
उत्तराखंड के दूरस्थ और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सड़क कनेक्टिविटी लगातार मजबूत हो रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) ने ऐसे गांवों की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभाई है, जहां पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण आवागमन लंबे समय तक बड़ी चुनौती बना रहा। सड़क पहुंचने से ग्रामीणों की आवाजाही आसान हुई है और शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि तथा पर्यटन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अब अपने चौथे चरण में पहुंच चुकी है। पिछले तीन चरणों में उत्तराखंड में 11,595 करोड़ रुपये की लागत से 21,915 किलोमीटर लंबी 2,826 सड़कों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इन सड़कों से प्रदेश के 1,860 गांवों को सड़क सुविधा का लाभ मिला है।
पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं है, बल्कि यह गांवों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी भी है। सड़क बनने के बाद विद्यार्थियों को स्कूल और कॉलेज पहुंचने के लिए पहले जैसी मुश्किल राह नहीं तय करनी पड़ती। गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को भी अस्पताल तक पहुंचाने में समय कम लगता है।
किसानों के लिए भी सड़क संपर्क काफी अहम साबित हुआ है। अब वे अपनी उपज को अपेक्षाकृत आसानी से नजदीकी बाजार और मंडियों तक पहुंचा पा रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर कारोबार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिल रही है। पर्यटन की दृष्टि से भी बेहतर सड़क संपर्क दुर्गम क्षेत्रों के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के दूरदराज और दुर्गम गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने को प्राथमिकता दी है। सरकार का जोर ऐसे सभी क्षेत्रों तक सड़क नेटवर्क पहुंचाने पर है, जहां अभी कनेक्टिविटी की जरूरत बनी हुई है। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत अधिक से अधिक गांवों को शामिल करने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री धामी केंद्र सरकार के समक्ष भी उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों और सड़क कनेक्टिविटी की जरूरतों को लगातार रखते रहे हैं। इसी दिशा में प्रदेश में पीएमजीएसवाई सड़कों का विस्तार जारी है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के पहले चरण में उत्तराखंड के 309 गांवों को जल्द सड़क नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी तेज कर दी गई है। इसके तहत 1,707 करोड़ रुपये की लागत से 1,228.20 किलोमीटर लंबाई की 184 सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। PMGSY-4 के तहत राज्य के सभी 13 जिलों में सड़क नेटवर्क का विस्तार प्रस्तावित है। इस चरण में कुल 1,479 सड़कों का निर्माण किया जाएगा, जिनकी कुल लंबाई करीब 9,344 किलोमीटर होगी। इससे पहाड़ी और दूरस्थ इलाकों में सड़क कनेक्टिविटी के और मजबूत होने की उम्मीद है।
PMGSY-4 के पहले चक्र में पौड़ी गढ़वाल के सबसे ज्यादा 68 गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ा जा रहा है। इसके बाद अल्मोड़ा और टिहरी जिले में 47-47 गांव, जबकि बागेश्वर में 35 गांव सड़क नेटवर्क से जुड़ेंगे। पिथौरागढ़ के 25 गांव, नैनीताल और उत्तरकाशी के 24-24 गांव भी इस चरण में लाभान्वित होंगे। वहीं चमोली के 17 गांव, देहरादून और रुद्रप्रयाग के 10-10 गांव तथा हरिद्वार के 2 गांवों को सड़क सुविधा मिलने जा रही है।
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में सड़क कनेक्टिविटी का सीधा असर ग्रामीण जीवन पर पड़ता है। बेहतर सड़कें लोगों को बाजार और सरकारी सेवाओं तक पहुंचने में मदद करती हैं। साथ ही कृषि उत्पादों की आवाजाही, स्थानीय कारोबार और पर्यटन गतिविधियों के लिए भी आधार तैयार होता है। PMGSY-4 के तहत प्रस्तावित विस्तार से आने वाले समय में प्रदेश के उन गांवों तक भी सड़क पहुंचने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा, जो अभी तक दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बेहतर कनेक्टिविटी से दूर हैं।
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