार लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में पिथौरागढ़ में ₹750 करोड़ से अधिक की लागत से मेडिकल कॉलेज का निर्माण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि इस मेडिकल कॉलेज में इसी शैक्षणिक सत्र से पढ़ाई भी शुरू हो गई है। इससे सीमांत क्षेत्र के युवाओं को चिकित्सा शिक्षा हासिल करने के बेहतर अवसर मिलेंगे और आने वाले समय में स्थानीय लोगों को उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री धामी ने अपने बयान में कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के दूरस्थ और सीमांत इलाकों तक आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जाएं। पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस संस्थान के शुरू होने से क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं, दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

₹750 करोड़ से अधिक की लागत से बन रहा पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज

पिथौरागढ़ में बन रहा मेडिकल कॉलेज कुमाऊं के सीमांत क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है। पहाड़ी और दूरस्थ इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए बेहतर इलाज तक पहुंच हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है। गंभीर बीमारी या विशेषज्ञ डॉक्टरों की जरूरत पड़ने पर मरीजों को कई बार दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज का निर्माण क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इससे चिकित्सा शिक्षा के लिए जरूरी शैक्षणिक ढांचे का विकास होगा और अस्पताल से जुड़ी सुविधाओं को भी आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

Pithoragarh Medical College में इसी सत्र से MBBS की पढ़ाई शुरू

पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पहले बैच के लिए 50 एमबीबीएस सीटों को मंजूरी मिली है। इनमें 43 सीटें राज्य कोटे और 7 सीटें अखिल भारतीय कोटे के तहत निर्धारित हैं।

इससे उत्तराखंड के विद्यार्थियों के साथ दूसरे राज्यों से आने वाले छात्रों को भी यहां चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। नए मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई शुरू होना इसलिए भी अहम है, क्योंकि इससे सीमांत जिले में उच्च शिक्षा के विकल्प बढ़ेंगे और भविष्य के डॉक्टरों को तैयार करने में मदद मिलेगी।

सीमांत क्षेत्र के युवाओं को मिलेगा मेडिकल शिक्षा का बेहतर अवसर

पिथौरागढ़ और आसपास के पर्वतीय इलाकों के विद्यार्थियों को मेडिकल की पढ़ाई के लिए अक्सर दूसरे शहरों या राज्यों में जाना पड़ता है। नए मेडिकल कॉलेज के संचालन से उन्हें अपने क्षेत्र के करीब चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा। स्थानीय स्तर पर मेडिकल शिक्षा का विस्तार होने से क्षेत्र में शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की भी उम्मीद है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि संस्थान में पढ़ाई, प्रशिक्षण, शिक्षकों और अन्य जरूरी सुविधाओं को किस तरह विकसित किया जाता है।

पिथौरागढ़ में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद

मेडिकल कॉलेज का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य केवल डॉक्टर तैयार करना नहीं, बल्कि क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती देना है। संस्थान के पूरी तरह विकसित होने और उससे जुड़ी चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के बाद पिथौरागढ़ तथा आसपास के सीमांत क्षेत्रों के लोगों को विशेषज्ञ उपचार के बेहतर विकल्प मिल सकते हैं। इससे मरीजों को इलाज के लिए दूर के बड़े शहरों पर निर्भर रहने की जरूरत कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, यह लाभ अस्पताल में उपलब्ध विशेषज्ञ डॉक्टरों, चिकित्सा उपकरणों, जांच सुविधाओं और अन्य संसाधनों पर निर्भर करेगा।

आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर धामी सरकार का जोर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ और आधुनिक बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज को इसी प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है। पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में मेडिकल कॉलेजों और उनसे जुड़ी चिकित्सा सुविधाओं का विकास महत्वपूर्ण हो जाता है। पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज के निर्माण और यहां पढ़ाई की शुरुआत से सीमांत क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की नई संभावनाएं खुली हैं।

अब इस परियोजना की सफलता इस बात से भी तय होगी कि निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करने के साथ शिक्षण व्यवस्था, चिकित्सा सेवाओं और जरूरी संसाधनों को कितनी प्रभावी तरह से उपलब्ध कराया जाता है। इससे स्थानीय युवाओं को शिक्षा के अवसर मिलने के साथ क्षेत्र के लोगों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की दिशा में भी मदद मिल सकती है।

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